देश की अदालतों में तात्कालिक न्याय की लिए वर्षों से भटक रहे लोगों के लिए राहतभरी खबर है। केन्द्र सरकार द्वारा जल्द न्याय दिलाने के लिए ‘न्याय प्रदान एवं कानून सुधार राष्ट्रीय मिशन’ को मंजूरी दे दी गई है। जिसके बाद मामलों को औसतन 15 साल की बजाय 3 साल के भीतर निपटाना होगा। देश भर की अदालतों में लगभग ढाई करोड़ मामलों की समस्या से निपटने के लिए कैबिनेट ने इस मिशन को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कानून मंत्रालय के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि मिशन का उद्देश्य न्याय में विलंब को कम करना और ढांचागत परिवर्तन तथा कार्य निष्पादन के मानदंड स्थापित करके इस बारे में जवाबदेही को और बढ़ाना है। इस पर अगले पांच साल में 5510 करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। इसमें से 75 प्रतिशत का वहन केन्द्र करेगा और शेष का संबंधित राज्य। पूर्वोत्तर राज्यों के मामलों में केन्द्र 90 प्रतिशत खर्च उठाएगा।
इस बारे में जारी बयान में दावा किया गया कि जल्द न्याय मुहैया कराने के इस मिशन के तहत प्रयास यह होगा कि 2015 तक अदालतों में मामलों के लंबित रहने की अवधि को 15 से घटा का तीन साल तक कर दिया जाए। पहले यह समय सीमा 2012 तय की गई थी। परन्तु तमाम मुश्किलों को देखते हुए इसे तीन साल बढ़ा दिया गया। कैबिनेट दिसंबर 2009 में इसे सिद्धांतत: मंजूरी दे चुका है, परन्तु यह मिशन आज से लागू हो जाएगा।


