नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के दाम बढ़ा दिया है। इस सरकार के कार्यकाल में महंगाई से परेशान लोगों की मुश्किलें इससे और बढ़ गई हैं। सरकार ने कुछ समय पहले ही पेट्रोल के दाम भी बढ़ाए थे। कांग्रेस की अगुवाई में 2004 में केंद्र में बनी यूपीए सरकार के राज में पेट्रो पदार्थों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। अब आम आदमी के साथ का हाथ, आम लोगों के गले तक पहुंच गया है।
केन्द्र में सरकार बनाने के बाद यूपीए ने पहली बार 16 जून 2004 को मिट्टी के तेल के दाम में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से केरोसिन तेल का दाम बढ़ाने का सिलसिला लगातार जारी है। 16 जून 2004 को दिल्ली में एक लीटर केरोसिन का मूल्य 9.02 रुपये था। 24 जून 2011 को मंत्री समूह की बैठक के बाद केरोसिन का दाम 14.83 रुपये तक पहुंच गया है। कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार ने आम लोगों का ईंधन कहे जाने वाले केरोसिन ऑयल के दाम में कुल मिलाकर नौ बार बढोतरी की।
पीएम मनमोहन सिंह के राज में केरोसिन ऑयल के दाम दोगुने तो नहीं हुए लेकिन डीजल और पेट्रोल के दाम करीब करीब दोगुने हो चुके हैं। यूपीए एक की मनमोहन के नेतृत्व वाली सरकार ने 15 जून 2004 को पहली बार डीजल की कीमतें बढ़ाईं। 14 जून 2004 तक दिल्ली में एक लीटर डीजल 21.73 रुपए का मिलता था। 25 जून 2011 को एक लीटर डीजल 41.12 रुपए का हो चुका है। ऐसे ही पेट्रोल के दाम में भी खासा इजाफा हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में 14 जून 2004 तक एक लीटर पेट्रोल 33.07 रुपए का मिलता था। 25 जून 2011 यानी आज वही पेट्रोल 63. 37 रुपए में मिल रहा है जो कि दोगुने से बस थोड़ी ही कम है।
गौरतलब है कि 24 जून को हुई मंत्री समूह की बैठक में सरकार ने डीजल के दाम में तीन रुपया, केरोसिन के दाम में दो रुपये तथा रसोई गैस सिलेण्डर के दाम में 50 रुपया बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। आम आदमी के रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ जाने से लोग काफी परेशान हैं। परन्तु सरकार ने इसे मजबूरी में उठाया गया कदम बढ़ाकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। विपक्षी पार्टियों ने भी डीजल, केरोसिन और एलपीजी के दामों में बढ़ोत्तरी का विरोध करने का फैसला किया है, परन्तु ऐसा लग नहीं रहा है कि सरकार इससे दामों में की गई बढ़ोतरी वापस लेगी।


