: पुरुष प्रधान मानसिकता को बदलने की जरूरत – चौहान : भोपाल में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकार रूबी सरकार की पुस्तक स्वयंसिद्धा का विमोचन किया। स्वयंसिद्धा में मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मी उन महिलाओं की कहानी है, जो आज अपने-अपने क्षेत्र में अपने मेहनत और काबिलियत के दम पर पहुंची हैं। विमोचन के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कि समाज में बेटी को पराया धन माना जाता है। यहीं वजह है कि उसके साथ भेदभाव किया जाता है, जबकि हकीकत यह है कि शादी के बाद बेटा अपने माता-पिता के साथ कितने दिन रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है, जबकि बेटी जब तक सांस चलती है माता पिता का ध्यान रखती है।
उन्होंने कहा, आश्चर्य तो इस बात की है, कि समाज में बेटियों की कम होती संख्या गांव से ज्यादा शहरों में है। अशिक्षितों से ज्यादा शिक्षितों में है और गरीबों से ज्यादा अमीरों में है। उन्होंने स्वयंसिद्धा पुस्तक की सराहना करते हुए कहा, कि यह संदर्भ ग्रंथ उन महिलाओं पर केंद्रित है, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि नारी अबला नहीं सबला है। उन्होंने कहा कि ग्रंथ निश्चित ही समाज की मानसिकता बदलने के लिए यंत्र का काम करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच ने कहा कि यह कहना ठीक नहीं है कि मां बेटयों के साथ भेदभाव करती है, जबकि हकीकत यह है कि वह स्वयं भी भेदभाव की शिकार होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस बात का समर्थन किया कि आज बेटियों के प्रति लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने महिलाओं को बराबरी का दर्जा, सुरक्षा व सहयोग देने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए यप्रदेश सरकार को पहल करनी होगी। और इस दिशा में पहल करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का नाम बदलने का सुझाव दिया । श्रीमती बुच का कहना है, कि कन्यादान शब्द से महिलाओं को कमजोर होने का अहसास कराता है।


