चाहे भारत में पाश्चात्य संस्कृति भारतीयों को अपने रंग में ढाल रही हो… लेकिन विदेशों में बसे भारतीय आज भी अपनी संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं.. और पाश्चात्य कल्चर उन पर कोई असर नहीं छोड़ पाई है… इसीलिए तो जहां हम अपने देश में अपने परंपरागत खेलों को भूलते जा रहे हैं… वहीं सिंगापुर में बसे भारतीय इन्हीं परंपरागत खेलों की अपनी संस्कृति अपनी शान समझते हैं… और धूमधाम से इन खेलों का आयोजन करते हैं… इसी कड़ी में हर साल की भांति इस बार भी हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में 15 अप्रैल को विवेकानंद सेवा संघ, सिंगापुर के तत्वाधान में इंडियन ट्रेडिशनल गेम्स फेस्टिवल 2012 का आयोजन किया जा रहा है… इसमें सिंगापुर में बसे हजारों भारतीय हिस्सा लेंगे.. मुख्य रूप से इस फेस्टिवल गिल्ली डंडा, लट्टू भोवरा, कंचे, सागरगोटे, रंगोली, खो-खो, कबड्डी आकर्षण का केन्द्र होंगे… वहीं द ओल्डेस्ट मार्शल आर्ट (सिलाम्बन) मुख्य आकर्षण का केन्द्र होगी.
रामवीर सिंह डागुर
सिंगापुर


