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आईपीएल 5 : टीवी पर चमक-दमक है, मगर रेटिंग और दर्शक नहीं

भले ही इसके लिए किसी को भी दोष दें लेकिन कड़वी हकीकत यही है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का पांचवां संस्करण अभी तक अपने पूर्व संस्करणों की तुलना में फीका साबित हो रहा है। कम से कम टेलीविजन के आंकड़े तो यही कहानी बयां करते हैं। टेलीविजन दर्शकों के आंकड़े जुटाने वाली एजेंसी टैम मीडिया रिसर्च प्राववेट लिमिटेड की इकाई टैम स्पोट्र्स के आंकड़ों के अनुसार आईपीएल पांच के शुरुआती छह मैचों की औसत टेलीविजन दर्शक रेटिंग (टीवीआर) 3.76 रही। चौथे सत्र में यही टीवीआर 4.63 थी। टीवीआर एक खास वक्त पर कार्यक्रम के दर्शकों की तादाद बताती है। इसके अलावा आईपीएल पांच के दर्शकों की संख्या 9.1 करोड़ पहुंच गई है जो आईपीएल चार के 10.17 करोड़ दर्शकों से कम है। आईपीएल पांच के इस कमजोर प्रदर्शन ने मीडिया में कंपनियों के लिए विज्ञापन अनुबंध करने वालों (मीडिया बायर) और विज्ञापनदाताओं को चिंतित कर दिया है।

भले ही इसके लिए किसी को भी दोष दें लेकिन कड़वी हकीकत यही है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का पांचवां संस्करण अभी तक अपने पूर्व संस्करणों की तुलना में फीका साबित हो रहा है। कम से कम टेलीविजन के आंकड़े तो यही कहानी बयां करते हैं। टेलीविजन दर्शकों के आंकड़े जुटाने वाली एजेंसी टैम मीडिया रिसर्च प्राववेट लिमिटेड की इकाई टैम स्पोट्र्स के आंकड़ों के अनुसार आईपीएल पांच के शुरुआती छह मैचों की औसत टेलीविजन दर्शक रेटिंग (टीवीआर) 3.76 रही। चौथे सत्र में यही टीवीआर 4.63 थी। टीवीआर एक खास वक्त पर कार्यक्रम के दर्शकों की तादाद बताती है। इसके अलावा आईपीएल पांच के दर्शकों की संख्या 9.1 करोड़ पहुंच गई है जो आईपीएल चार के 10.17 करोड़ दर्शकों से कम है। आईपीएल पांच के इस कमजोर प्रदर्शन ने मीडिया में कंपनियों के लिए विज्ञापन अनुबंध करने वालों (मीडिया बायर) और विज्ञापनदाताओं को चिंतित कर दिया है।

पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक मीडिया बायर ने बताया, ‘कंपनियां मोटी रकम में आईपीएल से जुड़ी हैं। इसलिए इसका कमतर प्रदर्शन स्वाभाविक रूप से चिंता का मसला है।’ विज्ञापन की दरें पहले सत्र की तुलना में लगभग 20 फीसदी ऊपर चली गई हैं। हालांकि इस साल पिछले वर्ष की तुलना में उनमें 15 से 20 फीसदी की कमी देखी जा रही है। एलएमजी के मुख्य कार्याधिकारी सुरेश बालकृष्णन का कहना है, ‘मुझे रेटिंग को लेकर कोई हैरत नहीं है। मुझे ऐसी ही उम्मीद थी। निश्चित रूप से अति क्रिकेट और विदेशी जमीन पर भारतीय क्रिकेट टीम के खस्ता प्रदर्शन से क्रिकेट की चमक कम हुई है।’ इस टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रसारक मैक्स का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी मल्टी स्क्रीन मीडिया (एमएसएम) के अध्यक्ष रोहित गुप्ता ने कहा, ‘अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा क्योंकि अभी तो टूर्नामेंट गति भी नहीं पकड़ पाया है। कुछ मैचों की रेटिंग 5 से ऊपर रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि स्टेडियम पूरे भरे हुए हैं और जैसे-जैसे टूर्नामेंट परवान चढ़ेगा टीवी दर्शकों की संख्या भी बढ़ेगी।

उनके दावे पर कुछ यकीन भी कर रहे हैं। एमईसी, दक्षिण एशिया की मुख्य परिचालन अधिकारी शुभा जॉर्ज का कहना है, ‘मैं शुरुआती कुछ मैचों की रेटिंग को लेकर चिंतित नहीं हूं। आगे दर्शक संख्या बढ़ेगी।’ कुछ मीडिया प्लानरों का कहना है कि मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर ङ्क्षकग्स के बीच पहले मैच की टीवीआर 6.9 रही जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स और डेल्ही डेयरडेविल्स के बीच मैच की टीवीआर 6.5 रही।  मैदान के अलावा प्रसारण प्रायोजक वोडाफोन का भी मानना है कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी है। कंपनी प्रवक्ता ने कहा, ‘आईपीएल हर लिहाज से हमारे लिए बेहद फायदेमंद रहा है। यह अभी भी देश में प्रचार का सबसे बड़ा मंच है। हालांकि  इसकी कामयाबी इसी बात से तय होगी कि इसमें किस दर्जे का क्रिकेट खेला जाता है और यह भविष्य में कितना अहम बना रहेगा।’

लेकिन कुछ विज्ञापनदाता ऐसे भी हैं जो आईपीएल से दूर रहने के फैसले पर खुशी जता रहे हैं। उनमें से एक हुंडई का कहना है कि इस फैसले की वजह दर्शक संख्या में आ रही गिरावट के साथ-साथ प्रायोजन की दरें भी रहीं। हुंडई इंडिया के निदेशक (बिक्री एवं विपणन) अरविंद सक्सेना ने कहा, ‘हमारी आईसीसी के साथ वैश्विक प्रतिबद्घता भी है और इस तरह हमने आईपीएल की तुलना में आईसीसी टूर्नामेंट के साथ जुड़े रहने को तरजीह दी।’ आईपीएल से बाहर रहने की गोदरेज समूह की वजह भी कमोबेश हुंडई जैसी ही है। आईपीएल के पहले चार सत्रों में गोदरेज सहायक प्रायोजक के तौर पर जुड़ी रही और इसने अपने मूल ब्रांड को दोबारा स्थापित करने में आईपीएल के मंच का उपयोग किया। इस साल चैनल महज चार प्रायोजकों को ही जोड़ पाया है जबकि पिछले साल इसके साथ 10 प्रायोजक थे। इस साल महज वोडाफोन, पेप्सी, आइडिया और टाटा फोटोन ही हैं।

पिछले साल सेट मैक्स ने करीब 1,000 करोड़ रुपये की कमाई की और तकरीबन 70 कंपनियों ने चैनल पर अपने विज्ञापन दिखाए। लेकिन इस साल ज्यादा मोलभाव की स्थिति को देखते हुए कमाई सिकुड़ सकती है। पिछले साल क्रिकेट विश्व कप और उसके बाद आईपीएल के कारण क्रिकेट की खुराक कुछ ज्यादा ही हो गई और उसके बाद रही सही कसर भारत के खराब प्रदर्शन ने पूरी कर दी। इन धारणाओं ने क्रिकेट और विज्ञापनदाताओं के रिश्तों को प्रभावित किया। आईपीएल की लोकप्रियता में आई गिरावट ने दूसरे प्रसारकों की नींद भी उड़ा दी है जिनके पास दिखाने के लिए काफी क्रिकेट है। जैसे भारत के न्यूजीलैंड और इंगलैंड के साथ होने वाले मैचों के प्रसारण अधिकार रखने वाली स्टार इंडिया और वल्र्ड कप ट्वेंटी-20 और चैंपियंस लीग के प्रसारण अधिकार रखने वाला ईएसपीएन-स्टार स्पोट्र्स। मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग पर आधारित बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में भारत के 98 अंतरराष्ट्रीय मैच होने हैं जबकि 2011 में 113 मैच हुए। रिपोर्ट के अनुसार, ‘इनमें से भी अधिकांश टेस्ट मैच हैं जिनकी दर्शक संख्या एक दिवसीय मैचों से कम होती है। ऐसे में हमें लगता है कि विज्ञापनदाता सामान्य मनोरंजन चैनलों का रुख करेंगे।’ यह रिपोर्ट कहती है कि इस साल सामान्य मनोरंजन चैनलों की कमाई में इजाफा कर सकता है। साभार : बीएस

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