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”बेगम बानो और खातून” का श्रीप्रकाश जायसवाल ने लोकार्पण किया

नई दिल्ली : रमा पांडे की पुस्तक, ‘बेगम बानो और खातून‘ के लिए पाठकों का इंतजार समाप्त हुआ। माननीय केंद्रीय कोयला मंत्री, श्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने नई दिल्ली के एम्बेसेडर होटल में आज आयोजित समारोह में इस पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बतौर सम्मानित अतिथि, कवि और गीतकार-पद्मश्री जावेद अख्तर, फिल्म निर्माता और कलाकार-पद्मश्री मुजफ्फर अली, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और कवि-अशोक चक्रधर और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष-ममता शर्मा भी उपस्थित थीं। इनके अतिरिक्त इस अवसर पर गजल सम्राट गुलाम अली, जामिया हमदर्द के कुलपति नजीब जंग और सांसद प्रभा ठाकुर जैसे गणमान्य लोग भी उपस्थिति थे। पुस्तक के लोकार्पण के बाद सूफी संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजस्थान के कलाकार, ‘बाबू खान मंगनियार समूह और जोधपुर राजघराने परंपरा की आखिरी दरबारी गायिका, जमीला खातून‘ ने अंतरात्मा की गहराई को छूने वाले सूफी संगीत को प्रस्तुत किया।

नई दिल्ली : रमा पांडे की पुस्तक, ‘बेगम बानो और खातून‘ के लिए पाठकों का इंतजार समाप्त हुआ। माननीय केंद्रीय कोयला मंत्री, श्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने नई दिल्ली के एम्बेसेडर होटल में आज आयोजित समारोह में इस पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बतौर सम्मानित अतिथि, कवि और गीतकार-पद्मश्री जावेद अख्तर, फिल्म निर्माता और कलाकार-पद्मश्री मुजफ्फर अली, हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और कवि-अशोक चक्रधर और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष-ममता शर्मा भी उपस्थित थीं। इनके अतिरिक्त इस अवसर पर गजल सम्राट गुलाम अली, जामिया हमदर्द के कुलपति नजीब जंग और सांसद प्रभा ठाकुर जैसे गणमान्य लोग भी उपस्थिति थे। पुस्तक के लोकार्पण के बाद सूफी संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजस्थान के कलाकार, ‘बाबू खान मंगनियार समूह और जोधपुर राजघराने परंपरा की आखिरी दरबारी गायिका, जमीला खातून‘ ने अंतरात्मा की गहराई को छूने वाले सूफी संगीत को प्रस्तुत किया।

‘बेगम बानो और खातून‘ पुस्तक में भारतीय मुस्लिम महिलाओं की कठिनाइयों और चुनौतियों का वर्णन है। इसमें उनके संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी है। इस पुस्तक में सात मर्मस्पर्शी और संवेदनशील घटनाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक मुस्लिम महिलाओं की मेहनत और हिम्मत बयां करती है। लेखिका ने इन महिलाओं के जीवन को काफी करीब से जानने का प्रयास किया है। इन महिलाओं के भीतर बेहतर जिंदगी के लिए बदलाव की चाहत विस्मय में डाल देने वाली है। इस पुस्तक में सामान्य परंपरागत पृष्ठभूमि वाली उन मुस्लिम महिलाओं के जीवन की सच्ची कहानियाँ हैं, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ने की हिम्मत और मजबूती दिखाई तथा अपनी जिंदगी में इज्जत के साथ आगे का रास्ता तय किया। इन घटनाओं को पुस्तक में साहित्य की ‘नाटक’ शैली में लिखा गया है।

सुश्री रमा पांडे ने अपनी किताब पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यह पुस्तक दरअसल भारतीय मुसलमान महिलाओं की वर्तमान स्थिति का खुलासा करती है, जिन्हें आम तौर पर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता है। बेगम, बानो और खातून मेरे सपनों का साकार रूप है। मैंने इन महिलाओं को काफी करीब से देखा है और मैं महसूस करती हूं कि अब उन्हें सलाम करने का समय आ गया है। सही अर्थों में वे रूढ़ियों को तोड़ने वाली, संघर्षशील और सफल कही जा सकतीं हैं।‘‘ बेगम बानो और खातून में विविध मनोभावों का चित्रण है और यह हमारे समाज की बदलती तस्वीर पेश करती है। विभिन्न कहानियों के माध्यम से इन महिलाओं के उत्साह और जीवन में बदलाव के लिए अपने सपनों को पूरा करने के संघर्ष का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसमें एक गृहिणी से उद्यमी बनने की यात्रा, फौजदारी मुकदमों की वकील बनने का दिलचस्प जज्बा, तलाक जैसे अभिशाप से लड़ते हुए दूसरों के लिए आशा का दीपक जलाने, पति के सऊदी अरब प्रवास के कारण घरेलू कार्यो की बोरियत से अलग पैराशूट जंपर बनने, और निकाह के लिए समाज को झकझोर देने वाली शर्त रखने वाली एक खिलाड़ी लड़की जैसी अनेक महिलाओं की दास्तान है।

रमा पांडे का परिचय : रमा पांडे 40 वर्षों से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉकास्टिंग, अभिनय/थियेटर, अध्यापन, लेखन, कार्यक्रम प्रस्तोता, आयोजन प्रबंधन और फिल्म निर्माण/निर्देशन के पेशे से जुड़ी हैं। उन्हें बचपन से ही रचनात्मक कार्यों में दिलचस्पी रही है और उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में अपना कॅरियर शुरू किया था। अपने पेशे में उन्हें डीडी इंडिया और बीबीसी हिन्दी में काम करने का भरपूर अनुभव है। फिल्म उद्योग में उन्होंने 8 कलात्मक फिल्मों में अभिनय, 300 टीवी फिल्मों और 35 एमएम की 4 लंबी फीचर फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने उस जमाने में भारतीय दूरदर्शन पर निर्माता का कार्य किया, जब यह चैनल पारिवारिक मनोरंजन का एकमात्र साधन हुआ करता था। उन्होंने ग्रामीण दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। बुश हाउस लंदन में बीबीसी हिन्दी के लिए अपनी सेवा के साथ-साथ उन्होंने बीबीसी एशियन टेलीविजन के लिए भी लगातार काम किया और एशिया में बीबीसी के कुछ बड़े फिल्ड प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में योगदान दिया।

उन्होंने लेखन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्हें अनेक धारावाहिकों, कहानियों, कार्यक्रमों, फिल्मों, डॉक्युमेंटरीज लिखने का श्रेय प्राप्त है। उन्होंने अनेक मल्टी-एपिसोड सीरियल प्रसारणों का लेखन, निर्माण और निर्देशन किया है, जिनमें शाबाश बेगम, सुनो कहानी, जानें अपना देश शामिल हैं। उन्होंने सैकड़ों टेली-फिल्म, समाचार कैप्सूल और डॉक्युमेंटरी का निर्माण भी किया है। उनके द्वारा लिखित एक और पुस्तक फैसले का प्रकाशन पहले हो चुका है। इसमें उन मुसलमान महिलाओं की सच्ची कहानियाँ हैं, जिन्होंने सुविधाहीन होते हुए भी जीवन में सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए साहस के साथ सफल संघर्ष किया। सुश्री रमा पांडे को कई सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। उनकी कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियों में, बीबीसी रेडियो पर भारत की पहली महिला निर्माता-निर्देशक, लंदन (1981); 1971 में कनाडा के मॉण्ट्रियल में आयोजित ‘वर्ल्ड ट्रेड एग्जीबिशन‘ में भाग लेने वाली भारत की पहली सांस्कृतिक एम्बेसेडर; 1972-73 में इंडियन सैटेलाइट प्रोग्राम ‘एसआईटीई‘ की प्रथम निर्माता, निर्देशक/प्रस्तोता और ‘युव-वाणी‘ राजस्थान की प्रथम प्रस्तोता जैसे सम्मान शामिल हैं। इन सबके अलावे, 500 एपिसोड वाले सबसे लंबी अवधि तक प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘जानें अपना देश‘ का निर्देशन भी उन्होंने किया है, जिसमें समूचे भारत के युवाओं और परिवारों का लाइव परफॉर्मेंस दिखाया गया है।

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