जिसने खून-पसीने से सींचा इस देश को, सुख और भूख को भूल गया, जिसने इस धरती पर वो किया जिसे सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता, उसके खून की कद्र नहीं है हमारे देश की सरकार को. लंदन में आखिरकार नीलाम हो गई हमारे राष्ट्रपिता के खून सनी मिट्टी. चरखा और चश्मा तो अलग बात थी लेकिन उनके खून से तो सरोकार होना चाहिए था.. वो भला हो उस भारतीय का जिसने देश की लाज रख ली, और अपने पास रख ली देश की आन बान और शान की मिट्टी, महात्मा के खून की मिट्टी. इस बात को लिखते हुए मेरा खून खौल रहा था कि जहां देश घोटालों और विवादों से पटा हो वहां इस बात को जरा भी तवज्जो नही दी गई. क्रोध से भरा है मेरा मन….इसे देश का दुर्भाग्य ही माना जा सकता है.
जानकारी मिली कि उस समय के सैनिक पीपी नाम्बियार जी ने उस खून से सनी घास और मिट्टी को अपने पास रखा था और वो हमेशा संभाल कर रखते थे.. हमारे देश के हर नौजवानों की भावनाए जुड़ी हैं उस खून की मिट्टी से… एक पत्र में नाम्बियार जी ने लिखा था, “मुझे घटनास्थल से घास पर खून की एक बूंद मिली, जो सूख चुकी थी. मैं घास को काटा और वहाँ की मिट्टी भी उठा ली. वही पड़े एक हिंदी अखबार के पन्ने में मैंने इसे लपेट लिया.” खून से सनी मिट्टी घास लंदन के श्रॉपशायर रेसकोर्स में 10 हज़ार पॉन्ड लगभग 8 लाख में खरीदी गई… बाकी सामान को 71 लाख में नीलाम किया गया….वैसे नीलामी शब्द ही बड़ा अजीब है.
आमिर हुसैन


