लखनऊ। प्रतिभावान गायक रवि नागर का बीते शनिवार 21 अप्रैल को निधन हो गया। वे पिछले एक वर्ष से कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे लेकिन उनके निधन की खबर इतनी जल्दी आ जाएगी, किसी को इस पर विश्वास नहीं हुआ। शाम को आठ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वह लगभग पचास वर्ष के थे। इतने कम समय में एक प्रतिभाशील गायक के निधन से लोगों में शोक छा गया। यूं तो रवि को बहुत ही मधुर और सुरीला कण्ठ मिला था, उनकी गजलों के प्रशंसकों में विख्यात शायर कैफी आजमी जैसे लोग भी थे लेकिन रवि की पहचान एक खास क्षेत्र में अधिक बनी और वह क्षेत्र था रंग संगीत का। लखनऊ की ज्यादातर चर्चित नाट्य प्रस्तुतियां रवि नागर के संगीत और गायकी से सजी रहीं।
रवि नागर को प्रसिद्ध संगीतकार के. महावीर का गाना सुनकर संगीत में आने की प्रेरणा मिली थी। धुन के पक्के रवि ने मुम्बई जाकर उनसे सीखा। भातखण्डे संगीत संस्थान से भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। गायक राहत अली के संगीत से भी वह प्रभावित रहे। रवि का रंगमंच से सम्पर्क पहले अभिनेता के तौर पर हुआ। राज बिसारिया के ‘हॉस्टल’ में अभिनय किया। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के ‘रामलीला’ में सूत्रधार बने। रंग-संगीत की शुरूआत मुद्राराक्षस के ‘आला अफसर’ से हुई। भानु भारती, बंसी कौल, ब.व. कारंत जैसे प्रसिद्ध रंगकर्मियों के साथ काम किया। इप्टा के ज्यादातर नाटकों से जुड़े रहे। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का अकादमी सम्मान भी मिला। फिल्मों में संगीत के लिए निमंत्रण मिला लेकिन गए नहीं।
रवि नागर पिछले एक वर्ष से प्रोस्ट्रेट कैंसर से पीड़ित थे। पीजीआई में उनका इलाज भी हो रहा था। उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था लेकिन पिछले दिनों प्रलेस के सम्मेलन में गाते सुनकर लगा था कि उनके स्वर अभी हमारे कानों को यूं ही मधुरता प्रदान करते रहेंगे। उनके निधन का समाचार मिलते ही रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, राकेश, जुगल किशोर,अरुण त्रिवेदी, मृदुला भारद्वाज, अनिल रस्तोगी, गायिका मालिनी अवस्थी, कथक नर्तक सुरेन्द्र सैकिया सहित कई संस्कृतिकर्मी उनके घर पहुंच गये। रवि नागर के संयुक्त परिवार में मां, दो भाई के अतिरिक्त पत्नी रेखा, दो बेटे अनन्य एवं अनादि हैं। इसके अलावा इप्टा से जुड़े लोगों ने भी रवि के निधन पर शोक संवेदनाएं जताईं। उनका अंतिम संस्कार लखनऊ में ही किया गया।


