बंगारू लक्ष्मण चार साल तक जेल की सज़ा काटेंगे। बंगारू 11 साल पहले एक कल्पित हथियार सौदे में एक लाख रुपए रिश्वत लेने के दोषी हैं। बंगारू लक्ष्मण तब बीजेपी के अध्यक्ष थे और उन्होंने एक लाख की ये रकम नकली हथियार विक्रेता से हथियार सौदे के लिए रक्षा मंत्रालय में पैरवी के लिए ली थी। स्टिंग में उन्हें पार्टी मुख्यालय स्थित अपने कमरे में रिश्वत लेते दिखाया गया है। इसके ठीक बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। ये मामला 2001 में वेबसाइट ‘तहलका डॉट कॉम’ के स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा है, जिसमें लक्ष्मण को ब्रिटेन की एक फर्जी कंपनी वेस्ट एंड इंटरनेशनल को ठेका देने के लिए कैमरे पर कथित हथियार विक्रेता से रुपये लेते दिखाया गया था। तहलका के एडिटर के तौर पर इस स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े रहे अनिरुद्ध बहल ने अदालत के फैसले को भाजपा के लिए शर्मनाक बताया. ‘कोबरापोस्ट डॉट कॉम’ के संस्थापक और मुख्य सम्पादक बहल ने कहा, ‘यदि पार्टी के अध्यक्ष का आचरण इस तरह का हो तो यह किसी भी पार्टी के लिए शर्मनाक है. लेकिन हमारा उद्देश्य किसी विशेष पार्टी को निशाना बनाना नहीं था.’
भ्रष्टाचार के एक मामले में किये गए इस स्टिंग की पुरज़ोर तारीफ की जा रही है, और होनी भी चाहिए। आज के इस दौर में जब पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार से बुरी तरह प्रभावित हो गया है, और इस सिस्टम में आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है, ऐसे पत्रकारीय प्रयासों की तारीफ होनी ही चाहिए। इस मामले ने जहां बीजेपी को बचाव की मुद्रा में ला दिया और कांग्रेस को बीजेपी पर हमला करने का मौका दिया, वहीं ताज्जुब इस बात को लेकर है कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए लोकपाल लाने की पुरज़ोर वकालत करने वाली टीम अन्ना इस मामले में पूरी तरह खामोश रही। क्या ये भ्रष्टाचार का पर्दाफाश नहीं है? या फिर बीजेपी का भ्रष्टाचार उनकी नजर में भ्रष्टाचार नहीं है? रही बात बंगारू का स्टिंग करने वाले अनिरुद्ध बहल की। अनिरुद्ध बहल एक काबिल पत्रकार हैं। उन्होंने तहलका के बाद कोबरापोस्ट कंपनी की शुरुआत की और जन सरोकार वाले एक से बढ़कर एक स्टिंग किए, जिन्हें आज तक, स्टार न्यूज और आईबीएन 7 ने काफी प्रमुखता से दिखाया।
ब्लैकमनी लेने वाले बाबाओं का स्टिंग हो, चुनावी चंदे के लिए कुछ भी करने वाले नेताओं का स्टिंग, या फिर फतवे की बिक्री करने वाले उलेमाओं का स्टिंग हो, चर्बी से घी बनाने वाले धंधेबाज़ों का, या फिर गैर सरकारी संस्थानों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे लोग. अनिरुद्ध बहल और उनकी टीम के हर खुलासे में आम आदमी का हित दिखा और गलत करने वाले की पोल खुलती दिखी, लेकिन अनिरुद्ध बहल की तरफ से कभी कोई ऐसा स्टिंग नहीं देखा गया, जिसके आने के बाद कांग्रेस और यूपीए सरकार की पेशानी पर बल पड़ा हो। इस दौर में जब स्टिंग को सवालिया निगाहों से देखा जाने लगा है, अनिरुद्ध बहल की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है, और देश अब उनसे ज्यादा की उम्मीद करने लगा है। ऐसे दौर में जबकि यूपीए सरकार के घोटालों की लिस्ट काफी लंबी होती जा रही है, अनिरुद्ध बहल से ऐसी उम्मीद करना बिल्कुल वाजिब है कि वो यूपीए सरकार के कारनामों का पर्दाफाश करते हुए एक स्टिंग ऑपरेशन करें, और जनता को एक बड़े सच से अवगत कराएं।
लेखक अमर आनंद पत्रकार हैं तथा कोबरापोस्ट से जुड़े रहे हैं.


