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अचानक भड़क गया कानपुर नगर निगम का अधिकारी, और की बदतमीजी

आदरणीय यशवंत भाई नमस्कार. आज आपसे कुछ शेयर करना चाहता हूं अगर आप जरूरी समझे तो आम इंसान के हित को ध्यान में रखते हुए इसे प्रकाशित करें, जिससे कि आम इंसान आये दिन होने वाले इस तरह के बर्ताव से कुछ राहत महसूस कर सके. घटना कानपुर नगर की है. यहाँ पर नगर निगम का एक कार्यालय है, जो कि मरियामपुर हॉस्पिटल के तिराहे पर है. कल से वहां पर होने वाले निकाय चुनाव में मतदाता के नाम बढ़वाने का काम शुरू हुआ है. मैं आज इस कार्यालय में पहुंचा तो अन्दर जाते ही सामने बने कमरे में गया और वह मौजूद कर्मचारी से बड़े ही विनर्मता पूर्वक पूछा कि मुझे अपना नाम भी वोटर लिस्ट में जुड़वाना है. इस पर उक्त कर्मचारी ने मुझसे मेरे वार्ड का नंबर पूछा तो मेरे बताने पर उन्होंने मुझे दूसरे कमरे में “संतोष” जी के पास जाने को लिए कहा. मुझे बताया गया कि आपके वार्ड का काम वो देख रही हैं, मेरे पास दूसरे वार्ड का काम है.

आदरणीय यशवंत भाई नमस्कार. आज आपसे कुछ शेयर करना चाहता हूं अगर आप जरूरी समझे तो आम इंसान के हित को ध्यान में रखते हुए इसे प्रकाशित करें, जिससे कि आम इंसान आये दिन होने वाले इस तरह के बर्ताव से कुछ राहत महसूस कर सके. घटना कानपुर नगर की है. यहाँ पर नगर निगम का एक कार्यालय है, जो कि मरियामपुर हॉस्पिटल के तिराहे पर है. कल से वहां पर होने वाले निकाय चुनाव में मतदाता के नाम बढ़वाने का काम शुरू हुआ है. मैं आज इस कार्यालय में पहुंचा तो अन्दर जाते ही सामने बने कमरे में गया और वह मौजूद कर्मचारी से बड़े ही विनर्मता पूर्वक पूछा कि मुझे अपना नाम भी वोटर लिस्ट में जुड़वाना है. इस पर उक्त कर्मचारी ने मुझसे मेरे वार्ड का नंबर पूछा तो मेरे बताने पर उन्होंने मुझे दूसरे कमरे में “संतोष” जी के पास जाने को लिए कहा. मुझे बताया गया कि आपके वार्ड का काम वो देख रही हैं, मेरे पास दूसरे वार्ड का काम है.

मैं उनके बताये हुए कमरे में जो कि वहां के कर निरीक्षक का कमरा था, मैंने प्रवेश करते हुए संतोष जी के बारे में पूछा और उन्हें अपने आने का कारण बताया. तभी संतोष जी द्वारा मुझे बताया गया कि मुझे फिर से उसी कमरे में जाना है जहां पर मैं पहले हो कर आया था. मैंने भी उन्हें बोला कि मैं उसी रूम से आ रहा हूं और वहां से ही मुझे आपके पास भेजा गया है. मेरी और संतोष की बात अभी विनर्मता पूर्वक चल ही रही थी कि तभी वह मौजूद अधिकारी श्रीमान अनिल कुमार जी अचानक से अपनी सीट पर से चीखने और चिल्लाने लगे और अभद्रतापूर्वक तरीके से पेश आने लगे. मैंने उन्हें बोला भी कि मेरी आपसे कोई भी बात नहीं हो रही है फिर भी आप अपशब्द का उपयोग क्यों कर रहें है?

इस पर वो अपना रौब दिखाते हुए अपनी कुर्सी से उठे और मुझसे धक्का-मुक्‍की करने पर उतर आये. मैं ये समझ ही नहीं पाया कि अचानक से हुआ क्या शायद वो लोग काम करना ही नहीं चाहते और अपनी इस गुस्सा को आम आदमी पर उतरना चाहते हैं. आपसे अनुरोध है कि कृपया इसे इसलिए प्रकाशित करें क्यों कि ये समस्या आम आदमी की है, जो भी अपना कीमती समय निकाल कर वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने जाता है और वहां के अधिकारियों की इस तरह की हरकतों से आहत और निराश होकर लौट जाता है. जबकि आये दिन समाचार पत्रों द्वारा सन्देश दिया जा रहा है कि अपना नाम लिस्ट में डलवायें और वहां के कर्मचारियों की इस तरह काम में लापरवाही और अभद्र तरीके से आम आदमी की कौन सुने…?

नवदीप

कानपुर

8577924914

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