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काम पर लौटें पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कर्मी : कुठियाला

: विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा- सभी आठ मांगों पर बनी सहमति : भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और काम पर लौटने की अपील की है। कुलपति ने कहा कि कर्मचारियों की आठों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारी एसोशिएसन के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में सहमति बन चुकी है। ऐसे में जब परीक्षाएं और प्रवेश का समय है, विश्वविद्यालय के व्यापक हित में कर्मचारियों को अपनी हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आना चाहिए। कुलपति ने कहा कि अपने अधिकारों की बात करना कर्मचारियों का लोकतांत्रिक अधिकार है किंतु विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के व्यापक हित में कार्य करना चाहिए।

 

: विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा- सभी आठ मांगों पर बनी सहमति : भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और काम पर लौटने की अपील की है। कुलपति ने कहा कि कर्मचारियों की आठों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारी एसोशिएसन के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में सहमति बन चुकी है। ऐसे में जब परीक्षाएं और प्रवेश का समय है, विश्वविद्यालय के व्यापक हित में कर्मचारियों को अपनी हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आना चाहिए। कुलपति ने कहा कि अपने अधिकारों की बात करना कर्मचारियों का लोकतांत्रिक अधिकार है किंतु विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के व्यापक हित में कार्य करना चाहिए।

 

विश्वविद्यालय के कुलसचिव चंदर सोनाने ने बताया कि विश्वविद्यालय के कर्मचारी एसोशिएसन के पदाधिकारियों से अब तक कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अंतिम वार्ता में कर्मचारियों की सभी आठ मांगों पर सहमति बन चुकी है। जिनमें विश्वविद्यालय द्वारा निकाले गए विज्ञापन पर मप्र राज्य अनूसूचित जनजाति आयोग के निर्णय तक कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसके साथ ही कर्मचारियों की पदोन्नति, संविदा कर्मियों के  नियमितीकरण तथा टास्क कर्मी जिनकी सेवा अवधि 8 से 10 साल पूरी हो चुकी है के मामले पर विश्वविद्यालय की महापरिषद के सदस्य माननीय मुख्यमंत्री द्वारा एक छः सदस्यीय समिति का गठन 3 मई को कर दिया गया है, जो चार माह में इन मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट देगी।

समयमान वेतनमान की अधिसूचना 19 अप्रैल को जारी कर दी गयी है। प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उनकी नियुक्ति पर महापरिषद या प्रबंध समिति का निर्णय बाध्यकारी है। इसके अलावा कर्मचारी संगठन की यह मांग भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार कर ली है कि प्रबंध समिति की कार्यवाही का विवरण संगठन को दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जब प्रशासन सभी मांगों को स्वीकार कर चुका है, तब हड़ताल को जारी रखना उचित नहीं है क्योंकि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं और प्रवेश जैसी सेवाएं आवश्यक प्रकृति की हैं और हड़ताल के लंबा चलने से विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है। प्रशासन ने कर्मचारियों से तुरंत काम पर लौटने और विश्वविद्यालय को सुचारू रूप से चलाने में उनके सहयोग की अपील की है।

प्रेस विज्ञप्ति

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