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आतंकवादरोधी संगठन बनाने की गृह मंत्री की कोशिश को लगा राजनीतिक ब्रेक

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रिय प्रोजेक्ट एनसीटीसी पर राजनीतिक ब्रेक लग गया है. सम्मलेन के बाद गृहमंत्री ने घोषणा की ३ मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का विरोध किया जबकि कुछ ने शर्तों के साथ समर्थन किया. उन्होंने यह भी कहा कि कई मुख्यमंत्रियों ने उसका समर्थन किया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ़ किया कि एनसीटीसी को आईबी के अधीन रखने का प्रस्ताव २००१ में गठित ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ने तय किया था. उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. यह दिलचस्प है कि आज जिन तीन मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का सबसे ज्यादा विरोध किया वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का हिस्सा रह चुके हैं. बैठक के बाद पत्रकारों को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आज की बैठक में हुई चर्चा के बाद सरकार विचार करेगी और फैसला लेगी.

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रिय प्रोजेक्ट एनसीटीसी पर राजनीतिक ब्रेक लग गया है. सम्मलेन के बाद गृहमंत्री ने घोषणा की ३ मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का विरोध किया जबकि कुछ ने शर्तों के साथ समर्थन किया. उन्होंने यह भी कहा कि कई मुख्यमंत्रियों ने उसका समर्थन किया. एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ़ किया कि एनसीटीसी को आईबी के अधीन रखने का प्रस्ताव २००१ में गठित ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ने तय किया था. उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी. यह दिलचस्प है कि आज जिन तीन मुख्यमंत्रियों ने एनसीटीसी का सबसे ज्यादा विरोध किया वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का हिस्सा रह चुके हैं. बैठक के बाद पत्रकारों को गृह मंत्री पी चिदंबरम ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आज की बैठक में हुई चर्चा के बाद सरकार विचार करेगी और फैसला लेगी.

उन्होंने कहा कि एनसीटीसी के गठन के लिए उन्हें संसद की मंजूरी मिली हुई है. आज एनसीटीसी के बारे में हुए मुख्यमंत्रियों एक सम्मलेन के बाद यह तय माना जा रहा है कि ३ फरवरी  को जिस तरह का नोटिफिकेशन गृह मंत्रालय ने एनसीटीसी की स्थापना के लिए जारी किया था, उसमें बड़े पैमाने पर परिवर्तन होगा. हालांकि यह भी सच है कि केंद्र सरकार एनसीटीसी के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल हो जायेगी, क्योंकि प्रधान मंत्री ने अपन भाषण में साफ़ कहा कि यह बैठक एनसीटीसी को आपरेशनलाइज़ करने के लिए ही बुलाई गयी है. जानकार बताते हैं कि आज की बैठक के बाद जो बात सबसे ज्यादा बार चर्चा में आई वह एनसीटीसी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधीन रखने को लेकर थी. लगता है कि एनसीटीसी को केंद्र सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो से अलग करना ही पडे़गा एकाध को छोड़कर सभी मुख्यमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद से लड़ना बहुत ज़रूरी है और मौजूदा तैयारी के आगे जाकर उस के बारे में कुछ किया जाना चाहिए.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया और कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह ३ फरवारी वाला अपने वह नोटिफिकेशन वापस ले ले और एनसीटीसी की स्थापना ही न करे. प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से समय-समय पर सलाह लेते रहें और आतंकवाद से मुकाबला राज्यों को ही करने दें. सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद को रोकने के लिए सामान्य पुलिस की ज़रूरत नहीं होती. उसके लिए बहुत की कुशल संगठन की ज़रुरत होती है और एनसीटीसी वही संगठन है. आज की बैठक में केंद्र सरकार के रुख से लगा कि वह एनसीटीसी में कुछ परिवर्तन कर सकती है. उसकी कंट्रोल की व्यवस्था में तो कुछ ढील देने को तैयार है लेकिन ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी की योजना  को वह पूरी तरह से रोकने की कोशिश करेगी. काले रंग के कवर में तैयार किये गए अपने लिखित भाषण में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज की बैठक में केंद्र सरकार को हर तरह से घेरा. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक राष्ट्र के रूप में हम संवैधानिक व्यवस्थाओं और केंद्र-राज्य संबंधों की ज़रुरत पर अब विश्वास नहीं करते. उन्होंने एनसीटीसी सम्मलेन के बहाने पूरी तरह से राजनीतिक माहौल बनाया और मुद्दों को कांग्रेस बनाम बीजेपी बनाने की कोशिश की.

आतंकवाद के शिकार हुए राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के संकलन, आंकड़ों के रखरखाव, इनके विश्लेषण सभी राज्यों के बीच इनके आदान प्रदान तथा सभी के सम्मिलित प्रयास से की जाने वाली कार्यवाही और मानिटरिंग के लिए एक एजेंसी आवश्यक है. लेकिन उन्होंने ३ फरवरी के आदेश का विरोध किया और कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण संस्था संसद के अधिनियम के माध्यम से गठित की जाए तो ज्यादा प्रभावी और स्थायी होगी तथा उत्तरदायी भी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बैठक में खुद नहीं आये थे. उन्होंने एक मंत्री को भेज दिया था. राज्य के मुख्य सचिव भी नहीं आये थे. लेकिन उनका भाषण सम्मलेन में बांटा गया जिसमें उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एनसीटीसी के लिए वर्तमान में जो व्यवस्था प्रस्तावित की गयी है वह सही नहीं है. एनसीटीसी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधीन कर दिया गया है और उसकी राज्यों की इकाइयों को स्वतंत्र काम करने की व्यवस्था है. यह राज्य की पुलिस के काम में अतिक्रमण है. उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि एनसीटीसी मूलतः इंटेलिजेंस इकठ्ठा करने और उसके विश्लेषण आदि पर ही ध्यान दे. कार्रवाई का   काम अधिकार राज्य सरकार ही करे. जहां ज़रूरी हो राज्य सरकार के अधिकारी एनसीटीसी से सहयोग हासिल करें.

दिन भर यही माहौल नज़र आया कि सभी मुख्यमंत्री एनसीटीसी के सवाल पर सहमत हैं. ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के विरोध के कारणों की तरह-तरह की व्याख्याएं होती रहीं. कई सरकारी अफसरों ने यह संकेत दिया कि मुख्यमंत्री लोग अपने तैयारशुदा भाषणों में जो विरोध कर भी रहे हैं वह मुकामी नौकरशाही की चिंताएं हैं क्योंकि एनसीटीसी के आ जाने के बाद पुलिसिंग की उनकी क्षमता पर भी सबकी नज़र रहा करेगी जहां अब तक उनका एकछत्र साम्राज्य बना हुआ है. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. राज्यों को पुलिस और इंटेलिजेंस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती रही है. उन्होंने कहा कि एनसीटीसी की स्थापना ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की सिफारिशों के बाद और उसी के आधार पर की गयी है. हालांकि उन्होंने आज इस बात का उल्लेख नहीं किया लेकिन यह ग्रुप आफ मिनिस्टर्स संसद पर आतंकवादी हमलों के बाद वाजपेयी सरकार के दौरान बनाया गया था. कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ के बाद भी इंटेलिजेंस की सफलता के बाद वाजपेयी सरकार ने इस तरह की संस्था की बात शुरू की थी.

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आतंकवाद कोई सीमा नहीं मानता इसलिए उसको किसी एक राज्य की सीमा में बांधने का कोई मतलब नहीं है. आतंकवाद अब कई रास्तों से आता है. समुद्र, आसमान, ज़मीन और आर्थिक आतंकवाद के बारे में तो सबको मालूम है लेकिन अब साइबर स्पेस में भी आतंकवाद है. उसको रोकना किसी भी देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. इसलिए अब तो हर तरह की टेक्नालोजी का इस्तेमाल करके हमें अपने सरकारी दस्तावेजों और बैंकिंग क्षेत्र की सुरक्षा का बंदोबस्त करना चाहिये. उन्होंने कहा कि हमारे देश की समुद्री सीमा साढ़े सात हज़ार किलोमीटर है जबकि १५ हज़ार किलोमीटर से भी ज्यादा अन्तरराष्ट्रीय बार्डर है. आतंक का मुख्य श्रोत वही है. उसको कंट्रोल करने में केंद्र सरकार की ही सबसे कारगर भूमिका हो सकती है उन्होंने कहा कि  इस बात की चिंता करने के ज़रुरत नहीं कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकार छीन लेगी. बल्कि ज्यों ज्यों राज्यों के आतंक से लड़ने का तंत्र मज़बूत होता जायेगा. केंद्र सरकार अपने आपको धीरे-धीरे उस से अलग कर लेगी.

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्‍ठ पत्रकार तथा स्‍तम्‍भकार हैं. वे एनडीटीवी, जागरण, जनसंदेश टाइम्‍स समेत कई संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर रह चुके हैं. इन दिनों दैनिक देश बंधु को वरिष्‍ठ पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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