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मीडिया में लैंगिक असमानता : महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व तीन प्रतिशत से कम

नई दिल्ली। भारत में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया पर एक ताजा सर्वेक्षण में लैंगिक असमानता की चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हुए बताया गया है कि इसमें तीन प्रतिशत से भी कम मान्यता प्राप्त महिला पत्रकार हैं। मीडिया स्टडीज ग्रुप के सर्वेक्षण के अनुसार छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में तो जिला स्तर पर महिला पत्रकारों की मौजूदगी शून्य है। इन राज्यों में असम, झारखंड, ओडिशा, नगालैण्ड, अरूणाचलप्रदेश और मणिपुर तथा केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी और दमन दीव शामिल हैं। इन प्रदेशों में जिला स्तर पर एक भी मान्यता प्राप्त महिला पत्रकार नहीं है। आंध्रप्रदेश में महिला पत्रकारों और संपादकों की संख्या सबसे अधिक 107 दर्ज की गई है।

नई दिल्ली। भारत में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया पर एक ताजा सर्वेक्षण में लैंगिक असमानता की चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हुए बताया गया है कि इसमें तीन प्रतिशत से भी कम मान्यता प्राप्त महिला पत्रकार हैं। मीडिया स्टडीज ग्रुप के सर्वेक्षण के अनुसार छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में तो जिला स्तर पर महिला पत्रकारों की मौजूदगी शून्य है। इन राज्यों में असम, झारखंड, ओडिशा, नगालैण्ड, अरूणाचलप्रदेश और मणिपुर तथा केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी और दमन दीव शामिल हैं। इन प्रदेशों में जिला स्तर पर एक भी मान्यता प्राप्त महिला पत्रकार नहीं है। आंध्रप्रदेश में महिला पत्रकारों और संपादकों की संख्या सबसे अधिक 107 दर्ज की गई है।
बिहार में जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त महिला पत्रकारों का प्रतिशत 9.56 प्रतिशत है। बिहार में 251 संवाददाताओं और संपादकों में केवल 24 महिलाएं हैं। छत्तीसगढ़ में 32 पत्रकारों में तीन महिलाएं हैं। मीडिया स्टडीज ग्रुप के अध्यक्ष अनिल चमड़िया ने कहा कि मीडिया के जरिये देश और समाज को दी जाने वाली जानकारी सामाजिक ताने बाने को प्रभावित करती है। इस दिशा में मीडिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की पहल की जानी चाहिए। सर्वेक्षण के अनुसार, ‘‘मीडिया में जिला स्तर पर कार्यरत महिला संवाददाताओं की संख्या मीडिया के मान्यता प्राप्त पुरूष पत्रकारों की तुलना में काफी कम है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथम दस राष्ट्रीय और भाषायी दैनिक अखबारों में मान्यता प्राप्त महिला पत्रकारों में से अधिकतर स्थानीय या क्षेत्रीय स्तर के अखबारों और संस्थाओं से जुड़ी हैं। 2011 के आईआरएस सर्वेक्षण के अनुसार, 10 राष्ट्रीय हिंदी दैनिक अखबारों में मान्यता प्राप्त महिला पत्रकारों की संख्या 10 बतायी गई है। इसी सर्वेक्षण में कहा गया कि हिन्दी प्रिंट मीडिया में 86 प्रतिशत पुरूष और 14 प्रतिशत महिलाएं जबकि अंग्रेजी प्रिंट मीडिया में 84 प्रतिशत पुरूष और 16 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत है। हिन्दी के इलेक्ट्रानिक मीडिया में 89 प्रतिशत पुरूष और 11 प्रतिशत महिलाएं है जबकि अंग्रेजी इलेक्ट्रानिक मीडिया में 68 प्रतिशत पुरूष और 32 प्रतिशत महिलाएं हैं।

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