भोजपुरी संगीत की दुनिया में आज न तो पत्रकार कमलेश सिंह नया नाम हैं और ना ही उनकी कंपनी माईलस्टोन म्यूजिक। माईलस्टोन का भक्ति एलबम ‘मईया पांव पैजनिया’ किसी भी क्षेत्रिय भाषा में सर्वाधिक बिक्री वाले एलबम में शुमार है। माईलस्टोन अपनी ऑडियो/विडियो विदेशों में भी एक्स्पोर्ट करती है। माईलस्टोन के जरिए कमलेश सिंह ने भोजपुरी के कई ऐसे कलाकारों को स्थापित किया जिनकी आज अलग पहचान है। कमलेश माईलस्टोन के बैनर तले बहुत जल्द दो भोजपुरी फिल्में भी लेकर आ रहे हैं। भोजपुरी गीत-संगीत और फिल्मों की वर्तमान दशा से दुखी कमलेश को भरोसा है कि भोजपुरी की तस्वीर एक दिन जरुर बदलेगी और तकदीर भी। सतरंगी संसार के पाठकों के लिए कमलेश सिंह ने संजीव चौधरी के साथ बातचीत में कई सवालों के बेबाक जबाब दिए। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश…
प्रश्न – सबसे पहले तो आपको ढेर सारी बधाई और शुभकामनायें कि आपने इतने कम उम्र में खुद को और माईलस्टोन को सफलता के इस मुकाम तक पहुंचाया और वो भी अपने दम पर।
कमलेश सिंह – धन्यवाद…. ये सब तो बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद और उपर वाले की कृपा है, जिनकी बदौलत मुझे अच्छे लोग और सहकर्मी मिलें, जिनके सहयोग के बिना ये संभव नहीं था। वैसे मुझे नहीं लगता कि मैं अभी कहीं पहुंच पाया हूं। अभी तो बस शुरुआत की है।
प्रश्न – सबसे पहले हमारे पाठकों को अपने बारे में बतायें, अपने जाति-जिन्दगी के बारे में।
कमलेश सिंह :- वैसे तो हम लोग छपरा के रहने वाले हैं लेकिन मेरे पिता बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत थे, इसलिए बचपन से लेकर स्नातक तक की शिक्षा-दीक्षा बोकारो में ही हुई। मेरे बड़े भाई साहब नाटकों में काम किया करते थे और शहर के सबसे चर्चित थिएटर पर्सनाल्टी थे। तो वहीं से नाटक करने का शौक चढ़ा जो बाद में जुनून बन गया। फिर कॉलेज खत्म करने के बाद मास कम्यूनिकेशन करने दिल्ली आ गया और अब आपके सामने हूं।
प्रश्न – आपने मास कम्युनिकेशन करने के बाद काफी सारी टेली फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और कॉरपोरेट फिल्मों का निर्माण किया, फिर एकाएक संगीत के क्षेत्र में कैसे आना हुआ?
कमलेश सिंह:- वैसे इस क्षेत्र में आना एकाएक तो नहीं हुआ, पर हां इतने आगे तक की कोई योजना नहीं थी उस वक्त। हम तीन-चार लोग थे जो चाहते थे कि भोजपुरी में कुछ अच्छा और अलग करें। हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में सफल थे तो हमने एक प्रयोग के तौर पर माईलस्टोन म्यूजिक की शुरुआत की। हमारा प्रयोग सफल रहा और एक के बाद एक कई सफल एलबम देकर हम उस वक्त भोजपुरी की नंबर एक म्यूजिक कम्पनी बन गए। वैसे आज भी हमारी कम्पनी देश की टॉप तीन-चार म्यूजिक कम्पनियों में है जो भोजपुरी संगीत में डील करती है।
प्रश्न – भोजपुरी संगीत के वर्तमान दशा और दिशा के बारे में आप की सोच क्या है।
कमलेश सिंह :- भोजपुरी संगीत की दशा का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अब घर-परिवार में लोग भोजपुरी गाने नहीं सुनते। आजकल बस एक बहुत ही छोटा और खास वर्ग है जो इन गानों को देख और सुन रहा है। और यही हाल भोजपुरी फिल्मों का भी है। अच्छे और सुधी दर्शक व श्रोता अश्लीलता और भौंडे़पन की वजह से भोजपुरी से कट गए हैं। इसका एक बहुत बड़ा कारण ये है कि अब म्यूजिक कम्पनियां ना तो एलबमों पे पैसे खर्च कर रही हैं और ना हीं ध्यान दे रही हैं। क्योंकी आजकल पेन ड्राईव और मोबाइल चिप की वजह से एलबमों की बिक्री ना के बराबर रह गई है। ऐसे में कम्पनियों के लिए अपनी लागत वसूल पाना भी कठिन हो गया है। तो आजकल जो एलबम व सीडी आप देख सुन रहे हैं, वो गायक खुद अपने पैसे से बना के ला रहे हैं और कम्पनियां सिर्फ उन्हें रिलीज कर रही हैं। कहने का मतलब ये कि अब कम्पनियां गायक का चुनाव नहीं करतीं बल्कि गायक कम्पनी का चुनाव कर रहे हैं। ऐसे में आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?
प्रश्न – आपकी नज़र में भोजपुरी गीत-संगीत को इस स्थिति से बाहर निकालने का क्या उपाय है?
कमलेश सिंह :- देखिये, इसका कोई शार्ट-कट फार्मूला तो है नहीं। मेरा मानना है कि जैसे अच्छे और बुरे दिन आते जाते रहते हैं, वैसे ही ये दौर भी निकल जाएगा और फिर से भोजपुरी में अच्छे व स्तरीय गीत – संगीत का बोलबाला होगा। हम लोग इसके लिए लगे हुए हैं। और भी कई लोग व संस्थायें इस दिशा में प्रयत्नशील हैं। तो भोजपुरी के दिन जरुर बदलेंगे, हां थोड़ा वक्त तो लगेगा।
प्रश्न – हमने सुना है कि आप अपनी कम्पनी के बैनर तले भोजपुरी फिल्मों के निर्माण व वितरण में भी उत्तर रहे हैं? क्या इसके पीछे भी कोई अलग सोच है ?
कमलेश सिंह:- आपने बिल्कुल ठीक सुना है। हम बहुत जल्द माईलस्टोन फिल्म एण्ड इंटरटेन्मेंट के बैनर से दो फिल्में लॉंच कर रहे हैं। जिनमें एक का निर्देशन मैं खुद कर रहा हूं। दोनो ही फिल्मों के पटकथा का काम अंतिम दौर में है। साथ ही हमने फिल्म वितरण का काम भी शुरू कर दिया है। इन सबके पीछे सोच बस इतना सा है कि काबिल और प्रोफेशनल लोगों को ज्यादा से ज्यादा मौका मिले जो अच्छा और स्तरीय काम करें।
प्रश्न – आजकल भोजपुरी में जिस तरह की फिल्में बन रही हैं उनके बारे में आपका क्या ख्याल है?
कमलेश सिंह :- मेरा मानना है कि भोजपुरी सिनेमा अपने संक्रमण काल से गुजर रहा है। आपने बाढ़ देखी होगी। जब बाढ़ आता है तो पानी अपने साथ सब कुछ बहा के ले जाता है। लेकिन जैसे-जैसे बाढ़ के पानी का वेग कम होता जाता है पानी के साथ बहता कूड़ा-कचरा व कीचड़ रास्ते में ही छूटता जाता है। और एक सीमा के बाद सिर्फ पानी ही रह जाता है। अभी भोजपुरी सिनेमा उसी बाढ़ वाली स्थिती से गुजर रहा है। जिसे सिनेमा का सी नहीं पता वो भी सिनेमा बना रहा है। जिनको कैमरा एंगल किस बला का नाम है ये भी मालूम नहीं है वो निर्देशन कर रहे हैं। पटकथा के नाम पर नब्बे के दशक के किसी हिन्दी फिल्म या फिर दक्षिण भारतीय किसी फिल्म को हुबहू कॉपी भर कर लेना है। ऐसे में अगर सभी फिल्में एक सी ही नज़र आ रही हैं तो इसमें आश्चर्य कैसा?
प्रश्न – तो ऐसे में भोजपुरी सिनेमा के भविष्य को लेकर आप कितने आशान्वित हैं?
कमलेश सिंह :- जब भोजपुरी सिनेमा का ये संक्रमण काल जिसे हम हनीमून पीरियड भी कह सकते हैं खत्म हो जाएगा तो जो भी इस प्रकार के अनप्रोफेशनल व अनट्रेंड लोग हैं वो खुद ब खुद बाहर हो जायेंगे। फिर वही लोग रह जायेंगे जो प्रोफेशनल और काबिल होंगे। और जब ऐसे लोग फिल्में बनायेंगे तो जाहिर तौर पर भोजपुरी सिनेमा का स्तर उपर उठेगा। फिर दर्शकों को भोजपुरी में भी नई व मौलिक कहानियां देखने को मिलेंगी तथा तकनीकी रुप से भी उत्कृष्ट फिल्में बनेंगी। तो जहां तक भोजपुरी सिनेमा के भविष्य का सवाल है… मुझे तो वो काफी उज्जवल दिखता है।
प्रश्न – अब आखिर में एक व्यक्तिगत सवाल… आप स्मार्ट हैं, यंग हैं, व्यवसायिक रुप से काफी सफल भी हैं, फिर आपने अभी तक शीदी क्यों नहीं की? कोई खास वजह?
कमलेश सिंह :- अरे नहीं भाई, कोई खास वजह नहीं है। बस कभी समय हीं नहीं मिलता इस बारे में सोचने के लिए। या फिर ये भी कह सकते हैं कि शायद अभी तक कोई ऐसी मिली ही नहीं जिसको लेकर सीरीयसली कुछ सोच सकूं। जब कोई वैसी मिल जाएगी फिर शादी भी कर लेंगे।
प्रश्न – आपने अपनी व्यस्तता के बावजूद सतरंगी संसार से बातचित के लिए समय निकाला और इतने बेबाक व सटीक ढ़ग से अपने विचार हमारे साथ बाटें उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….
कमलेश सिंह :- धन्यवाद!


