: ‘मातृभाषा में शिक्षा और संचार’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का प्रारंभ : भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला का कहना है कि कोई भी जागृत समाज अपने लिए श्रेष्ठ विकल्पों का ही चयन करता है। उसे यह तय करना चाहिए कि उसकी शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो। वे यहां पत्रकारिता विश्वविद्यालय, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा ‘मातृभाषा में शिक्षा और संचार’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में अध्यक्ष की आसंदी से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 190 साल की अंग्रेजों की गुलामी ने हमारी सोच, प्रक्रिया, भाषा, जीवनशैली सब पर असर डाला पर आजादी के इन सालों में भी हम उस मानसिकता से मुक्त नहीं हो सके। जब हमारे पास संस्कृत सहित न जाने कितनी भारतीय भाषाओं और बोलियों का जीवंत संसार है तो हमने क्यों विदेशी भाषा की बेडियां डाल रखी हैं? आज गूगल भारतीय भाषाओं में काम करने लगा है, वह उसमें अवसर और संभावनाएं ढूंढ़ रहा है किंतु अफसोस कि हमारे लोग इसे नहीं समझते। उनका कहना था कि शिक्षा व संवाद भारतीय भाषाओं में होना चाहिए इसके लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने और कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।
कार्यक्रम के मुख्यअतिथि वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय जो भाषा उसके साथ होती है, वही उसकी शिक्षा के लिए सबसे उपयोगी है। जन्म और शिक्षा की भाषा अलग होने से सीखने की निरंतरता पर आधात पहुंचता है। कई बच्चे इसे सह नहीं पाते और वे सिर्फ एक भाषा के नाते जीवन की दौड़ में पीछे रह जाते हैं। संचार की भाषा में स्थानीय संस्कार ही उसे प्रवाहमान और समृद्ध बनाते हैं। भाषा एक स्टापडेम की तरह न हो वह पुण्यसलिला की तरह प्रवाहित होनी चाहिए। हिंदी में अंग्रेजी की अतिवादी घुसपैठ ठीक नहीं है, किंतु सहजता से कुछ आ रहा है तो उसे स्वीकारना चाहिए। हिंदी और भारतीय भाषाओं में इतनी शक्ति है कि वे सबको साथ लेकर चल सकती हैं।
आरंभ में विषय प्रवर्तन करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि देश में न्यास द्वारा आयोजित यह पहली कार्यशाला है जिसमें 10 राज्यों से आए लगभग 70 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसमें लिए गए संकल्पों को लागू किया जाएगा। उनका कहना था कि योजनापूर्वक यह भ्रम फैलाया गया है कि अंग्रेजी के बिना किसी व्यक्ति और राष्ट्र की प्रगति नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल किया कि जापान, चीन, जर्मनी, इजरायल ने प्रगति क्या अंग्रेजी के बल पर की है। उन्होंने कहा कि हमें भ्रम के बादल हटाने और हवा का रूख मोड़ने के लिए काम करना होगा। यह काम भारतीय भाषाओं की एकता से ही हो सकता है।
कार्यक्रम के अन्य सत्रों में मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डा. त्रिभुवननाथ शुक्ल, साहित्यकार प्रभु जोशी, गोविंद प्रसाद शर्मा, महेशचंद्र गुप्त, शिक्षाविद् दीनानाथ बत्रा ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह, सुरेश शर्मा, जीके छिब्बर, सामाजिक कार्यकर्ता रामदत्त चक्रधर, अनिल सौमित्र, पत्रकारिता विश्वविद्यालय के रेक्टर सीपी अग्रवाल, दीपक शर्मा, रजिस्ट्रार चंदर सोनाने सहित नगर के अनेक साहित्यकार, पत्रकार एवं प्राध्यापक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राघवेंद्र सिंह ने और आभार प्रदर्शन ए. विनोद (केरल) ने किया।
भाषा के सम्मान के लिए छेड़ें जनांदोलन : गृहमंत्री
कार्यशाला के दूसरे सत्र में पधारे मध्यप्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि देश में आज कितने प्रतिशत लोग अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं और कितने भारतीय भाषाओं के माध्यम से। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी सभ्यता और संस्कृति पर चोट पहुंचाई। आज जरूरत इस बात की है कि हम अपनी जड़ों की तरफ लौटें और जो कुछ छूट रहा है उसे बचाने की कोशिश करें। देश की युवा शक्ति का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि नया कुछ करने की जरूरत नहीं है बल्कि हमें अपनी विरासतों को सहेजने और संभालने की जरूरत है। गृहमंत्री ने कहा कि हमें जापान से सीखना होगा जिसने अपनी भाषा, ईमानदारी और अनुशासन से पूरी दुनिया को एक पाठ पढ़ाया है। जरूरत इस बात की है कि हम अपनी भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाने का काम घर से शुरू करें और इसे एक जनांदोलन का स्वरूप प्रदान करें।
कार्यशाला के दूसरे दिन 12 मई को प्रातः 9.30 बजे राष्ट्रीय एकता व अखंडता में हिंदी व भारतीय भाषाओं का योगदान विषय पर चर्चा होगी। दूसरा सत्र 11 बजे प्रारंभ होगा जिसमें सरकारी कामकाज में हिंदी और भारतीय भाषाएं, तीसरे सत्र ( दिन में 2 बजे) में प्रतियोगी परीक्षाओं का माध्यम हिंदी एवं भारतीय भाषाएं, चौथे सत्र में ( दिन में 3.45 बजे), उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा का माध्यम भारतीय भाषाएं, पांचवें सत्र में पत्रकारिता एवं भारतीय भाषाएं ( सायं 5.30 बजे) विषय पर चर्चा होगी। इस सत्रों में इंडिया टुडे के पूर्व कार्यकारी संपादक जगदीश उपासने, प्रो. पीयूष त्रिवेदी ,डा. विजय अग्रवाल, डा. जगदीश कर्नावट, नाहर सिंह वर्मा, जगदीश नारायण, डा. मनोहर भंडारी, रमेश शर्मा अपने विचार व्यक्त करेंगें।


