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होमियोपैथी चिकित्‍सा विभाग के निदेशक पर सूचना आयुक्‍त ने लगाया जुर्माना

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली की धारा 22 के उस मुख्य प्रावधान का अनेकों विभागों द्वारा आंशिक रूप से भी पालन नहीं किया जा रहा है, जिसमें सभी श्रेणी के कार्मिकों से अनिवार्य रूप से सम्पत्ति के विवरण को निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने को कहा गया है। कुछ ऐसा ही होमियोपैथी विभाग में किया जा रहा है जहां पर सम्पत्ति विवरण उपलब्ध कराने के इस प्रावधान का पालन ही नहीं किया जा रहा था। आर.टी.आई. मिशन ने होमियोपैथी चिकित्सा विभाग के निदेशक डा. बी.एस. कनवासी की सम्पत्ति का विवरण की सूचना मांगी थी। जिसे स्वयं डा. कनवासी ने लोकसूचना अधिकारी के रूप में धारा 8(1) जे के प्रावधानों से आच्छादित बताते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया। अपीलीय अधिकारी के रूप में तत्कालीन निदेशक डा. बी.सी. लखेड़ा ने अपील को उपस्थित न होने के आधार पर निस्तारित कर दिया।

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली की धारा 22 के उस मुख्य प्रावधान का अनेकों विभागों द्वारा आंशिक रूप से भी पालन नहीं किया जा रहा है, जिसमें सभी श्रेणी के कार्मिकों से अनिवार्य रूप से सम्पत्ति के विवरण को निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने को कहा गया है। कुछ ऐसा ही होमियोपैथी विभाग में किया जा रहा है जहां पर सम्पत्ति विवरण उपलब्ध कराने के इस प्रावधान का पालन ही नहीं किया जा रहा था। आर.टी.आई. मिशन ने होमियोपैथी चिकित्सा विभाग के निदेशक डा. बी.एस. कनवासी की सम्पत्ति का विवरण की सूचना मांगी थी। जिसे स्वयं डा. कनवासी ने लोकसूचना अधिकारी के रूप में धारा 8(1) जे के प्रावधानों से आच्छादित बताते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया। अपीलीय अधिकारी के रूप में तत्कालीन निदेशक डा. बी.सी. लखेड़ा ने अपील को उपस्थित न होने के आधार पर निस्तारित कर दिया।

सूचना न मिलने पर मामला उत्तराखण्ड सूचना आयोग में डा. अनिल शर्मा के समक्ष प्रस्तुत हुआ। जहां पर उपस्थित हुए डा. कनवासी ने स्वीकार किया कि अभी तक विभाग में किसी ने भी सम्पत्ति का विवरण नहीं दिया था। आर.टी.आई. मिशन द्वारा आवेदन देने के उपरान्त अब सभी के द्वारा जमा कराये जा रहे हैं। आयोग ने इस मामले में जहां लोकसूचना अधिकारी के रूप में डा. कनवासी को दोषी पाते हुए 5 हजार जुर्माना आरोपित किया वहीं अपीलीय अधिकारी द्वारा अपील का सही निस्तारण न करने पर चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दिये जाने का निर्णय पारित किया है। तत्कालीन अपीलीय अधिकारी डा. बी.सी. लखेड़ा द्वारा आर.टी.आई. अधिनियम की अल्प जानकारी होने के आधार पर आयोग से आदेश में संशोधन की गुहार लगाई गई जिसका आयोग ने संज्ञान न लेते हुए अपना निर्णय अपरिवर्तित रखा।

आरटीआई एक्टिविस्‍ट एवं पत्रकार सुरेंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट.

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