मप्र हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी गई है। याचिका में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि विवि के रजिस्ट्रार और खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री और विवि की सामान्य सभा के अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने अपने चहेतों की नियुक्तियां कराकर उन्हें उपकृत किया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुशील हरकौली और जस्टिस आलोक अराधे की युगलपीठ ने याचिका में लगाए गये आरोपों को संजीदगी से लेते हुए सात अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद होगी। यह याचिका मोहाली पंजाब में रहने वाले डॉ. आशुतोष मिश्रा की ओर से दायर की गई है।
आवेदक का कहना है कि भोपाल में स्थित पत्रकारिता विवि के स्टडी सेन्टर पूरे देश में मौजूद हैं। याचिका में आरोप है कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में 1990 के एक्ट के खिलाफ जाकर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गई हैं। आरोप है कि नियमों का ताक पर रखकर ऐसे अयोग्य उ मीदवारों को ऊंची कुर्सियों पर बैठाया गया, जिनकी राजनीतिक पहुंच काफी तगड़ी थी। आरोप है कि नियुक्तियों में भाई-भतीजेवाद को इस हद तक तरजीह दी गई, जो अपने आप में किसी भ्रष्टाचार से कम नहीं है। याचिका में यहां तक आरोप लगाया गया है कि विवि के रजिस्ट्रार और विवि की सामान्य सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा नियुक्तियों में किये गये पक्षपात के खिलाफ कोई भी आवाज उठाने का साहस नहीं दिखा पा रहा है, जिसके चलते आवेदक ने यह याचिका दायर करके अवैध नियुक्तियों को निरस्त किये जाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की है।
मामले पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय मिश्रा और अधिव ता मुकेश साहू ने अपना पक्ष रखा। सरकार की ओर से महाधिव ता आरडी जैन और विवि की ओर से वरिष्ठ अधिव ता नमन नागरथ हाजिर हुए। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका में अनावेदक बनाए गए एमसीयू के सीनियर प्रोफेसर प्रो. अशोक कुमार टंडन, पब्लिकेशन ऑफीसर सौरभ मालवीय, ओएसडी राघवेन्द्र सिंह, सीनियर प्रोफेसर डॉ. नंदकिशोर तिरखा, प्रो. देवेश किशोर, प्रोफेसर रामजी त्रिपाठी, प्रो. आशीष जोशी और डॉ. अमिताभ भटनागर को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये।
शिवराज सिंह चौहान भी हैं पक्षकार
पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुई नियु ितयों के खिलाफ दायर याचिका में प्रदेश के मु यमंत्री और विवि की सामान्य सभा के अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान को भी पक्षकार बनाया गया है। अनावेदकों की सूची में उनका नाम दूसरे नंबर पर है। 16 दिसंबर 2011 को हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सिर्फ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से युगलपीठ को बताया गया कि इस मामले पर जवाब पेश हो चुका है। युगलपीठ ने उ त जवाब को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश भी दिये। साभार : दैनिक भास्कर


