जयपुर में जनवरी 10 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुआ एकदिवसीय मैच संभवत: देश का अकेला मैच है, जिसमें करोड़ों का नुकसान आरसीए को उठाना पड़ा। इस मैच में खर्च के मुकाबले आय इतनी कम रही कि क्रिकेट जगत के लिये यह मैच आज भी एक अजूबा बना हुआ है। आरसीए की ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मैच में आमदनी 2 करोड़ 90 लाख रही वहीं खर्च 4 करोड़ 48 लाख हो गया। यानी इस मैच में आरसीए को 1 करोड़ 58 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा। जबकि इसके ठीक पहले 2007 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले में आरसीए को 5 करोड़ 89 लाख रुपये का फायदा हुआ था। इस मैच में क्रिकेटरों, स्टेडियम आदि की सुरक्षा पर हुए खर्च और मैच की टिकटों की बिक्री की विस्तृत रिपोर्ट तक नदारत कर दी गई है।
इन दोनों मैचों का जिक्र करना इसलिये जरूरी है कि आईपीएल के चेयरमैन रहे ललित मोदी 2007 में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष थे, तब भारत पाकिस्तान के बीच खेला गया मैच आरसीए के लिए करोड़ों की कमाई का जरिया बना था। इसके विपरीत नई कमेटी के कार्यकाल में देश में पूजा जाने वाला क्रिकेट आरसीए के लिए घाटे का सौदा बन गया। ललित मोदी को हराकर आरसीए के अध्यक्ष बने केन्द्रीय मंत्री सीपी जोशी, सचिव के पद पर काबिज हुए राजस्थान के आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित और महेन्द्र शर्मा बने कोषाध्यक्ष। इस तिकड़ी का कार्यकाल ही चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घाटे को घोटाला बताया जा रहा है.
दोनों मैच कड़ी सुरक्षा के बीच खेले गए थे। पर दोनों की सुरक्षा व्यवस्था खर्च में लगभग 13 गुना का अंतर है। भड़ास4मीडिया के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मैच से आरसीए की 2007 में टिकटों की बिक्री से 4 करोड़ 86 लाख रूपये की आय हुई थी जबकि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जनवरी, 2010 में हुए मैच से आरसीए के खजाने में टिकटों की बिक्री से मात्र 1 करोड़ 18 लाख रूपये ही आ पाये। विज्ञापन मद में 2007 के मैच में आरसीए को 2 करोड़ 92 लाख रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि 2010 के मैच में यह घटकर मात्र 1 करोड़ 70 लाख रुपये रह गया। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि सवाई मानसिंह स्टेडियम की क्षमता यदि 25 हजार दर्शकों को ही आधार माना जाये तो 2007 में प्रति दर्शक आमदनी 1950 रुपये हुई, वहीं 2010 में यह घटकर मात्र 470 रुपये रह गई।
आरसीए की आडिट रिपोर्ट बताती है कि 2007 में मैच के लिये मैच की टिकट रेट के हिसाब से कौन सी टिकटें कितनी बिकी थीं, जबकि 2010-11 की ऑडिट में इस तरह की रिपोर्ट का कोई जिक्र नहीं किया गया है कि किस श्रेणी की कितनी टिकटें बिकीं। यह संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त है। आरसीए की ऑडिट रिपोर्ट पर ही विश्वास किया जाये तो 2007 के मुकाबले 2010 मैच के लिए प्रति दर्शक आमदनी तो चार गुना कम हो गई पर प्रति दर्शक खर्चा चार गुणा अधिक किया गया। कैसे औ क्यों? 2007 में टिकटों की प्रिन्टिंग के लिये 6.5 लाख खर्च हुए थे पर 2010 में यह खर्चा बढ़कर 15 लाख हो गया। स्टेडियम में लगाये गये शामियाने पर जहां 2007 में 46 लाख रुपये का भुगतान किया गया वहीं 2010 में स्टेडियम में लगाये गये वैसे ही शामियाने वगैरा पर दरियादिली दिखाते हुए 87 लाख रुपये लुटा दिए गए।
भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मैच में सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च हुए वहीं भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच में सुरक्षा के नाम पर 1 करोड़ 26 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि किसी भी लिहाज से भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाला मैच ज्यादा सेंसटिव माना जाता है। भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच में दर्शकों की किसी तरह की अतिरिक्त सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवाई गई थी। क्रिकेट के नाम पर आरसीए सचिव संजय दीक्षित की लूट खसोट का जो सिलासिला 2010 में रहा उस में प्रति दर्शक खर्चा 912 रुपये रहा जबकि 2007 में प्रति दर्शक खर्चे की यह राशि सिर्फ 250 रुपये थी।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में पदाधिकारियों की लूट खसोट का एक और नायाब तरीका है मैच से कुछ दिन पहले लंगर चलाना। अपने चहेतो और चमच्चों के लिए मुफ्त का लंगर चलता है। सैकड़ों लोग लजीज खाने का लुत्फ उठाते हैं. एक अनुमान के मुताबिक मैच वाले दिन यदि 5000 अतिथियों को 400 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से भोजन करवाया जाए तो यह 20 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगा, परन्तु आरसीए के कर्ताधर्ताओं ने भोजन बिल के भुगतान पर ही 78 लाख रुपये खर्च कर डाले। आतित्य सत्कार और भोजन के मद में 2007 में जहां जगभग 31 लाख खर्च हुए थे वहीं इसी मद में यह खर्च 2010 में बढ़कर 91 लाख हो गया।
अगर आरसीए के पदाधिकारियों एवं चहेतों के वेतन भत्ते पर गौर करें तो और चौंकाने वाले तथ्य उभर कर सामने आते हैं, जो गड़बड़ी का साफ संकेत करते हैं। आरसीए ने अपने 21 सदस्यों को यात्रा एवं अन्य भत्तों के नाम पर 31लाख से ज्यादा रुपये बांटे गए। यानी प्रत्येक सदस्य को औसतन 1 लाख 60 हजार रुपये मिले। वहीं 2007 में इस मद में आठ लाख से भी कम रुपये खर्च किए गए थे तथा प्रत्येक सदस्य को औसतन 40 हजार रुपये के आसपास दिया गया। जबकि असलियत यह है कि इसमें कई पदाधिकारी तो जयपुर के निवासी होने के नाते ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार भी नहीं थे। अन्य मदों में भी जमकर लूट खसोट की गई। आमदनी भले ही कम रही लेकिन खर्च हर मद में लगभग चार गुना रहा।
क्रिकेट के खेल में हुए इस खेल में आरसीए के सचिव संजय दीक्षित का नाम सबसे ऊपर है। इस मैच के ऑडिट आंकड़ों से ही पता चलता है कि आरसीए के पदाधिकारियों ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच में कितना खेल किया है। इस खेल में खिलाड़ी ही नहीं इससे जुड़े लोग भी किस तरह बहती गंगा में हाथ धोकर मालामाल हो रहे हैं, उसकी बानगी है यह मैच। इसके अलावा भी संजय दीक्षित का कई विवादों से नाता रहा है। अब तो सीपी जोशी, संजय दीक्षित को यह जवाब तो देना ही होगा कि कैसे आरसीए में आमदनी अठन्नी रही और खर्चा रुपैया हो गया। स्पष्ट है कि ऑडिट रिपोर्ट से जो समझ में आ रहा है उससे इस क्रिकेट के खेल में कुछ लोगों ने बड़ा खेल किया है। इसकी गहराई से जांच हो तो सब कुछ सामने आ जाएगा। संजय दीक्षित इसके पहले सरकारी मशीनरी पर भी असहयोग का आरोप लगाकर अशोक गहलोत के आंखों की किरकिरी बने हुए हैं।


