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अपना जलता घर बचाने की बजाय कांग्रेस को आईना दिखाने में जुटीं माया

बसपा सुप्रीमो मायावती को अपने घर में लगी आग नहीं दिख रही है, जहां पूरा प्रदेश दलित उत्‍पीड़न, बलात्‍कार और आपराधिक घटनाओं से त्रस्‍त है। लेकिन अब वे कांग्रेस शासित प्रदेशों की बदहाली पर आंसू बहाते हुए वहां सुधार की नसीहतें देने लगी हैं। मायावती का कहना है कि कांग्रेस को लखनऊ में न्‍याय यात्रा निकालने के बजाय उन राज्‍यों की सरकारों के खिलाफ आंदोलन छेड़ना चाहिए जहां खुद उसकी ही सरकार में आपराधिक गतिविधियां हो रही हैं। कांग्रेसियों को उत्तर प्रदेश की चिन्ता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बीएसपी सरकार द्वारा की गयी प्रभावी कार्यवाही के चलते यहां हर प्रकार के अपराध की दर में उल्लेखनीय कमी आयी है।

बसपा सुप्रीमो मायावती को अपने घर में लगी आग नहीं दिख रही है, जहां पूरा प्रदेश दलित उत्‍पीड़न, बलात्‍कार और आपराधिक घटनाओं से त्रस्‍त है। लेकिन अब वे कांग्रेस शासित प्रदेशों की बदहाली पर आंसू बहाते हुए वहां सुधार की नसीहतें देने लगी हैं। मायावती का कहना है कि कांग्रेस को लखनऊ में न्‍याय यात्रा निकालने के बजाय उन राज्‍यों की सरकारों के खिलाफ आंदोलन छेड़ना चाहिए जहां खुद उसकी ही सरकार में आपराधिक गतिविधियां हो रही हैं। कांग्रेसियों को उत्तर प्रदेश की चिन्ता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बीएसपी सरकार द्वारा की गयी प्रभावी कार्यवाही के चलते यहां हर प्रकार के अपराध की दर में उल्लेखनीय कमी आयी है।

अपने पक्ष में दलीलें देते हुए बसपा सुप्रीमो का कहना है कि 21 अप्रैल, 2010 को हरियाणा के मिर्चपुर गांव में दलितों के विरूद्ध अत्याचार एवं उत्पीड़न की गम्भीर घटना हुई थी, जिसमें दलित समुदाय के दो व्यक्तियों की मौत हो गयी और दलितों के घरों को जला दिया गया। दबंगों के अत्याचार का शिकार मिर्चपुर गांव के दलितों को जब एक वर्ष से भी अधिक की अवधि बीत जाने के बावजूद न्याय नहीं मिला, तो वे इस महीने इंसाफ की मांग करने जनपद हिसार के लघु सचिवालय पहुंचे। यहां इन्हें न्याय तो नहीं मिला, अलबत्ता वे हरियाणा पुलिस की लाठियों का शिकार अवश्य बन गये। कांग्रेस पार्टी के लोगों को चाहिए कि वे उत्पीड़न का शिकार हुए मिर्चपुर के दलितों को न्याय व सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल न्याय सभा आयोजित करें।

जींद में कल दबंगों द्वारा एक दलित युवक की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गयी। इस वर्ष जनवरी माह में अम्बाला में तीन महिलाओं के साथ हरियाणा पुलिस कर्मियों द्वारा 10 दिनों तक बलात्कार किया गया। इसके अलावा पंचकुला के बर्ताड़ गांव के दलित वर्गों के लोग वहाँ दबंगों के अत्याचार एवं सामाजिक बहिष्कार का शिकार हुए। हरियाणा के पलवल जिले के बेखुड़ी, वनचारी, मानपुर और सोनद गांव के दलितों को पंचायत चुनाव में वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया गया और दबंगों द्वारा उन पर की गयी हिंसा में 40 से ज्यादा लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये।

बीकानेर जनपद के रंधेसर गांव में सार्वजनिक नल से पानी पीने पर दलितों के ऊपर पंचायत द्वारा जुर्माना थोप दिया गया और जब दलितों ने जुर्माना खत्म करने के लिए कहा तो इनकी बेरहमी से डण्डों से पिटाई की गयी। एक अन्य कांग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र का उल्लेख करते हुए कहा कि थाणे में 09 साल की मासूम बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की दुःखद घटना आज महाराष्ट्र के अखबारों की सुर्खियों में है। इसके अलावा वहां कुछ महीने पहले तेल माफियाओं ने एक अतिरिक्त कलेक्टर को दिन-दहाड़े जिन्दा जला दिया और पिछले दिनों अपराधियों ने एक वरिष्ठ पत्रकार की मुम्बई में दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इसलिए कांग्रेस के लोगों को महाराष्ट्र में भी न्याय सभा का प्राथमिकता पर आयोजन कर वहां के पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए।

वरिष्‍ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.

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