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पत्रकार दबावों के आगे झुकने की बजाय आदर्श कायम रखें : खन्‍ना

होशियारपुर। पत्रकार समाज को आईना दिखाते हैं लेकिन आज खुद अपनी भूमिका को लेकर पत्रकारों को भी आईना देखना होगा। आज जरूरत है कि पत्रकार खुद दबावों के आगे घुटने न टेकते हुए पत्रकारिता के आदर्शों और समाज की अपेक्षाओं को साथ लेकर चलें। वरिष्ठ पत्रकार इरविन खन्ना ने यहां समूह पत्रकार संघ की ओर से आयोजित विश्व प्रेस दिवस समारोह के अपने अध्यक्षीय भाषण में उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया में चाहे पत्र-पत्रिकाएं पहले कहीं भी छपी हों लेकिन भारतीय इतिहास में तीन पत्रकारों का वर्णन है जो पौराणिक काल के हैं। उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद पहले पत्रकार हैं जो सदैव जनकल्याण की ही बात करते थे और उनके समाचार देने का मकसद भी वही होता था। उसके बाद राजनीतिक पत्रकार थी मंथरा जिसने सत्ता में ऐसा परिवर्तन किया, जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती और तीसरे थे महाभारत के संजय जिन्होंने दूरदर्शन की तरह उस महायुद्ध की जीवंत प्रसारण किया।

होशियारपुर। पत्रकार समाज को आईना दिखाते हैं लेकिन आज खुद अपनी भूमिका को लेकर पत्रकारों को भी आईना देखना होगा। आज जरूरत है कि पत्रकार खुद दबावों के आगे घुटने न टेकते हुए पत्रकारिता के आदर्शों और समाज की अपेक्षाओं को साथ लेकर चलें। वरिष्ठ पत्रकार इरविन खन्ना ने यहां समूह पत्रकार संघ की ओर से आयोजित विश्व प्रेस दिवस समारोह के अपने अध्यक्षीय भाषण में उक्त बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया में चाहे पत्र-पत्रिकाएं पहले कहीं भी छपी हों लेकिन भारतीय इतिहास में तीन पत्रकारों का वर्णन है जो पौराणिक काल के हैं। उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद पहले पत्रकार हैं जो सदैव जनकल्याण की ही बात करते थे और उनके समाचार देने का मकसद भी वही होता था। उसके बाद राजनीतिक पत्रकार थी मंथरा जिसने सत्ता में ऐसा परिवर्तन किया, जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती और तीसरे थे महाभारत के संजय जिन्होंने दूरदर्शन की तरह उस महायुद्ध की जीवंत प्रसारण किया।

श्री खन्ना ने कहा कि नारद जी अपने समाचारों से सदैव सबका कल्याण करते थे और उनके दिए समाचार हमेशा अपना प्रभाव रखते थे लेकिन जब उन्हें इसका गुमान हो गया कि उनकी वजह से ही सब होता है तो भगवान ने उनका चेहरा बंदर जैसा करके उन्हें उपहास का पात्र बना कर उनका यह भ्रम भी दूर किया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जब तक पत्रकारों की सोच पॉजिटिव है और वह ऐसे समाचार सामने लाते हैं, जिससे जन कल्याण हो तब तक वह अपने पत्रकारिता के मिशन में कामयाब है वरना अपनी विश्वस्नीयता खो बैठता है। वरिष्ठ पत्रकार राकेश शांति दूत ने कहा कि आज पत्रकार के पास आजादी है, जितनी पहले शायद कभी न थी। लेकिन आज जरूरत है कि मिशन से शुरू होकर प्रोफेशन और अब बाजार बन चुकी पत्रकारिता को इससे उबारा जाए। उन्होंने कहा कि आज पत्रकार को पत्रकारिता के धर्म और आदर्श से जुड़ने की जरूरत है। रंग कर्मी अशोक पुरी ने कहा कि पत्रकारिता उन लोगों का काम है जो दिल में आग रखते हैं। पत्रकार डा. संजीव कुमार बख्शी ने कहा कि भारत में प्रेस का आगाज ही देश की आजादी की लड़ाई से हुआ तो जो प्रेस देश को आजाद कराने में इतनी बड़ी भूमिका निभा चुकी है, उसे आज अपनी आजादी के लिए लड़ने की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि वह अपनी क्रेडेबिलिटी (विश्वसनीयता) खो रही है।

पत्रकार विनोद कौशल व व्योवृद्ध समाजवादी बलवंत सिंह खेड़ा ने आज के युग में प्रेस की भूमिका को लेकर विचार रखे। चढ़दीकला टाइम टीवी के निदेशक सतवीर सिंह दर्दी और विश्ववार्ता न्यूज एजेंसी के संपादक दविंदरजीत सिंह दर्शी ने भी वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानी प्रदुम्मन सिंह व सगली राम के योगदान को याद किया। मुख्यातिथि सीपीएस सोहन सिंह ठंडल ने कहा कि पेड न्यूज के मकड़जाल में उलझे कुछ अखबारों ने प्रेस की विश्वसनीयता को तार-तार कर दिया है। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वह पत्रकारिता के आदर्शों का पालन करते हुए सकारात्मक भूमिका अदा करें। अंत में समूह पत्रकार संघ के अध्यक्ष शरमिंदर सिंह किरण, महासचिव भूपेश, राजकुमार सहोता व अन्य ने अतिथियों को दोशाले व स्मृति चिन्‍ह भेंट कर सम्मानित किया।

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