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भक्ति का लिबास और आस्‍था का व्‍यापार

कलयुग के ढोंगी बाबा अपनी कारगुजारी से सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। इस संबंध में किसी एक का नाम लेना उचित नहीं होगा। क्योंकि यह संख्या उंगलियों पर गिनी जाने लायक नहीं है। बस, फर्क इतना है कि कुछ ढोंगी बाबा लाइम लाइट में आकर बदनाम हो गए हैं तो अनेक बाबाओं का लोगों को अंधविश्वास के जाल में फांस कर ठगने का खेल बिना सुर्खियों में आये जारी है। गांवों से लेकर शहर तक शायद ही देश का कोई ऐसा कोना होगा जहां पाखंडी बाबाओं और तंत्र-मंत्र करने वाले ढोंगियो ने भोली भाली जनता को भय दिखा कर ठगा न हो। यह बाबा किसी भी दशा में डाकुओं से कम नहीं हैं। इनके कारनामों को देख कर बचपन में कहानी के रूप में पढ़ा एक पाठ याद आ जाता है।

कलयुग के ढोंगी बाबा अपनी कारगुजारी से सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। इस संबंध में किसी एक का नाम लेना उचित नहीं होगा। क्योंकि यह संख्या उंगलियों पर गिनी जाने लायक नहीं है। बस, फर्क इतना है कि कुछ ढोंगी बाबा लाइम लाइट में आकर बदनाम हो गए हैं तो अनेक बाबाओं का लोगों को अंधविश्वास के जाल में फांस कर ठगने का खेल बिना सुर्खियों में आये जारी है। गांवों से लेकर शहर तक शायद ही देश का कोई ऐसा कोना होगा जहां पाखंडी बाबाओं और तंत्र-मंत्र करने वाले ढोंगियो ने भोली भाली जनता को भय दिखा कर ठगा न हो। यह बाबा किसी भी दशा में डाकुओं से कम नहीं हैं। इनके कारनामों को देख कर बचपन में कहानी के रूप में पढ़ा एक पाठ याद आ जाता है।

यह कहानी एक ऐसे खूंखार डाकू की थी जो लूटपाट के लिए अक्सर छ्दम भेष बना लेता था। एक बार वह भिखारी के भेष में सड़क किनारे बैठ गया। रास्ते से एक घुड़सवार गुजरा जो भिखारी के रूप में डाकू को पहचान नहीं पाया। भिखारी ने बड़ी चालाकी से उस घुड़सवार का घोड़ा हथिया लिया। घोड़ा पास आते ही भिखारी रूपी डाकू अपने असली रूप में आ गया। घुड़सवार हैरान था। उसने डाकू से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि तुमने आज जो कृत्य किया उसे कभी दोबारा न करना, न ही किसी को बताना। डाकू ने इसकी वजह पूछी तो घुड़सवार ने उसे जो जवाब दिया उसका सार यही था कि अगर किसी को यह पता चल जायेगा कि भिखारी के रूप में डाकू घूमते हैं तो वह उन भिखारियों की भी मदद करना बंद कर देगें जो भीक्षा पाने के हकदार हैं।कुछ ऐसे ही हैं कलयुग के साधुओं की कहानी।भक्ति का लिबास पहनकर आस्था का व्यापार करने वाले पाखंडी आज देश के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।इनके काले कारनामों के कारण जनता का विश्वास धर्म से उठता जा रहा है।

साधु की व्याख्या करते हुए तुलसीदास जी ने कहा था ‘साधु सराहि सुमन सुर बरषे’ अर्थात जब साधू बोलता है तो अर्मत और फूलों की वर्षा होती है, साधू को आध्यात्मिक, निस्वार्थ सेवक और सदाचारी कहा जाता था। कानों में इन नामों के पड़ते ही दिलो-दिमाग में ऐसा अश्क उभरता है, जिसके आगे स्वतः ही इंसान नतमस्तक हो जाता है। वर्षों की तपस्या के बाद किसी को हासिल होती है यह पद्वी। आज भी घर-गृहस्थी और माया-मोह से दूर रहकर संयमित जीवनयापन करने वाले साधू-संत लोगों के लिए आर्दश और प्रेरणास्रोत का काम करते हैं। इंसान मुसीबत के समय जब सभी तरफ से निराश हो जाता है तो साधू संतों की शरण में पहुंचकर कष्ट निवारण के उपाय करने लगाता है। इससे उसे कष्ट निवारण के साथ आत्मिक शांति मिलती है।

यह सिक्के का एक पहलू था। यह पहलू जितना चमकदार था, उसके उल्ट है सिक्के का दूसरा पहलू। कलयुग के पाखंडी साधुओं ने साधू-संत-योगी-महंत और पीताम्बरधारी की परिभाषा ही बदल दी है। कलयुग के इस दौर में साधू-संतों के प्रति जनता के श्रद्धाभाव का फायदा उठाकर कुछ छद्म भेषधारियों ने भी अपने आप को इसमें शामिल कर लिया हैं। धर्म के नाम पर ठगने वालों की बाढ़ सी आ गयी है। महानगरों से लेकर गांव तक इससे प्रभावित हो गये हैं। गेरूआ चोले में रहने वाले पाखंडी साधु संत जनता से पैसे उगाहने का हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिसे सीधी सादी जनता भांपने में अपने को असफल पाती है। जब वह बीवी बच्चों सहित ठगे जाते हैं, तब समाज के सामने आते हैं पाखंडी साधुओं के कारनामें। कुछ ठगी के शिकार लोग शर्म के मारे किसी को बताते ही नहीं हैं कि उन्हें ठगा गया है। ऐसे छल कपटी साधू महिलाओं की अस्मत को लूटने में कतई संकोच नहीं करते। साधू संतों के प्रति जनता के श्रद्धाभाव का ही नतीजा है जो कई खूंखार अपराधी भी इस चोले को सहजता से ओढ़ लेते हैं। राम नामी चोला ओढ़ने को आतुर ढोंगियों के लिए कुछ कथित अध्यात्म केन्द्र ‘मील का पत्थर’ साबित हो रहे हैं। इन अध्यात्म केन्द्रों में ये ढोंगी कुछ महीनों में ही जनता को बेवकूफ बनाने के हथकंडे आसानी से सीख जाते हैं।

‘कऊआ चला हंस की चाल’ के तर्ज पर चकाचौंध की दुनिया में जीने वाले ऐसे पाखंडी साधु संतो की निगाह बेशकीमती जमीनों को हथियाने में लगी रहती है। धर्म के नाम लाखों करोड़ों की जमीन को मुफ्त में लेकर आलीशान बिल्डिंग बना डालते हैं, वह भी जनता के चंदे से। इन कोठीनुमा भवनों को नाम तो आश्रम का दिया जाता है, लेकिन यहां लक्जरी के सभी सामान मौजूद होते हैं। अपने लुभावने प्रवचनों से भोली जनता का दिल जीतने वाले यह शैतान अपने लिए कभी कोई रास्ता निर्धारित नहीं करते हैं। गली गली घूमने वाले ऐसे संत रातों रात करोड़ों के मालिक बन जाते हैं। ऐसी अंधी कमाई के लिए उनसे कोई पूछने का साहस नहीं दिखा पाता। यहां तक कि ऐसे लोगों की शरण में तमाम राजनेता भी आ जाते हैं। वैसे तो शैतान के साधू बनने का दौर काफी समय से चल रहा है, लेकिन लगता है कि अब पानी सिर से उपर हो चुका है। समय रहते इन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो जनता का उन साधू संतों पर से भी विश्वास उठ जायेगा जो सच्चे हैं और जिनकी आत्मा शुद्ध है।

उत्तर प्रदेश में तो जैसे पाखंडी साधुओं की बाढ़ सी आ गई। पुलिस भी इस तरह के बहरूपियों से हैरान है। साईं भक्त बनकर मंदिर स्थापित करने और लोगों को प्रवचन देने वाले चित्रकूट के बाबा शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद महाराज के काले कारनामों को चिट्ठा जब उजागर हुआ तो ऐसे साधू संतों को लेकर बहस सी ही छिड़ गई। वैसे तो राज्य में कई साधू-संत अपनी विवादित भाषा शैली और आचरण के कारण चर्चा में रहे हैं, लेकिन कुछ बाबाओं ने तो हद ही कर दी। गेरूआ वस्त्र पहनकर छोटे-मोटे अपराध और ठगी करने वाले कथित साधुओं की फेरहिस्त तो काफी लम्बी है, वहीं जनता को बेवकूफ बना कर करोड़ो रुपये जुटाने वाले साधू-संत भी कम नहीं हैं। बात लखनऊ के बाबा भूतनाथ से शुरू की जाए। बाबा भूतनाथ को मरे हुए करीब 15 साल हो गए हैं लेकिन आज भी उनके द्वारा हथियाई गई जमीन पर बनी भूतनाथ मार्केट उनके नाम का जीवित रखे है। लखनऊ के पॉश इलाके इंदिरागनर में जहां पर भूतनाथ मार्केट बनी हैं। उस जमीन की कीमत ही करोड़ों रुपये की होगी।

एक थे संत ज्ञानेश्वर। इनके नाम के आगे संत लगा था और पीछे ज्ञानेश्वर। लेकिन इनके शौक निराले थे। भूमाफिया के रूप में संत ज्ञानेश्वर का नाम पुलिस रिकार्ड में जरूर नहीं था, लेकिन दूसरे की जमीन हथियाने की आदत ने ही उन्हें मौत की गोद में सुला दिया। सुल्तानपुर के इसौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक इन्द्र भद्र सिंह ने जब संत की करतूतों का विरोध किया तो ज्ञानेश्वर ने अपने गुर्गों के माध्यम से उन्हें मौत की नींद सुला दिया। बाद में बदला लेने की नियत से इन्द्र भद्र के बेटों सोनू और यक्ष भद्र सिंह ने दस फरवरी 2006 को इलाहाबाद के हंडिया थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी। हत्या के जुर्म में जेल की सजा काट रहे सोनू और यक्ष को अभी तक जमानत नहीं मिल पाई है। खूबसूरत महिला कमांडों के संरक्षण में चलने वाले संत ज्ञानेश्वर ने बाराबंकी से लेकर इलाहाबाद तक में अपना साम्राज्य फैला रखा था। उनके आश्रम में कई वीआईपी का आना-जाना था। संत ज्ञानेश्वर पर आरोप था कि वह अपने आश्रम में आने वाले अतिथियों के सामने आश्रम में रहने वाली लड़कियों को पेश करते थे। संत के आश्रम पर जब छापा मारा गया तो उसके आश्रम से कई आधुनिक हथियार बरामद हुए।

उत्तर प्रदेश के चर्चित भाजपा नेता और पूर्व मंत्री ब्रहमदत्त द्विवेदी हत्याकांड में भी एक संत साक्षी महाराज पर हत्या का आरोप लगा। दोनों फर्रूखाबाद से ताल्लुक रखते थे। भाजपा के टिकट से दो बार सांसद रह चुके सच्चिदानंद हरि उर्फ साक्षी महाराज कभी दिग्गज नेता कल्याण सिंह के काफी करीब हुआ करते थे। साक्षी महाराज की गिनती भाजपा के दबंग नेताओं में होती थी। करीब साल भर पहले 27 मार्च 2009 को साक्षी महाराज के आश्रम से एक 24 वर्षीय युवती लक्ष्मी का शव बरामद हुआ तो हड़कम्प मच गया। साक्षी पर जमीन हथियाने और यौन उत्पीड़न के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। आश्रम के रूप में साक्षी के पास अच्छी खासी सम्पदा एकत्र है।

प्रतापगढ़ के कुंडा के मनगढ़ धाम कृपालु महाराज के आश्रम में भंडारे में हुई भगदड़ में 63 लोगों की मौत के बाद कृपालु महाराज का नाम चर्चा में आया तो लोग हैरान रह गए। आश्रम में 63 मौते हो गईं तथा कई लोग घायल हो गए लेकिन कृपालु महाराज घटना स्थल तक पहुंचे ही नहीं। कृपालु जी महाराज का अतीत खंगाला गया तो पता चला कि उनके दामन में कई दाग लगे हुए थे। कृपालु जी महाराज पर नाबालिग लड़कियों के अपहरण और दुराचार का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। वह त्रिनिदाद में हो चुके हैं गिरफ्तार। 2007 में कृपाल महाराज एक महिला के साथ दुराचार करने का आरोप लगा था। कृपालु महाराज जब विश्व भ्रमण पर थे तब ट्रिनिडाड में एक महिला ने आरोप लगाया था कि महाराज ने उसके साथ एक व्यापारी के घर पर दुराचार किया था। कृपाल महाराज इसी व्यापारी घर पर ठहरे थे।

1991 में एक वृद्ध व्यक्ति ने नागपुर में शिकायत  दर्ज कराई थी कि कृपालु महाराज ने उसकी दो नाबालिंग लड़कियों का अपहरण कर लिया। पुलिस ने जॉंच में पाया कि बलात्कार के दो मामले पहले भी हुए थे, लेकिन उनमें शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। इसका संज्ञान लेते हुए पुलिस ने कृपालु महाराज के खिलाफ अपहरण और दुराचार के चार मामले दर्ज किये थे। ये कुकृत्य 1958 से 1991 के बीच किए थे। बाद में कृपाल महाराज इस मामले में बरी कर दिए गये। कृपालु महाराज राधा माधव सोसाइटी के प्रमुख हैं। इस सोसाइटी के दुनिया भर में 300 केन्द्र हैं। पं राम कृपाल त्रिपाठी उर्फ कृपाल जी महाराज के खिलाफ 90 के दशक में आन्ध्र प्रदेश की दो महिला सत्संगियों ने जबरन कैद किए जाने का आरोप लगाया था। मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई। बाद में इन आरोपों से कृपालु मुक्त हो गये। वृंदावन आश्रम के लिए भूमि का मामला भी पुलिस के पास आया था। इस मामले में मथुरा जिला प्रशासन ने कृपालु महाराज और उनकी संस्था पर कार्रवाई की थी।

चित्रकूट का शिवा उर्फ शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत भीमा नन्द सरस्वती के नाम के साथ एक और उर्फ यानी सेक्स रैकेट सरगना जुड़ जाने से धर्मनगरी चित्रकूट के वाशिंदे मर्माहत है। संत-महात्मा परेशान हैरान हैं कि इस इच्छाधारी ने तो गेरूआ रंग को ही कलंकित कर दिया। इच्छाधारी को पैदा करने वाला चमरौहा गांव तो श्रीहत महसूस कर रहा है। लोग कह रहे हैं कि इस गॉंव को कल तक कोई नहीं जानता था और आज जब जान रहे हैं तो बदनाम इच्छाधारी के कारण। इच्छाधारी चमरौहा में 25 अप्रैल को शतचंडी यज्ञ कराने वाला था। काशी के 101 पंडित भी बुक हो गये थे। पूर्व सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी कहते हैं कि आयोजन में उन्हें भी बुलाया था लेकिन इसकी काली करतूत को लेकर आशंका थी। यह बाबा तो ददुआ जैसे डकैत का करीबी था। वह इच्छाधारी संत नहीं नाग है जिसने पाठा की गरीब आदिवासी बालाओं पर भी निगाहें गड़ाई थीं।

अयोध्या, वाराणसी, हरिद्वार, मथुरा-वृंदावन और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों के कई आश्रमों और मंहतों के नाम तो अक्सर ही विवाविदत छवि के कारण चर्चा में रहते हैं। कुछ समय पहले चित्रकूट के एक आश्रम में रहने वाले महंत पर डकैतों को संरक्षण देने का आरोप लगा था। पुलिस कार्रवाई भी हुई लेकिन बाद में मामला रफा-दफा हो गया। इसी प्रकार अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत पर गोलियां व बमों से हमला किया गया। चित्रकूट में आश्रम बना कर भगवान की भक्ति में लीन रहने वाले स्वामी परमानंद का नाम काफी आदर से लिया जाता था, लेकिन पिछले दिनों औरेया में उनके खिलाफ भी व्यभिचार का आरोप लगाकर जूते-चप्पल फेके गए।स्वामी परमानंद साध्वी ऋतंम्भरा के गुरू हैं।

एक तरफ कई साधू संतों पर आपराधिक आरोप लगे तो कुछ गेरुआ वस्त्रधारियों को साम्प्रदायिकता भड़काने के आरोप में जेल तक की हवा खानी पड़ गई। गोरखपुर के सांसद महंत योगी के ऊपर तो अक्सर ही कट्टर हिन्दूवादी होने का आरोप लगता रहा है। हिन्दू की रक्षा के नाम पर दबंगई दिखाने में उन्हें महारथ हासिल है। इसी के चलते उन्हें दर्जनों बार जेल भी जाना पड़ा। आज भी उनके खिलाफ कई मुकदमें चल रहे हैं। इसी प्रकार भाजपा सांसद रहे पूर्व गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्यानंद, पूर्व रेल राज्य मंत्री सत्यपाल जी महाराज पर भी समय-समय पर सम्पति हड़पने जमीनों पर कब्जा करने जैसे आरोप लगते रहे हैं।

योग गुरू के रूप में देश-विदेश में विख्यात स्वामी रामदेव तो अरबों-करोड़ों का व्यवसाय कर रहे हैं। इसी धन-सम्पदा के बल पर अब वह राजनीति में भी पर्दापण का मन बना चुके हैं। हाल ही में उन्होंने घोषणा की है कि आगामी लोकसभा चुनाव में वह अपनी पार्टी बनाकर प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। जाहिर है राजनीतिक चोला पहनने पर बाबा का भगवा चोला दागदार जरूर हो जाएगा। आसाराम बाबू भी अपने कारनामों के कारण कम चर्चा में नहीं हैं। इसी तरह आजकल निर्मल बाबा की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिंह लग रहा है। पाव-भाजी खिलाकर लोगों का दुख-दर्द बांटने का दावा करने वाले निर्मल बाबा कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ गए हैं। ऐसे ही आरोप कभी कांग्रेस सहित कई नेताओं के करीबी रहे चन्द्रस्वामी पर भी लगे थे। बाबा जयगुरू देव ने तो राजनीति में भी खूब नाम कमाया था। सत्यपाल महाराज भी साधू वेशधारी मुद्रा में सत्ता के गलियारों में सुर्खियां बटोरते रहते हैं। वह कांग्रेस के सांसद हैं और पिछले दिनों उनके उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में भी वह शामिल दिखे थे। सत्यपाल महाराज के देश-दुनिया में लाखों भक्त हैं। इसी प्रकार कर्नाटक सीआईडी ने स्वामी नित्यानंद के खिलाफ रामागरम अदालत में एक चार्जशीट दाखिल कर रखी है। इसमें दावा किया गया कि नित्यानंद ने कई महिला भक्तों के अलावा अपने एक विदेशी भक्त के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए थे। उनके ऊपर महिला भक्तों के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने का भी आरोप है।

वृंदावन में एक बाबा भगवताचार्य राजेन्द्र उर्फ पोर्न स्वामी को पकड़ा गया था। उनके बारे में खुलासा हुआ कि यह अश्लील फिल्में शूट करता है। इसके पास से कुछ ऐसी फिल्में भी बरामद हुई जिसमें राजेन्द्र विदेशी युवतियों के साथ स्वयं अप्राकृतिक यौनाचार करता दिखा। इतना ही नहीं राजेन्द्र ने अपनी पत्नी की भी अश्लील सीडी बनाकर बाजार में उतार दी थी। इसी प्रकार भीमानंद उर्फ इच्छाधारी बाबा पवित्र गेरुआ वस्त्र पहन कर देह व्यापार करता था। उसके संपर्क में 600 से अधिक लड़कियां थीं। इसमें से 50 लड़कियां केवल बाबा के लिए ही काम करती थीं। बाबा ने अलग-अलग लड़कियों के लिए अलग-अलग रेट फिक्स कर रखे थे। भीमानंद के कुख्यात दस्यु सरगना ददुआ से भी घनिष्ट संबंध थे। एक थे पायलट बाबा देशभर में एक रुपए में शिक्षा देने का दावा करने वाले पायलट बाबा ने फ्रॉड करके करोड़ों कमाएं। बाबा अपनी ऊंची पहुंच के कारण बचे हुए हैं।

बात ज्यादा पुरानी नहीं है। सचिन ने जब पूरा देश सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक का जश्न मना रहा था। तब नई दिल्ली की पुलिस कथित इच्छाधारी शिवमूरत द्विवेदी उर्फ चित्रकूटी बाबा को घेरने में जुटी थी। दक्षिण दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से धर्म नगरी की आड़ में ठगी करने वाले अन्य छद्मवेशी बाबाओं के होश उड़े हुए थे। इन पाखंडी बाबाओं से उन साधू-महात्माओं पर से भी लोगों का विश्वास उठता जा रहा है जो सम्मान के पात्र हैं। उनके तप में न तो छल है और न दिखावा। संत समाज के ऐसे बाबाओं पर कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि संतई पर उंगली न उठे। धर्मनगरी नैमिषारण्य और चित्रकूट के साधू संतों में से रामायणी कुटी के महंत रामहृदय दास कहते हैं कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती हैं। भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवनदास के मुंह से यही निकला उर्फ यह संतों को बदनाम करने वाला हैं संत ओंकार दास हरे महाराज, दिव्यानंद आदि ने कहा कि संतई स्वरूप धारण कर लोगों के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए।

देखने में यह आ रहा है कि धर्मनगरी कहलाने वाले शहरों में कथित बाबाओं और साधू-महात्माओं का कुछ ज्यादा ही जोर रहता है। बात किसी भी तीर्थस्थल की कि जाए सभी जगह इन पाखंडी साधुओं के बीच झगड़ा मिल जाएगा। कहीं उत्तराधिकारी को लेकर लड़ाई है तो कहीं जमीनी कब्जाने में यह लोग लगे हैं। बाबा जयगुरु देव की मृत्यु के बाद भी ऐसा ही कुछ मंजर देखने को मिला। अखाड़ों की लड़ाई तो जगजाहिर है। धर्म की आड़ लेकर अधर्म का काम करने वाले केवल हिन्दू समाज में ही हों ऐसा नहीं है कोई भी धर्म पाखंडी साधू-महात्माओं, मौलवियों, गुरुओं, पादरियों से बच नहीं पाया है। वैसे कहने वाले यह भी कहते हैं कि जब सभी क्षेत्रों में गिरावट का दौर चल रहा है तो साधू-संत समाज इससे अछूता कैसे रह सकता है। मीडिया को ही ले लीजिए, इलेक्ट्रानिक मीडिया एक तरफ तो निर्मल बाबा के पाखंड की धज्जियां उधेड़ता है तो दूसरी तरफ उनके कार्यक्रम का प्रसारण करके पैसे बटोरने में भी पीछे नहीं रहता है। ऐसे तमाम बाबा हैं जिनको इलेक्ट्रानिक मीडिया महिमा मंडित करता रहता है।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय ‘माया’ मैग्जीन के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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