मण्डी प्रशासन व जिला प्रशासन की सांठ-गांठ से किसानों का शोषण : पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के किसानों को विकास का सपना दिखा कर सत्ता हासिल करने वाली सपा सरकार में भी किसानों का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। खाद्य एवं रसद विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की शह पर दलालों ने गेंहूँ की सरकारी लेवियों पर कब्ज़ा जमाना शुरू कर दिया है। ऐसे में सूबे के पीलीभीत जिले के जिलाधिकारी इनपर अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहे है। वही प्रदेश सरकार की नई नीति जिसमें किसानों को उनका पूरा हक़ दिलाने के ‘‘पंजाब पैटर्न’’ पर जिस गेहूं खरीद की बात कर पैटर्न तो लागू कर दिया परन्तु उसमें भी कमीशन एजेन्ट की ‘‘चांदी ही चांदी’’ है। क्या प्रदेश सरकार ने व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिये ही इस नयी नीति को लागू किया। जहॉ पहले सरकारी गेहूं क्रय केन्द्रों पर कमीशन खोरी चल रही थी तो वहीं अब खाद्यान व्यापारी जमकर किसानों को लूट रहे है। वाह-रे प्रदेश सरकार की नीति।
पीलीभीत की मंडी समिति परिसर में सरकारी गेंहू खरीद योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा यहाँ 9 क्रय संस्थाओं के केन्द्र बनाये गये हैं। भारत सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 1285.00 रू0 प्रति कुन्टल रखा गया है। परन्तु दलालों व बिचौलियों या अन्य ऐसी किसी भी कार्य प्रणाली पर अंकुश लगाते हुये शासन ने सम्बन्धित अधिकारी के खिलाफ तुरन्त कार्यवाही करने के लिए हिदायत दी है। वहीं अब नई योजना के अर्न्तगत जनपद पीलीभीत में कुल 19 व्यापारियों को गेहूं खरीद लाइसेन्स दिया गया। वहीं मण्डी समिति पीलीभीत में 4 व्यापारियों को गेहूं खरीद लाइसेन्स जारी किये गये। अब यहॉ मण्डी समिति का हाल यह है कि किसान यहॉ आता तो है परन्तु समर्थन मूल्य 1285.00 के सापेक्ष उसे 1000.00 से लेकर 1150.00 रुपये मात्र ही मिलते हैं। इसमें ऐसा नहीं है कि मण्डी प्रशासन को इसकी भनक नहीं है। सूत्र बताते है कि मण्डी प्रशासन व जिला प्रशासन का बाकायदा प्रति कुन्तल कमीशन तय है और यही कारण है कि जिला प्रशासन सब कुछ जानते हुये भी ऑखें मूंदकर बैठा हुआ है। यही नहीं धांधलेबाजी की हद तो देखिये जिन्हें लाइसेन्स जारी हुये हैं वह तो गेहूं खरीद कर ही रहे हैं, उनके साथ-साथ अब बाकी के अन्य खाद्यान व्यापारी भी गेहूं खरीदने में कोई चूक नहीं कर रहे हैं।
अब अगर इन बातों पर गौर किया जाये तो प्रदेश की यह नई नीति ‘‘किसानों के हित में बनी है या फिर उनके शोषण को’’ यह अभी सब सामने आ जायेगा। मण्डी समिति पीलीभीत में जानकारी एकत्र करते समय कई ऐसे पहलू सामने आये जिनकी शिकायत करने पर कोई कार्रवाई होने के बजाए मण्डी सचिव द्वारा उन्हें संरक्षण दिया गया। अब अगर मण्डी में होने वाले घोटाले को देखा जाये तो पहले यह देखिये कि शासन द्वारा जारी लाइसेन्स धारकों के पास स्टाक सत्यापन के दौरान इतना गेहूं कहा से आया और किस रेट पर उसे खरीदा गया। परन्तु मण्डी प्रशासन व प्रशासनिक सांठ-गांठ से इनका स्टाक सत्यापित हो गया, वहीं जिन लोगों ने अपना स्टाक नील दिखाया है उसपर भी सवालिया निशान लगाना अब कुछ गलत नहीं है। वहीं अगर यह लोग सही सरकारी मूल्य पर गेहूं खरीद कर रहे है तो फिर किसान इधर-उधर क्यों भटक रहा है और कम मूल्य पर अपना गेहूं बेच रहा है।
वहीं अब जब इन लोगों की शिकायत की जाती है तो मण्डी सचिव व कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारी अपने कमीशन के लालच में इन पर कार्रवाई करने के बजाये इन्हें संरक्षण देने जुट जाते हैं। जबकि यह व्यापारी खुलेआम अपने गोदामों से गेहूं लाकर तोल कर सरकारी बोरों में गेहूं भरकर उन्हें सरकारी गेहूं का दर्जा दे रहे हैं। आखिर क्यों प्रशासन व प्रदेश सरकार सबकुछ जानते हुये भी ऑखें मूंदकर बैठी है, जबकि यही खरीदार स्वंय स्वीकार कर रहे हैं कि वह किसानों को उचित मूल्य नहीं दे रहे हैं। अगर पीलीभीत जनपद के सभी खाद्यान आढ़तियों के यहॉ व उनके गोदामों पर गोपनीय छापे मारे जाये तो इनके स्टाक में लाखों कुन्तल गेहूं मिलेगा जिसे वह बाद में ब्लैक करते हैं। जरा सोचिए? अब बात करते है कुछ कैमरे में खाद्यान माफियाओं की –
व्यापारी भानु प्रताप सिंह : अभी हाल ही में कुछ दिन पूर्व खाद्यान व्यापारी नेता कह रहे थे कि गेहूं भण्डारन की व्यवस्था में सुधार किया जाये साथ ही उन्होंने केन्द्र सरकार को इसके लिये काफी कोसा। अब यह खुद ही बता रहे हैं कि ठेकेदार को ट्रान्सपोर्टेशन में 100.00 रुपए कुन्तल का खर्चा पड़ता है, जिसकी पूर्ति के लिये वह किसी ना किसी तरह किसानों से उस रकम को वसूलता है। परन्तु महाशय जी यह बात भूल गये कि उन्होंने स्वंय एक सरकारी क्रय केन्द्र ले रखा है तथा अभी उन्होंने खरीद का शासन से लाइसेन्स भी लिया है। जिस परेशानी को वह बता रहे हैं तो क्या वह किसानों को पूरा मूल्य दे रहे होंगे?
व्यापारी विनोद गुप्ता : इन्होने भी भण्डारन की समस्या बताते हुये किसानों के हित में यह तो कह दिया कि उन्हे उचित मूलय नहीं मिल पा रहा है। परन्तु महाशय जी यह बात भूल गये कि उन्होने स्वंय एक सरकारी क्रय केन्द्र ले रखा है तथा अभी उन्होने खरीद का शासन से लाईसेन्स भी लिया है। जिस परेशानी को वह बता रहे है तो क्या वह किसानों को पूरा मूल्य दे रहे होगें?
व्यापारी सचिन अग्रवाल : खाद्यान व्यापारी सचिन अग्रवाल से जब बात हुयी तो उन्होंने बताया कि उनके पास कोई भी लाइसेन्स नहीं है। उनसे जब पूछा गया कि वह किस रेट में गेहूं खरीद कर रहे हैं तो उन्होने स्वंय स्वीकारा कि वह जैसा ग्राहक पट जाये कम से कम 1000.00 और अधिकतक 1150.00 रू0 प्रति कु0 के हिसाब से गेहूं खरीद कर रहे है तथा खरीद के समय उन्हे किसी जोत बही की जरूरत नहीं पड़ती। गौरतबल हो कि इनकी राईस मिले भी है।
व्यापारी बाल मुकुंद राम मूर्ति : जब इन महाशय से वार्ता की गयी तो उन्होने चौकाने वाली बाते कह डाली, हम बिना लाइसेन्स खरीद कर रहे है, हमे जोत बही की कोई जरूरत नहीं पडती। हम कमीशन एजेन्ट है हमें किसी लाइसेन्स से कोई मतलब नहीं। जैसा ग्राहक पट जाये वैसा सौदा तय कर लेते है।
व्यापारी राजीव अग्रवाल : महाशय खाद्यान्न व्यापारी है इन्होंने तो अजीबो-गरीब बात कह डाली सवाल पूछने पर बोले कि बैठ कर बात हो जायेगी, आप अपनी कीमत बताइये। यहॉ हम सभी को कमीशन देते हैं हम पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है चाहो तो आजमा लो।
क्या कहते मण्डी सचिव बीएल वर्मा
मण्डी सचिव बीएल वर्मा वैसे तो पीलीभीत मुख्यालय पर रहते ही नहीं है, रोजाना बरेली स्थित अपने आवास से अप-डाउन करने वाले सचिव महोदय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी खूबसूरती से जवाब दिया और बताये गये खाद्यान्न घोटाले पर बोले कि मैं उन्हें समझा दूगॉ, अगर आपकी किसी आढ़ती से कोई बात हो तो सही भी होगा तो उसपर कार्रवाई कर दूंगॉ।
क्या कहते एसडीएम सदर मो0 नईम
सिटी मजिस्ट्रेट पद एसडीएम बने मो0 नईम ने बताया कि अगर उन्हें किसी भी प्रकार की कोई अनिमित्ता गेहूं खरीद के दौरान मिली तो वह किसी भी प्रकार की कोई रियाअत नहीं करेंगे। तत्काल ही उस व्यापारी पर कार्रवाई होगी।
अब गौर फर्माइये इस सूची पर जो शासन से जारी हुयी है।
1. सिंघल ट्रेडिंग कम्पनी, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0
2. प्रकाश वीर कृष्ण वीर, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 41.00 कु0
3. आर.के इन्टप्राईजेज, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 92.00 कु0
4. भानु प्रताप एण्ड ब्रदर्स, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0
5. भारत ट्रेडिंग कम्पनी, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0
6. मोती राम विनोद कुमार, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 525.00 कु0
7. राम सिंह सुरेश चंद, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0
8. जगदीश शरण अशोक कुमार, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 936.00 कु0
9. वसीम ट्रेडिंग कम्पनी, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0
10. मननीलाल जय किशन, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 1000.00 कु0
11. अशोक कुमार नितिन कुमार, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 1205.00 कु0
12. गुप्ता ट्रेडर्स, पीलीभीत। सत्यापित भण्डार 0.00 कु0


