चूरू। स्थानीय नगरश्री प्रांगण में एक सादे साहित्यिक आयोजन में साहित्य अकादमी के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक डॉ. चंद्रप्रकाश देवल को नगरश्री की ओर से शॉल ओढ़ाकर पंडित कुंजबिहारी स्मृति प्रज्ञा मनीषी सम्मान से नवाजा गया। साहित्य अकादमी के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक डॉ. चंद्रपकाश देवल ने संस्कृति के निरंतर हो रहे ह्लास पर चिंता जताते हुए कहा कि वैश्वीकरण का हमला सबसे पहले हमारी संस्कृति पर हुआ है। यह हमला इतना गुप्त हो रहा है कि इसका हमें आभास तक नहीं हो रहा है। आज विदेशी बाजार की वस्तुएं हमारे रसोई घर के हर कोने में मौजूद हो गई है। हमारी राष्ट्र भाषा व मातृ भाषा में विदेशी भाषा के शब्दों की इस कदर पैठ हो गई है कि शब्द आज हमारे भाषा के अंग बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि यद्यपि व्यक्ति अपनी मां की कोख से जन्म लेता है लेकिन उसका असली जन्म अपनी भाषा की कोख से ही होता है। पांच वर्ष की उम्र तक पहुंचते बालक नब्बे प्रतिशत भाषा को सीख जाता है और उसी भाषा में अपने भावों को अभिव्यक्ति करता है। भाषा का सृजन एक दिन में नहीं हुआ बल्कि विकास की एक लम्बी एवं सतत प्रक्रिया है। उन्होंने नगर श्री के कार्यो, शोधों, गतिविधियों, साहित्यक व सांस्कृतिक आयोजनों की प्रसंशा की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह संस्था निरन्तर अपने उद्देश्यों की पूर्ति में संलग्न रहेगी। चूरू बालिका महाविद्यालय के निदेशक सोहनसिंह दुलार ने भी अपने विचार प्रकट किए। रामगोपाल बहड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम का संचालन प्रो. कमल सिंह कोठारी ने किया।


