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ताजा टीवी और छपते छपते ने किया हिन्‍दी पत्रकारों को सम्‍मानित

: पाठकों का दबाव ही समाचारपत्रों को जनोन्मुखी बनायेगा : डा. मिश्र : कोलकाता। ‘हिन्दी पत्रकारिता की 186 वर्ष की यात्रा, एक सिंहावलोकन’ विषय पर कल कोलकाता के भारतीय भाषा परिषद में एक गोष्ठी सम्पन्न हुई। इसका आयोजन पूर्वी भारत के एकमात्र हिन्‍दी न्‍यूज चैनल ताजा टीवी के सहयोग से हिन्दी दैनिक समाचार पत्र छपते छपते द्वारा किया गया था। कार्यक्रम का विशेष फोकस पांच वयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनंदन था। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए हिन्दी के विद्वान लेखक डा. कृष्ण बिहारी मिश्र ने हिन्दी समाचारपत्रों के गौरवपूर्ण अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि सम्पादक को इतनी स्वतंत्रता थी कि वह अपनी सोच को हूबहू व्यक्त कर सकता था। आज पत्रों के कलेवर बेहतर हुए हैं, मुद्रण एवं सजावट में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है किन्तु संस्कारों एवं राष्ट्रीय मूल्यों के लिये संघर्ष नदारद है। डा. मिश्र ने कहा कि अंतोतगत्वा पाठकों का दबाव ही समाचार पत्रों की नीति को देशोन्मुखी एवं जनोन्मुखी बनायेगा।

: पाठकों का दबाव ही समाचारपत्रों को जनोन्मुखी बनायेगा : डा. मिश्र : कोलकाता। ‘हिन्दी पत्रकारिता की 186 वर्ष की यात्रा, एक सिंहावलोकन’ विषय पर कल कोलकाता के भारतीय भाषा परिषद में एक गोष्ठी सम्पन्न हुई। इसका आयोजन पूर्वी भारत के एकमात्र हिन्‍दी न्‍यूज चैनल ताजा टीवी के सहयोग से हिन्दी दैनिक समाचार पत्र छपते छपते द्वारा किया गया था। कार्यक्रम का विशेष फोकस पांच वयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनंदन था। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए हिन्दी के विद्वान लेखक डा. कृष्ण बिहारी मिश्र ने हिन्दी समाचारपत्रों के गौरवपूर्ण अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि सम्पादक को इतनी स्वतंत्रता थी कि वह अपनी सोच को हूबहू व्यक्त कर सकता था। आज पत्रों के कलेवर बेहतर हुए हैं, मुद्रण एवं सजावट में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है किन्तु संस्कारों एवं राष्ट्रीय मूल्यों के लिये संघर्ष नदारद है। डा. मिश्र ने कहा कि अंतोतगत्वा पाठकों का दबाव ही समाचार पत्रों की नीति को देशोन्मुखी एवं जनोन्मुखी बनायेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलकत्ता उच्च न्यायालय के विचारपति श्री कल्याण ज्योति सेनगुप्ता ने कहा कि सभी समाचार पत्रों में गिरावट आई है। व्यवसायिकता एवं महानगरों की विलासिता का कुप्रभाव हिन्दी और बंगला दोनों के समाचार पत्रों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि केकेआर मैचों को एवं उसकी जीत के जश्‍न को अत्यधिक महत्व देना समाचार पत्रों को जनभावना से अलग कर रही है। आज वैज्ञानिक अविष्‍कार या किसान की वेदना हेतु समाचार पत्रों में उचित स्थान नहीं मिलता जबकि ग्लैमर अखबार पर छा गया है। समाचार पत्र संपादकों एवं पत्रकारों को स्वयं इसकी समीक्षा करनी चाहिए।

कार्यक्रम में पांच वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनंदन किया गया, जिसमें शामिल हैं श्री सुदामा प्रसाद सिंह, श्री एम. आई अंसारी, श्री सन्तन कुमार पांडे, डा. राम खिलावन त्रिपाठी ‘रूक्‍म’ एवं श्री रामगोपाल खेतान। इन्हें मोमेन्टो के अलावा शाल ओढ़ाया गया एवं उत्तरीय से उनका वरण किया गया। अभिनन्दित पत्रकारों को बीएम बिड़ला हर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से ‘हेल्थ कार्ड’ प्रदान किया गया। सभी अभिनंदित पत्रकारों ने संक्षेप में आज की पत्रकारिता एवं अतीत का गौरव पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये। संचालन सुश्री राज प्रभा दस्सानी ने किया। कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार श्री विश्वम्भर नेवर ने स्वागत भाषण में हिन्दी पत्रों एवं पत्रकारों की अन्तर्वेदना एवं संघर्ष का जिक्र किया। धन्यवाद ज्ञापन किया श्री बिपिन नेवर ने। समारोह में बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी एवं राज्यपाल श्री एम. के. नारायणन के संदेशों के स्टैण्ड को सजाया गया था।

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