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लाचारी में लेते हैं जान – ब्रह्मेश्वर सिंह

रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया अब नहीं रहे। 1995 में रणवीर सेना का गठन करने के बाद मुखिया भूमिगत होकर अपने ‘खूनी’ आंदोलन को अंजाम दे रहे थे। भूमिगत रहने के दौरान ही मुखिया का यह साक्षात्कार पटना में एक भाजपा नेता के आवास पर ‘विचार मीमांसा’ पत्रिका के लिए लिया गया था।

रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया अब नहीं रहे। 1995 में रणवीर सेना का गठन करने के बाद मुखिया भूमिगत होकर अपने ‘खूनी’ आंदोलन को अंजाम दे रहे थे। भूमिगत रहने के दौरान ही मुखिया का यह साक्षात्कार पटना में एक भाजपा नेता के आवास पर ‘विचार मीमांसा’ पत्रिका के लिए लिया गया था।

 

उग्रवादियों के साथ हुए संघर्ष में अब तक रणवीर सेना के कितने लोग मारे जा चुके हैं?

एक भी नहीं। प्रतिद्वंद्वी गुटों या सेनाओं के साथ हुए संघर्ष में रणवीर सेना के एक भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है, जो अपने आप में एक अद्वितीय घटना है। धर्म और अधर्म की लड़ाई महाभारत में भी ऐसी कोई मिसाल नहीं मिलती, जिसमें सिर्फ एक ही पक्ष के लड़ाकू मारे गए हों। हां, यह अलग बात है। वैसे, रणवीर सेना का संचालन तीन स्तर पर किया जाता है। सेना के प्रमुख को ‘चीफ आफ द रणवीर सेना’ जिला स्तर पर ‘जोनल चीफ’ और प्रखंड स्तर पर ‘ब्लॉक चीफ’ इसके संचालक और सर्वेसर्वा होते हैं।

इसका कोई राजनीतिक मंच भी है?

शुरुआत में यह राजनीतिक मंच ही था। रणवीर समिति, रणवीर संग्राम समिति और फिर अंत में रणवीर किसान महासंघ। बाद में चलकर सरकार ने इस संगठन को प्रतिबंधित करने के अलावा इसका नाम बदलकर ‘रणवीर सेना’ कर दिया।

आपकी मुख्य लड़ाई किससे है?

सत्ता में बैठे उन सफेदपाशों से, जो पटना और दिल्ली में बैठकर लड़ाई का संचालन कर रहे हैं। उग्रवादियों से तो निचले स्तर पर हम लड़ते हैं, क्योंकि सत्तासीन लोग ही हमारे दुश्मन हैं। इसके अलावा वैसे लोग या संगठन, जो हमारे रास्ते में अवरोधक बनकर खड़े हैं।

पार्टी यूनिटी को राजनीतिक स्तर पर कौन संरक्षण दे रहा है?

मुख्यमंत्री लालू प्रसाद। उग्रवादी संगठन एमसीसी और युनाइटेड जनता दल और उसके नेता लालू प्रसाद का पालतू कुत्ता है। ‘माले’ उससे कुछ अलग जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर दोनों-तीनों एक ही हैं।

आपके इस संगठन को हथियार कहां से मिलते हैं?

संगठन से संबद्ध किसान अपने-अपने स्तर से हथियार की खरीदारी करते हैं।

कुछ लोगों द्वारा कहा जाता है कि रणवीर ‘भूमिहारों’ की निजी सेना है?

बिल्कुल गलत है। रणवीर सेना में भूमिहार राजपूत, ब्राह्मण, मुसहर, हरिजन सभी जाति के लोग हैं।

कहा जाता है कि भाजपा के जनार्दन शर्मा और सीपी ठाकुर आपको हथियारों का जखीरा जमा करने के लिए नियमित रूप से पैसा देते हैं?

बिल्कुल गलत बात है। आज तक हम किसी पार्टी के किसी नेता से नहीं मिले।

आज की तारीख में कौन-सी पार्टी किसानों के हित में काम कर रही है?

आज की तारीख में कोई भी राजनीतिक पार्टी किसानों के हित में काम नहीं कर रही है। हर राजनीतिक दल केवल अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं।

यदि अभी चुनाव हो जाए, तो रणवीर सेना किस पार्टी को समर्थन देगी?

किसी को भी नहीं। रणवीर सेना को किसी राजनीतिक पार्टी में कोई दिलचस्पी नहीं है और फिर राजनीति की दिशा में बढ़ने से हमारा आंदोलन कमजोर होकर बिखर जाएगा।

क्या आप हिंसा की राजनीति में विश्वास रखते हैं?

बिल्कुल नहीं। यह तो लाचारी है कि अपनी जान बचाने के लिए हमें दूसरों की जान लेनी पड़ती है। वरना सोलह कौन कहे, पच्चीस आना हम हत्या के खिलाफ हैं।

आप किस तरह से दबाव डालते हैं?

जन अदालत लगाते हैं। लाख-लाख रुपया तक वसूलते हैं किसानों से।

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