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प्रभात झा, नौटंकी करने की भी कोई हद होती है

लो साहब भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष ”बिहारी बाबू”  प्रभात झा बढ़ती मंहगाई से इतने द्रवित हो गये कि उन्होंने महिला राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा ताई पाटिल से इच्छा मृत्यु मांगने के लिये ”एप्लीकेशन”  दे दी. प्रभात भैया का कहना है कि केन्द्र की सरकार ने सौ दिनों में मंहगाई कम करने की बात कही थी पर सौ की जगह एक हजार दिन हो गये हैं, मंहगाई कम होने की बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है इसलिये उनका इस मंहगाई के खिलाफ प्राण त्यागने के अलावा कोई चारा नही बचा है, सो वे ”इच्छा मृत्यु”  मांग रहे हैं.  मान गये अपन प्रभात भाई जी को सौ दिन के दो सौ दिन हो जाते दो के तीन सौ दिन हो जाते पर अब तो हजार दिन हो गये हैं,  अब उन्हें याद आ रहा है कि केन्द्र सरकार ने महंगाई घटाने का वादा किया था.

लो साहब भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष ”बिहारी बाबू”  प्रभात झा बढ़ती मंहगाई से इतने द्रवित हो गये कि उन्होंने महिला राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा ताई पाटिल से इच्छा मृत्यु मांगने के लिये ”एप्लीकेशन”  दे दी. प्रभात भैया का कहना है कि केन्द्र की सरकार ने सौ दिनों में मंहगाई कम करने की बात कही थी पर सौ की जगह एक हजार दिन हो गये हैं, मंहगाई कम होने की बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है इसलिये उनका इस मंहगाई के खिलाफ प्राण त्यागने के अलावा कोई चारा नही बचा है, सो वे ”इच्छा मृत्यु”  मांग रहे हैं.  मान गये अपन प्रभात भाई जी को सौ दिन के दो सौ दिन हो जाते दो के तीन सौ दिन हो जाते पर अब तो हजार दिन हो गये हैं,  अब उन्हें याद आ रहा है कि केन्द्र सरकार ने महंगाई घटाने का वादा किया था.

इन नौ सौ दिनों तक आप क्या कर रहे थे हुजूर? वैसे आपकी बुद्धि की दाद देना ही पड़ेगी जो आपने राष्‍ट्रपति को एप्लीकेशन दे दी आपको मालूम है कि अभी तो आतंकवादियों को फांसी देने की फाइलों का नंबर नही लग पाया है तो आपकी एप्लीकेशन की फाइल का नंबर तो आने से रहा.  हो सकता है इसको राष्‍ट्रपति के सामने पहुंचने में पांच सात साल लग जाये,  पर आपने तो जितनी ”पब्लिसिटी”  बटोरनी थी बटोर ली इसे कहते हैं ”पब्लिसिटी गुरु” काम धेले का नहीं पब्लिसिटी लाखों की,  वैसे भी अपने प्रभात भैया प्रचार पाने का हुनर अच्छी तरह से जानते हैं.  कभी उल्टे-सीधे खतरनाक बयान देकर अपने आप को टीवी पर लाने की कोशिश करते हैं तो कभी मुख्यमंत्री को ” उपास” करने की सलाह देकर अपने आप को राजनीति का गुरु बताने की कोशिश करते हैं.  अरे भैया आप एक सत्तारूढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हो ”नौटंकी” करना हर राजनेता का ”जन्मसिद्व” अधिकार है पर नौटंकी की भी कोई हद होती है.

आप क्या समझते हो कि प्रदेश की जनता आपकी इस नौटंकी को समझती नहीं है.  माना कि जनता कई बार गलती कर जाती है पर इसका ये मतलब तो है नहीं कि उसे आप पूरी तरह से ”बेबकूफ”  समझ लो हुजूर आपको प्रदेश की जनता की इतनी ही चिन्ता है तो मुख्यमंत्री से कहकर पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले प्रदेश के टैक्स को क्यों कम नहीं करवा देते? जरा अपनी ही पार्टी के कुछ दूसरे प्रदेश्‍ा के मुख्यमंत्रियों से सीख लो,  जिन्होंने अपना टैक्स कम कर के जनता को राहत देने की कोशिश तो की है,  पर आपको इन सबसे मतलब तो है नहीं,  आपको तो अपनी दुकान सजाना है सो सजा ली, अखबारों की सुर्खियां बन गये अब और क्या चाहते हो? वैसे आपने स्कीम ”फुलप्रूफ”  चली है और कह भी दिया है कि प्रतिभा पाटिल एक मां हैं,  इसलिये वे कभी भी इच्छा मृत्यु की परमीशन नहीं देंगी यानी सांप भी मर गया और लाठी भी नही टूटी.

कहने को भी हो गया कि प्रभात झा साहब को देश और प्रदेश की जनता की इतनी चिन्ता है पर इच्छा मृत्यु की परमीशन  नहीं मिली,  कोई जब सवाल उठायेगा तो कह देंगे कि भाईसाहब हमने तो अपनी ओर से पूरी कोशिश करी थी पर क्या करें ”ताई”  मानीं ही नहीं. इधर भाजपा के नेता अपने इस अध्यक्ष की इस नौटंकी से हतप्रभ हो गये हैं उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा है कि वे क्या जबाब दें मीडिया वालों को प्रभात झा के नाटक का. उनके मुंहों पर तो ताले लग गये हैं कोई कुछ कहने के लिये तैयार नहीं है और कहे भी तो क्या कहे. माना वे लोग भी नौटंकी में ”एक्सपर्ट”  है पर इतने ऊंचे स्तर की नौटंकी, एक ही झटके में सारे ”नौटंकीबाजों”  को प्रभात झा साहब ने पटकनी दे दी बडे़-बडे़ नौटंकी करने वाले, मजमा लगाने वालों ने प्रभात झा को मन ही मन अपना गुरु मान लिया है, क्योंकि आज तक देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी नेता ने मंहगाई से तंग आकर इच्छा मृत्यु की मांग रख दी हो.

प्रभात जी अगर आपको प्रदेश के जनता की, गरीबों की इतनी ही चिन्ता है, आपकी आंखों से उसके दुख देखकर मोटे-मोटे आंसू, भले ही घड़ियाली ही क्यों न हों,  यदि गिर रहे हैं तो आप आमरण अनशन शुरू कर दो वो भी तो एक तरह की इच्छा मृत्यु ही है,  पर आपने आमरण अनशन करने वाले बाबा रामदेव का हश्र देख ही लिया है कि कैसे ”लुगाइयों” के कपडे़ पहन कर अनशन स्थल से भागना पड़ा था.  कैसे स्टेज से कूदना पड़ा था.  वे तो योग करते थे इसलिये स्टेज से कूद भी गये पर आप तो स्टेज से कूद भी नहीं पाओगे सो आपने एक एप्लीकेशन लगा दी.  आप जानते हो कि देश में लालफीताशाही कितनी ”पावरफुल”  है पहले आपकी एप्लीकेशन राष्ट्रपति भवन का आवक जावक बाबू देखेगा फिर वो उसक सेक्‍शन आफीसर के सामने पेश करेगा फिर सेक्‍शन  आफीसर सुपरिन्टेडेन्ट के पास पहुंचायेगा आपकी फाइल, सुपरिनटेन्डेन्ट उस फाइल का अध्ययन कर उसे उप सचिव के पास पहुंचायेगा,  उपसचिव उसकी गंभीरता को यदि समझ गया तो वो आगे फाइल बढ़ा देगा और यदि उसे लगा कि फालतू की एप्लीकेशन है तो फाइल वहीं अटक कर रह जायेगी.

आपने यदि जुगाड़ लगाकर फाइल आगे बढ़वा भी ली तो सचिव के पास लटक कर रह जायेगी आपकी एप्लीकेशन, जैसे तैसे प्रमुख सचिव तक चिट्ठी चली भी गई तो पहले की फाइलों का जब तक निबटारा नहीं होगा तब तक आपकी फाइल को नीचे दबा कर रख दिया जायेगा. अरे जब संसद पर हमला करने वालों की फांसी की सजा पर इतने सालों में कोई निर्णय नहीं हो पाया तो आपको क्या लगता है आपके आवदेन पर इतनी जल्दी कार्यवाही हो जायेगी.  यही सोचकर प्रभात भैया ने राष्‍ट्रपति को पत्र लिख दिया है. वैसे एक बात बताये प्रभात झा जी आप कितनी ही कोशिश कर लो कि आप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बराबर हो जाओ उनके जैसी लोकप्रियता हासिल कर लो पर ये संभव नहीं है,  क्योंकि वे इन मामलों में आपके गुरु ही साबित हैं और आगे भी रहेंगे.

लेखक चैतन्‍य भट्ट जबलपुर के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

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