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यह कैसा इंसाफ? शहीद रोशन सिंह की प्रपौत्री को नहीं मिल रहा न्‍याय

शाहजहांपुर। अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह और उनके साथियों ने कभी सोचा न होगा कि जिस धरती को आजाद कराने के लिए वह अपने प्राणों की बलि दे रहे हैं, उसी धरती पर उनके परिजन न्याय के लिए भटकेंगे और न्याय के बजाय जिल्लत झेलेंगे। दबंगों ने अमर शहीद रोशन सिंह की प्रपौत्री को न सिर्फ बेरहमी से पीटा, बल्कि सारे गांव के सामने फायरिंग करते हुए आग भी लगा दी। पुलिस ने चार दिन बाद एसपी के आदेश पर धारा 307 के तहत रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन मनमानी तहरीर पर। घटना के 11वें दिन आज पुलिस ने दोनों आरोपियों में से एक का शांतिभंग में चालान कर दिया। आरोप है कि पुलिस सत्ता पक्ष के एक विधायक के कारण दबंगों का फेवर कर रही है। इंसाफ न मिलने पर आज शहीद की प्रपौत्री फिर एसपी से आकर मिली। उसने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या कर लेगी। एसपी ने एसआईएस से जांच के आदेश दिए हैं।

शाहजहांपुर। अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह और उनके साथियों ने कभी सोचा न होगा कि जिस धरती को आजाद कराने के लिए वह अपने प्राणों की बलि दे रहे हैं, उसी धरती पर उनके परिजन न्याय के लिए भटकेंगे और न्याय के बजाय जिल्लत झेलेंगे। दबंगों ने अमर शहीद रोशन सिंह की प्रपौत्री को न सिर्फ बेरहमी से पीटा, बल्कि सारे गांव के सामने फायरिंग करते हुए आग भी लगा दी। पुलिस ने चार दिन बाद एसपी के आदेश पर धारा 307 के तहत रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन मनमानी तहरीर पर। घटना के 11वें दिन आज पुलिस ने दोनों आरोपियों में से एक का शांतिभंग में चालान कर दिया। आरोप है कि पुलिस सत्ता पक्ष के एक विधायक के कारण दबंगों का फेवर कर रही है। इंसाफ न मिलने पर आज शहीद की प्रपौत्री फिर एसपी से आकर मिली। उसने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या कर लेगी। एसपी ने एसआईएस से जांच के आदेश दिए हैं।

काकोरी कांड में फांसी की सजा पाने वाले अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की प्रपौत्री इंदू सिंह की ननिहाल थाना सिंधौली के पैना बुजुर्ग गांव में है। नानी ने इंदू की शादी गांव के ही धनपाल सिंह से कर दी थी। धनपाल को शराब पिला पिलाकर गांव के दबंगों ने उसकी जमीन मकान सब लिखा लिया। करीब सात साल पहले धनपाल की मौत हो गई। इंदू तीनों बच्चों के साथ सड़क पर आ गई। मेहनत मजदूरी करके वह बच्चों का पेट पालने लगी। गांव के ही भानू सिंह ने गांव से लगे अपने खेत की बोरिंग पर एक मड़ैया डलवा दी। उसी में रहकर इंदू अपने बच्चों को पाल पोस रही है। पेट पालने के लिए उसके मासूम बच्चों को भी मजदूरी करनी पड़ती है। इंदू नरेगा मजदूर है। उसने इंदिरा आवास के लिए आवेदन किया था, लेकिन तत्कालीन प्रधान ने उसका नाम काट दिया। शहीद दिवस पर अमर शहीदों के नाम से कार्यक्रम कराने के लिए दस-दस लाख चंदा बसूलने वाले यह तो जानते हैं कि अमर शहीद रोशन सिंह की प्रपौत्री पैना गांव में बड़ी विपन्न स्थिति में रहती है, लेकिन कभी किसी ने उसकी मदद की जरूरत नहीं समझी।

फिलहाल इंदू तो जैसे तैसे अपने बच्चों को पाल पोस रही थी, लेकिन गांव के दबंगों को यह रास नहीं आया। गांव के सोनू सिंह और अनुज सिंह समेत चार पांच लोगों ने सरेशाम हमला कर इंदू सिंह को बेरहमी से पीटा, फायरिंग की और इसके बाद झोपड़ी में आग लगा दी। यह नजारा सैकड़ों लोगों ने देखा। उसकी गृहस्थी जलकर खाक हो गई। पहनने को कपड़े और खाने को दाना तक नहीं बचा। वह रात में ही थाने गई, लेकिन उससे पहले ही दबंगों के पक्ष में सत्ता पक्ष के एक विधायक राममूति सिंह वर्मा का फोन आ चुका था। पुलिस ने उसे टरका दिया। पुलिस तीन दिन तक उसे टरकाती रही। चौथे दिन वह एसपी से आकर मिली। एसपी के आदेश पर पुलिस रिपोर्ट लिखी, लेकिन इंदू की दी तहरीर पर नहीं। पुलिस ने उससे सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया और उसी पर मनमानी तहरीर लिख ली। छह में से सिर्फ दो आरोपियों को ही नामजद किया। पुलिस ने धारा 307 लगाई, लेकिन बाद में जांच में सारी धाराएं किनारे कर दीं और एक आरोपी का शांतिभंग में चालान कर इतिश्री कर ली। इससे पूर्व आरोपी पुलिस वालों के साथ ही जा जाकर इंदू को धमकाते रहे। आज इंदू फिर एसपी से आकर मिली। उसने कहा कि अगर उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह बच्चों समेत आत्महत्या कर लेगी। एसपी ने एसआईएस से जांच कराए जाने के आदेश दिए हैं। इंदू आज मांग कर कपड़े व चप्पल पहन कर आई थी। उसके बच्चों के पास पहनने को कपड़े तक नहीं हैं। घर में कुछ बचा नहीं है, इसलिए परिवार गांव में इधर उधर से मांग कर खाना खा रहा है।

शाहजहांपुर से सौरभ दीक्षित की रिपोर्ट.

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