वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड कितना धनी बोर्ड है, यह जगजाहिर है। श्राइन बोर्ड बाहर से दिखाना चाहता है कि वह यहां आने वाले श्रद्धालुओं का बेहतर ढंग से ध्यान रख पाता है। सबसे पहले बात कटरा से शुरू की जाए। कटरा में श्राइन बोर्ड के रहने के लिए 3 कॉम्पलेक्स हैं। नीहारिका, शक्ति भवन व त्रिकूट भवन। तीनों ही अलग-अलग स्थानों पर ठहरने के लिए विभिन्न श्रेणी के कमरे व डोरमेटरी उपलब्ध हैं। आप अगर यहां के लिए ऑनलाइन बुकिंग करवाना चाहते हैं तो कम से कम चार दिन पहले व बुकिंग करीब 1 महीने पहले खुलती है। अगर आप तीन दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग करवाना चाहते हैँ तो आप यहां ठहरने के लिए कमरा बुक नहीं करवा सकते, भले कमरे व डोरमेटरी खाली पड़े हों। बोर्ड द्वारा कहा जाता है कि ऐसे में सीधे वहीं पहुंच कर बुकिंग करवा सकते हैं। लेकिन आप इस भुलावे में न रहें। हम दिल्ली से जब यहां पहुंचे तो हम 3 पुरूष, 3 महिलाएं व 2 बच्चे कटरा स्थित श्र्राइन बोर्ड के त्रिकूट भवन में पहुंचे। रिसेप्शन पर एक परमानेंट बोर्ड लगा देखा जिस पर लिखा था सॉरी हाऊस फुल। हमें लगा कहीं हम गलती से किसी सिनेमा घर में तो नहीं आ गए।
खैर रिसपेशन पर हमने जब कहा के हमें 8 लोगों के लिए डोरमटरी चाहिए। तो सॉरी हाऊस फुल बोर्ड की तरफ इशारा कर दिया गया। यहां की अच्छी बात यह है यहां डोरमेटरी सस्ते रेट में उपलब्ध हैं। श्राइन बोर्ड के बड़े पदाधिकारियों को यह बात पता है या नहीं कि यहां ब्लैक पर कमरे दिलवाने का काम बड़े धड़ल्ले से किया जा रहा है। मजबूरी वश हमने खुद 400 रुपए अलग से देकर 5 डोरमेटरी ली। हमें कहा गया कि हम आप से 6 का चार्ज कर रहे हैं क्योंकि आप 8 लोग हैं। लेकिन आपको 5 में ही एडजेस्ट करना होगा यानी हमें वह 5 डोरमेटरी 360 व 400 रुपए ब्लैक मिला कर कुल 760 रुपए में एक दिन के लिए मिलीं। रात भर ट्रेन के सफर के बाद जब हम 2 मंजिल स्थित कमरे में पहुंचे तो देखा कि बिस्तर में खटमल हमारा स्वागत करने यानी खून चूसने के लिए बेसब्र थे। क्या श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों ने खून चूसने में कोई कमी की थी, जो खटमल यहां मौजूद थे। सेवा में कमी का यह मामला सीधे तौर पर एक ग्राहक के साथ नाइंसाफी है।
यहां मौजूद फ्लोर साफ सफाई के लिए पूरे 10 नम्बर दिए जा सकते हैं। लेकिन क्या बिस्तर को खटमल मुक्त करना बोर्ड का काम नहीं। दूसरी मंजिल पर महिला वॉशरूम पर मरम्मत का काम चल रहा है। ऐसे में महिलाओं को भी पुरूषों का वॉशरूम इस्तेमाल करने को कहा जाता है। इस कॉमन वॉशरूम में टॉयलेट, नहाने के लिए बाथरूम व पुरूषों के विशेष यूरिनल पॉट लगे हैं। मुझे बड़ी शर्मिंदगी हुई जब मैं यूरिनल इस्तेमाल कर रहा था तो वहीं पास में एक महिला नहा कर बाहर निकल रही थी। यहां श्राइन बोर्ड का एडमिन क्या कर रहा है। क्या हम ऐसी शर्मिंदगी उठाने के लिए इतनी दूर जाते हैं। वॉशरूम के बाहर पुरूष लिखा देखा तभी हम वहां गए। इससे भी बड़ी बात पुरूष वॉशरूम में महिला सफाई कर्मी का हर समय सफाई करते रहना क्या यह ठीक है कि पुरूष वॉशरूम में एक महिला सफाई कर्मी रहे। यहां के शाक्ति भवन व त्रिकूट भवन में रिसेप्शन से लेकर क्लॉक रूम तक के कर्मचारियों का व्यवहार बहुत ही बुरा होता है।
Ravi
New delhi
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