प्रतापगढ़ के परियावां इलाके में सैकड़ों लोगों की जान सांसत में हैं। दहशत आशंकाओं ने लोगों की नींद उड़ा दी है। करीब दो सौ महिला-बच्चों और बुजुर्गों ने अपनी उजड़ चुकी घर-गृहस्थी छोड़ राजा भइया के कॉलेज में शरण ली है। इसके पहले वे मस्जिद में रखे गए थे। इनके लिए अब पल-पल का समय काटना मुश्किल हो गया है। आलम यह कि घटना के चौथे दिन मंगलवार को भी पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के मार्च के बूटों की आवाज से यहां बीच-बीच में सन्नाटा टूट रहा है।
अस्थान गांव में ग्यारह वर्षीय बालिका से गैंगरेप और हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से गुस्साए लोगों ने तीन दिन पहले समूची जुलाहा बस्ती फूंक दी। 46 मकान जल गए। समूची गृहस्थी नष्ट हो गई। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बमुश्किल एक सौ किमी दूर परियावां इलाके के जुलाहा बस्ती में पांच घंटे तक तांडव चला। कानून व्यवस्था तार-तार होती रही। चीख-पुकार और जान तोड़फोड़ और आगजनी का सिलसिला खत्म होने का नाम नही ले रहा था। दर्जनों बुजुर्ग, युवतियां, मासूम पीटे-घसीटे गए। काफी देर बाद पुलिस की नींद टूटी। पुलिस बल के साथ डीएम योगेंद्र कुमार बहल, एसपी ओपी सागर आए पर बवालियों ने पथराव कर उन्हें गांव में ही नहीं घुसने दिया।
मासूम से गैंगरेप, हत्या के आरोपियों और लापरवाह पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद डीएम और एसपी गांव में घुस पाए। हालात देखते हुए पड़ोसी जिले इलाहाबाद, रायबरेली, कौशांबी, सुल्तानपुर से फोर्स बुला ली गई। इलाहाबाद से आईजी आलोक शर्मा, कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी भी पहुंच गए। घटना के चौथे दिन भी अस्थान गांव के जुलाहा बस्ती में आशंकाओं का माहौल है। समूचा गांव पुलिस छावनी में तब्दील है। इन सबके बीच यहां के दहशतजदा वाशिंदों की आंखों पर एक सवाल ही चस्पा है कि तीन दुराचारियों और कतिपय पुलिस वालों की कार्रवाई न करने वाली लापरवाही का खामियाजा समूची बस्ती को क्यों भुगतना पड़ा। आखिर उनका क्या गुनाह था?
अस्थान बस्ती से लौटकर शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.


