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प्रतिभा मूल्‍यांकन परीक्षा में औंधे मुंह गिरे यूपी बोर्ड के टॉपर

गोण्डा। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद द्वारा संचालित हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट परीक्षाओं के टापर्स उप्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गोण्डा द्वारा आयोजित प्रतिभा मूल्यांकन व सम्मान समारोह में औंधे मुंह गिर गए। वर्ष 2012 की परीक्षा में हाईस्कूल में जिले में प्रथम स्थान लाने वाली रागिनी पाण्डेय को 44 तथा इण्टरमीडिएट के टापर सत्यब्रत को कुल 16 अंक मिले। इसके बाद बोर्ड परीक्षा की शुचिता एवं कार्यप्रणाली पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

गोण्डा। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद द्वारा संचालित हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट परीक्षाओं के टापर्स उप्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गोण्डा द्वारा आयोजित प्रतिभा मूल्यांकन व सम्मान समारोह में औंधे मुंह गिर गए। वर्ष 2012 की परीक्षा में हाईस्कूल में जिले में प्रथम स्थान लाने वाली रागिनी पाण्डेय को 44 तथा इण्टरमीडिएट के टापर सत्यब्रत को कुल 16 अंक मिले। इसके बाद बोर्ड परीक्षा की शुचिता एवं कार्यप्रणाली पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
उप्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महामंत्री जानकी शरण द्विवेदी ने बताया कि श्री रघुकुल विद्यापीठ में आज यूनियन की ओर से जिले के मेधावी छात्र छात्राओं का प्रतिभा मूल्यांकन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। जिले की टाप टेन की मेरिट में स्थान बनाने वाले हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट के 10-10 छात्र छात्राओं ने अपना पंजीकरण कराया था। आज कार्यक्रम में हाईस्कूल के 9 तथा इण्टरमीडिएट के 8 छात्र छात्राओं ने शिरकत की। द्विवेदी ने बताया कि प्रतिभा मूल्यांकन के नाम पर इन सभी बच्चों से 100 अंकों के अधिकांश ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे, जो उनके पिछली परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए थे। सभी अभिभावकों को बाहर करके पत्रकारों ने अपनी देखरेख में बच्चों की 15 मिनट की परीक्षा ली तो सच्चाई सामने आ गई। टाप टेन की सूची में स्थान बनाने वाले कई बच्चे तो फेल हो गए।

द्विवेदी ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा में 94.5 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली रागिनी पाण्डेय को प्रतिभा मूल्यांकन में 44 प्र्रतिशत अंक मिले। इसी प्रकार 90.4 प्रतिशत अंक पाने वाला इण्टर मीडिएट का टापर सत्यब्रत तो फेल हो गया। उसे मात्र 16 प्रतिशत अंक मिले। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि रागिनी तथा सत्यब्रत दोनों के पिता उन्हीं स्कूलों में शिक्षक हैं जहां इन बच्चों ने बोर्ड की परीक्षा दी थी। हाईस्कूल की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक पाकर जिले में दूसरा स्थान पाने वाली छात्रा स्वाती शुक्ला के पिता भी जनता इण्टर कालेज इटियाथोक में शिक्षक हैं और इस छात्रा का परीक्षा केन्द्र भी यहीं था। राकेश शुक्ला की बड़ी बेटी दीक्षा शुक्ला ने भी 86.8 प्रतिशत अंक पाकर इण्टरमीडिएट की परीक्षा में जिले में 12 स्थान हासिल किया है। उसका भी परीक्षा केन्द्र इसी विद्यालय में था। दीक्षा की चचेरी बहन मधु शुक्ला ने इण्टर मीडिएट की मेरिट में जिले में दसवां स्थान हासिल किया है। उसके पिता भी इसी कालेज में लिपिक हैं। इस प्रकार से एक ही परिवार की तीन लड़कियों का जिले की टाप टेन की मेरिट में स्थान बनाना कहीं न कहीं उन परिस्थितियों में संदिग्ध अवश्य प्रतीत होता है, जब उनके पिता वहीं पर कर्मचारी हों। ये तीनों बहनें आज बीमार होना बताकर पुरस्कार लेने नहीं पहुंची।

93.6 प्रतिशत अंक के साथ हाईस्कूल की परीक्षा में जिले में तीसरा स्थान लाने वाली राधा शुक्ला तथा 93.1 प्रतिशत अंक के साथ जिले में चौथा लाने वाली आकांक्षा पाठक को 48-48 प्रतिशत अंक मिले। 92.8 प्रतिशत अंक के साथ जिले में पांचवां स्थान बनाने वाली स्वाती सिंह बिसेन को 60 प्रतिशत तथा 92.5 प्रतिशत अंक के साथ जिले में छठां स्थान लाने वाली अनामिका सिंह को मात्र 20 प्रतिशत अंक मिले। 92 प्रतिशत अंक पाने वाले प्रशान्त पाण्डेय को 68 प्रतिशत, 91.5 प्रतिशत अंक पाने वाले दीपक मिश्रा को 72 प्रतिशत, 91.3 प्रतिशत अंक पाने वाली प्रगति मिश्रा को 64 प्रतिशत तथा 90.6 प्रतिशत अंक पाने वाले अखिलेश सिंह को 72 प्रतिशत अंक मिले।

इसी प्रकार इण्टर मीडिएट की मेरिट सूची में 88.7 प्रतिशत अंक पाकर जिले में  दूसरा स्थान लाने वाली साधना सिंह पुत्री राम नरायन सिंह को 24 प्रतिशत अंक तथा 88.5 प्रतिशत अंक के साथ जिले में चौथा स्थान लाने वाली साधना सिंह पुत्री बृजेश सिंह को मात्र 08 प्रतिशत अंक मिले। फखरुद्दीन अली अहमद राजकीय इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य राम सिंह ने अपने पुत्र अंशुमान कुमार का पंजीकरण अपने कालेज के बजाय जिले के दूरस्थ कालेज राम करन चौधरी इण्टर कालेज केशव नगर ग्रण्ट में करवा रखा था। बोर्ड की परीक्षा में उसने 88.5 प्रतिशत अंक प्राप्त करके जिले की मेरिट लिस्ट में पांचवां स्थान प्राप्त किया जबकि आज के प्रतिभा मूल्यांकन में उसे मात्र 40 प्रतिशत अंक मिले। बहराइच जिले के बिशेश्वर गंज की मूल निवासी सुरभि मौर्या श्री गांधी विद्यालय इण्टर कालेज खरगूपुर में शिक्षक शरद शुक्ला द्वारा विशेश्वर गंज में संचालित कोचिंग में पढ़ाई करती है। उसका नामांकन शरद शुक्ला ने अपने स्कूल में करवा रखा था। उसने यहां से परीक्षा दिया और 87.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करके जिले की मेरिट में आठवें स्थान पर पहुंच गई किन्तु आज उसे केवल 36 प्रतिशत अंक मिले। इतने ही अंक पाकर पूनम जायसवाल  भी संयुक्त रूप से सातवें स्थान पर रही। पूनम को 28 प्रतिशत अंक मिले। 87.5 प्रतिशत अंकों के साथ आठवें स्थान पर रहने वाली रंजना सिंह को 32 प्रतिशत अंक मिले। 87 प्रतिशत अंक पाने वाले अखिलेश शुक्ला को 60 प्रतिशत अंक मिले। इस प्रकार से यूपी बोर्ड की परीक्षा में शीर्ष स्थान पर रहने वाले तमाम छात्र छात्राओं की न केवल वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो गया, बल्कि बोर्ड परीक्षा की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान भी लग गया है। प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल होने वाले सभी छात्र छात्राओं को उप निदेशक सूचना रवि कुमार तिवारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के के श्रीवास्तव ने प्रमाणपत्र, बैग, डिक्शनरी आदि देकर सम्मानित किया।

अपने सांसद और डीएम तक को नहीं जानते गोण्डा के मेधावी

गोण्डा। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद द्वारा संचालित हाईस्कूल व इण्टमीडिएट की परीक्षाओं में जिले की मेरिट लिस्ट में टाप टेन में स्थान बनाने वाले अधिकांश मेधावी अपने सांसद और जिलाधिकारी तक का नाम नहीं जानते हैं। इसका खुलासा कल रधुकुल विद्यापीठ में उप्र0 श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा मेधावी छात्र छात्राआंे को सम्मानित किए जाने के अवसर पर आयोजित प्रतिभा मूल्यांकन के दौरान हुआ।

यूनियन के जिला महामंत्री जानकी शरण द्विवेदी ने बताया कि प्रतिभा मूल्यांकन के दौरान हाईस्कूल तथा इण्टर मीडिएट के टाप टेन में स्थान बनाने वाले कुल 17 छात्र छात्राओं ने शिरकत की। इन प्रतिभावान बच्चों से बहुविकल्पीय 25-25 प्रश्न पूछे गए थे। अधिकांश बच्चे प्रश्नांे का सही उत्तर न दे सके। द्विवेदी ने बताया कि हाईस्कूल की टाप टेन सूची में नाम लाने वाले 9 छात्र छात्राआंे में केवल तीन भारतेन्दु युग का सही कार्यकाल बता सके। एकमात्र छात्र ने रहीम को कवि के साथ ही बीर योद्धा होने के विकल्प को सही बताया। अधिकांश छात्रों ने महाराणा प्रताप के नाम के सामने सही का निशान लगाया। बैंक के खोले जा सकने वाले खातों के प्रकार को केवल दो छात्र सही बता सके। इसी प्रकार जोंक शब्द की अंग्रेजी भी दो छात्र ही बता पाए। केवल चार बच्चे ही यह बता सके कि राप्ती नदी गोण्डा में नहीं बहती है। कई छात्रांे ने घाघरा तथा कुछ ने सरयू को जिले में न बहना बताया। केवल पांच छात्र ही यह जानते हैं कि वर्तमान में गोण्डा के जिलाधिकारी अभय हैं। कुछ छात्रों ने राम बहादुर तो कुछ ने डा0 रोशन जैकब का नाम लिखा है। स्वामी नरायन मंदिर के छपिया कस्बे में स्थित होने की जानकारी भी केवल पांच बच्चों को है। केवल दो छात्र यह जानते हैं कि बेनी प्रसाद वर्मा गोण्डा के सांसद हैं।

इसी प्रकार इण्टरमीडिएट के चार छात्र ‘ब्राम्हण’ पत्र के सम्पादक का सही नाम बता पाए। ‘अशोक के फूल’ रचना की विधा को केवल तीन छात्र ही बता सके। शशधर व शशिधर शब्द का अर्थ केवल एक छात्र बता पाया। कमल शब्द का सही पर्यायवाची भी केवल एक छात्र बता सका।’मेक हे ह्वाइल द सन शाइन्स’ मुहावरे का सही अर्थ एक भी बच्चा नहीं बता सका। बीते 24 जून को गोण्डा जिले की कितनी नगर पालिका व नगर पंचायतों के लिए मतदान हुआ? इस सवाल का सही जवाब भी केवल एक छात्र दे सका। उत्तर प्रदेश में जिलों की सही संख्या भी केवल एक छात्र बता सका। इस प्रकार से यह साबित हो रहा है कि बोर्ड परीक्षा में शीर्ष स्थान पर पहुंचने वाले टापर्स अपने दम पर वहां तक नहीं पहुंचे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से इसमें उनके अभिभावकों का भी बहुत बड़ा योगदान है।

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