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गंगा बचाओ आंदोलन सरकारी साधुओं और सरकारी पर्यावरणविदों का है

: आंदोलन हुआ तो उत्‍तराखंड सरकार गिर जाएगी : पनबिजली प्रोजेक्ट पर केंद्र का दखल बर्दाश्त नहीं – जनमंच : प्रधानमंत्री द्वारा स्वामी स्वरुपानंद के पास वार्ताकार भेजे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तराखंड जनमंच ने कहा कि जिन प्रोजेक्टों को पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है उन पर केंद्र सरकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनमंच ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार नदियों पर उत्तराखंड के संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश कर रही है। जनमंच ने कहा कि कांग्रेसी शंकराचार्य स्वरुपानंद और राजेंद्र सिंह की सक्रियता से जाहिर है कि केंद्र इन दोनों को आगे कर उत्तराखंड के हितों को दूरगामी नुकसान पहुंचाना चाहता है। जनमंच ने कहा है कि यदि उत्तराखंड की जनता सन् 1994 की तरह एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी तो राज्य की कांग्रेस सरकार गिर जाएगी।

: आंदोलन हुआ तो उत्‍तराखंड सरकार गिर जाएगी : पनबिजली प्रोजेक्ट पर केंद्र का दखल बर्दाश्त नहीं – जनमंच : प्रधानमंत्री द्वारा स्वामी स्वरुपानंद के पास वार्ताकार भेजे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तराखंड जनमंच ने कहा कि जिन प्रोजेक्टों को पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है उन पर केंद्र सरकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनमंच ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार नदियों पर उत्तराखंड के संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश कर रही है। जनमंच ने कहा कि कांग्रेसी शंकराचार्य स्वरुपानंद और राजेंद्र सिंह की सक्रियता से जाहिर है कि केंद्र इन दोनों को आगे कर उत्तराखंड के हितों को दूरगामी नुकसान पहुंचाना चाहता है। जनमंच ने कहा है कि यदि उत्तराखंड की जनता सन् 1994 की तरह एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी तो राज्य की कांग्रेस सरकार गिर जाएगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा स्वामी स्वरुपानंद से बातचीत करने के लिए प्रधानंमत्री कार्यालय से दूत भेजे जाने और राजेंद्र सिंह और जीडी अग्रवाल को इंटरमिनिस्ट्रीयल कमेटी में मनोनीत किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तराखंड जनमंच के प्रमुख महासचिव राजेन टोडरिया ने आरोप लगाया है कि गंगा बचाओ आंदोलन को कांग्रेस और केंद्र का संरक्षण प्राप्त है। केंद्र सरकार ने गंगा नदी पर कब्जा करने के लिए एक साजिश के तहत शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती और राजेंद्र सिंह को आगे कर गंगा बचाओ आंदोलन की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जिंदगी भर कांग्रेसी रहे हैं और राजेंद्र सिंह भी सरकारी पर्यावरणविद ही माने जाते हैं। इसीलिए वह अन्ना आंदोलन से हट गए थे। उन्होंने कहा कि ये दोनों कट्टर कांग्रेसी ही गंगा बचाओ आंदोलन के सूत्रधार हैं। जनमंच के प्रमुख महासचिव ने कहा कि मनमोहन सिंह गंगा को लेकर नरम हिंदुत्व की उसी तरह की राजनीति कर रहे हैं जिस तरह से नरसिंह राव ने बाबरी मस्जिद को लेकर की थी।

उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के बुनियादी हितों के खिलाफ चलने वाले आंदोलनों को संरक्षण दे रही है। केंद्र सरकार ऐसे आंदोलन के नेताओं से बात कर उन्हें बढ़ावा दे रही है जिनका कोई जनाधार नहीं है। जाहिर है कि गंगा बचाओ आंदोलन साधुओं का नहीं बल्कि सरकारी साधुओं और सरकारी पर्यावरणविदों का है। उन्होंने कहा है कि जितने भी एनजीओ इस आंदोलन में हैं उन सबको केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से भारी मात्रा में पैसा मिला है और ये एनजीओ केंद्र की ही मदद पर टिके हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो केंद्र सरकार अपनी एनफोर्समेंट एजेंसियों के जरिये उत्तराखंड में 105 करोड़ रुपए की सालाना विदेशी फंडिंग की जांच कराती।

राजेन टोडरिया ने कहा कि केंद्र सरकार परमाणु ऊर्जा को लेकर अमेरिकी दबाव में है और इसलिए उसने सरकारी सहायता प्राप्त पर्यावरणविदों और साधुओं को पनबिजली प्रोजेक्टों के खिलाफ खड़ा कर दिया है। जनमंच ने आगाह किया है कि नरसिंह राव के रास्ते पर पर जा रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यदि गंगा बचाओ आंदोलन को संरक्षण देना बंद नहीं किया तो उत्तराखंड में जनता पूरी तरह से कांग्रेस के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने 1994 जैसी भूल की तो इसकी कीमत उसे उत्तराखंड में अपनी सरकार की बलि देकर चुकानी होगी। राज्य के जल संसाधनों और रोजगार के खिलाफ केंद्र और धार्मिक कट्टरवादियों की इस साजिश को बेनकाब करने के लिए उत्तराखंड जनमंच अगले दो महीनों तक गांव और इंटर कालेज स्तर तक पर्चे-पोस्टर और फोल्डर बांटकर जनमत तैयार करेगा। ताकि राज्य में उत्तराखंड आंदोलन जैसा एक बड़े आंदोलन की जमीन तैयार की जा सके।

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