Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

राजनीति के रजवाड़े : न वीर रहे ना भद्र

धन दौलत की माया बडी विचित्र होती है। यह बड़े-बड़े राजे रजवाड़ों को भी न तो वीर बना रहने देती है और न भद्र। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र के मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके वीरभद्र सिंह पर अदालत में तय हुए भ्रष्टाचार के आरोपों से यह साबित हो चुका है। कहा जाता है कि सच्चे अर्थों में वीर वही है जो अनुचित और अनैतिक तरीकों से धन पाने की लालसा से अपने आप को बचा कर अपने चरित्र की भद्रता को बचाए रखे। अफसोस कि वीरभद्र इस कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। राजपरिवारों के लोगों के भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी बनने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले छत्तीसगढ के एक राजपरिवार के जूदेव का वह चरित्र भी सबने देखा था, जिसमें वह एक नेता के रूप में अभिनेता की तरह नोटों की गडि्डयों को चूमते हुए अपना पुरुषार्थ बयां कर रहे थे कि पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा से कम नहीं।

धन दौलत की माया बडी विचित्र होती है। यह बड़े-बड़े राजे रजवाड़ों को भी न तो वीर बना रहने देती है और न भद्र। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र के मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके वीरभद्र सिंह पर अदालत में तय हुए भ्रष्टाचार के आरोपों से यह साबित हो चुका है। कहा जाता है कि सच्चे अर्थों में वीर वही है जो अनुचित और अनैतिक तरीकों से धन पाने की लालसा से अपने आप को बचा कर अपने चरित्र की भद्रता को बचाए रखे। अफसोस कि वीरभद्र इस कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। राजपरिवारों के लोगों के भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी बनने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले छत्तीसगढ के एक राजपरिवार के जूदेव का वह चरित्र भी सबने देखा था, जिसमें वह एक नेता के रूप में अभिनेता की तरह नोटों की गडि्डयों को चूमते हुए अपना पुरुषार्थ बयां कर रहे थे कि पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा से कम नहीं।
कमोबेश दोनों ही मामलों में राजपरिवारों की पृष्ठभूमि वाले कद्दावर राजनेताओं को अपनी कुर्सी और सामाजिक, राजनीतिक व शाही साख गंवानी पडी है। भले ही देश के आजाद होने पर रियासतें खत्म हो चुकी हैं और प्रिवीपर्स एक्ट के तहत शाही उपाधियों का उन्मूलन किया जा चुका है पर जूदेव को छत्तीसगढ़ में एक राजनेता से ज्यादा राजा का सम्मान प्राप्त था। इसी शाही साख की बदौलत उन्होंने लंबे समय तक अपनी राजनीति चमकाई। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के 5 बार सीएम रहे और 6 बार लोकसभा के लिए चुने गए वीरभद्र भी राजपरिवार के हैं, वे 13 साल की नाबालिग उम्र में राजा बनाए गए थे। उन पर 1989 में हिमाचल प्रदेश के सीएम रहते अपनी पत्नी प्रतिभा सिंह और एक आईएएस मोहिंदर लाल के साथ मिलकर कारोबारियों से घूस लेने के आरोप लगाए गए हैं। भ्रष्टाचार का यह मामला कानून की दृष्टि से भले ही अन्य लोगों पर चलाए जाने वाले प्रकरणों की तरह हो पर यदि इसे राजघरानों की पृष्ठभूमि वाले राजनेताओं पर आरोपों के नजरिए से देखा जाए तो राजा या रंक वाली स्थिति सामने नजर आती है। देखा जाए तो देश में राजे रजवाड़ों के शासन खत्म होने के बाद भी देश के अनेक हिस्सों में पूर्व राजा महाराजाओं को जनता के द्वारा राजा जैसा सम्मान मिलता रहा है। जनता की इसी भावना की बदौलत वे आसानी से सत्ता में आते रहे और लोकतंत्र में भी प्रजा के बीच राजा जैसा रूतबा कायम रख सके।

राजपरिवारों को लेकर हमेशा आम जनता में यह धारणा रही है कि उनके पास विरासत में मिली अकूत धन संपदा हमेशा रही है। उनकी छवि ऐसी रही है जिन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं। लेकिन इन पूर्व शासकों या पूर्व शासक परिवारों के लोग जब किसी से रिश्वत लेते सीडी में कैद किए और दिखाए जाते हैं, तो जनता के बीच इनकी स्थिति राजा के बजाय रंक साबित होती है। प्रश्न उठता है कि क्या राजा महाराजाओं के ये वंशज इतने गरीब हो चुके हैं या फिर इनका जमीर मर चुका है कि इन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाने की जरूरत पड़ती है। यह मामले भ्रष्टाचार के तो हैं ही साथ ही जनता के विश्वास का गला घोंटने वाले भी हैं। उस विश्वास का गला घोंटने वाले जो आम आदमी को यह भरोसा दिलाता था कि ये राजे महाराजे हैं, इन्हें धन की नहीं मान की जरूरत है अतः ये भ्रष्टाचार नहीं करेंगे।

लेखक अजय खरे पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...