रायगढ़। दंतेवाड़ा में शहीद हुए जशपुर जिले के दो जवानों के शव लाते समय रायगढ़ में एम्बुलेंस खराब हो गई। पांच घंटे तक यह एम्बुलेंस रायगढ़ के ट्रांसपोर्ट नगर अमलीभौना के पास खड़ी रही लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल सकी। अंतत: शव के साथ आ रहे पुलिस कर्मियों द्वारा इसकी सूचना दंतेवाड़ा पुलिस को दी गई, जिनकी पहल के बाद भी स्थानीय प्रशासन नहीं जागा। यह खबर इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रसारित होने के बाद पुलिस और प्रशासन की नींद खुली। तब जाकर आनन-फानन में दूसरी एम्बुलेंस की व्यवस्था कर शवों को जशपुर रवाना किया गया। पांच घंटे तक शहीदों के शव का यह अपमान रायगढ़ के कुछ तथाकथित समाजसेवी देखते रहे, लेकिन किसी ने भी इस मामले में पहल करने की जहमत नहीं उठाई। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा ने डीएसपी उनेजा खातुन के नेतृत्व में एक टीम घटित कर बुधवार तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा के किरंदुल-पालनार मार्ग से जा रही बोलेरो गाड़ी से सर्चिंग पर जा रहे जवानों के एक दल को लैंड माईन से उड़ा दिया गया था। इस घटना में 4 पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे। इनमें दो पुलिस कर्मी जशपुर जिले के भी थे। जिनके शवों को एम्बुलेंस में जशपुर के लिये रवाना किया गया था। शहीद लक्ष्मण भगत (बैच क्रमांक 1280 निवासी महुआटोली जशपुर) व अलसन एक्का (बैच क्रमांक 1049 निवासी गड़ला जशपुर) के साथ उनके परिजन भी एम्बुलेंस से जशपुर जा रहे थे। इसी दौरान आज सुबह साढ़े 4 बजे यह एम्बुलेंस खराब हो गई। चालक के मुताबिक एम्बुलेंस के डीजल सप्लाई में व्यवधान आने पर एम्बुलेंस बंद हो गई थी। उन्होंने अमलीभौना के आसपास के कुछ मेकेनिको को दिखाया लेकिन यह गाड़ी नहीं सुधर सकी। अंतत: इसकी सूचना उन्होंने रायगढ़ पुलिस कंट्रोल रूम को दी, लेकिन घंटों तक इंतजार के बावजूद न तो पुलिस का कोई कर्मचारी, अधिकारी वहां पहुंचा और न ही प्रशासन ने उनकी सुध ली।
सुबह साढ़े 4 बजे से 10 बजे तक वे शहीदों के शव लेकर गाड़ी बनवाने अथवा नई गाड़ी की व्यवस्था के लिए इधर-उधर संपर्क करते रहे। इस दौरान मौके पर कई समाजसेवी भी पहुंच गये थे लेकिन किसी ने भी सहयोग की पहल नहीं की। उधर मामले की जानकारी स्थानीय मीडिया कर्मियों को भी मिल गई थी, जिन्होंने इसे प्रमुखता से अपने-अपने चैनलों में प्रसारित किया, तब जाकर पुलिस व प्रशासन की तंद्रा भंग हुई। बताया जा रहा है कि सारंगढ़ नक्सलियों की आमद के मद्देनजर रायगढ़ की पुलिस सर्चिंग अभियान पर निकली थी, जिससे इस गंभीर मामले को भी गंभीरता से नहीं लिया जा सका। चैनलों में खबर चलने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक व आरआई प्रमोद गुप्ता ने पहल करते हुए पुलिस जवानों को मौके पर जाकर व्यवस्था संभालने का आदेश दिया लेकिन तब तक रेडक्रास दवा दुकान के प्रबंधक मुकेश शर्मा को इसकी जानकारी मिल गई थी और उन्होंने एक एम्बुलेंस की व्यवस्था कर शहीदों के शव को जशपुर के लिए रवाना कर दिया था।
शहीद अलसन एक्का के परिजनों ने बताया कि वे पिछले पांच घंटों से लगातार स्थानीय पुलिस व प्रशासन के लोगों से संपर्क कर सहयोग की अपील कर रहे थे लेकिन किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली। उनका साफ कहना था कि देश और समाज के लिए अपनी जान देने वाले उनके परिजनों के शव के साथ इस तरह का खिलवाड़ काफी दुखद है। परिजनों ने रोते हुए बताया कि इन पांच घंटों के दौरान स्थानीय लोग भी यहां मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी उनका सहयोग करने का प्रयास नहीं किया। बहरहाल शहीदों के अपमान का यह कोई पहला मामला नहीं है कल शहीदों के शव को कचरा गाड़ी में ढोकर लाया गया था। अब लगता है कि सरकार पुलिस कर्मियों की जिंदगी तो बचा नहीं पा रही। अब उनके शवों का सम्मान करना भी उसे गंवारा नही।
प्रवीर जय सिंह की रिपोर्ट.


