आजकल राष्ट्रपति चुनाव की काफी गहमा गहमी चल रही है..गरमियों का दिन है और मानसून न आने से दिल्ली झुलस रही है…ऐसे में आपको हम ले चलते हैं राष्ट्रपति भवन के मुगल मार्डन में..यहां का हाल-चाल जानते हैं.. इससे आपको कुछ सुकून मिलेगा मैं ऐसा मानता हूं…इसका लान प्रणब मुकर्जी को बहुत भाता है..उम्मीद यही है कि वे ही राष्ट्रपति भवन पहुंचने जा रहे हैं… मुगल गार्डन राष्ट्रपति भवन का खास आकर्षण है जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग आते है.. मुगल गार्डन की देखरेख के लिए 65 से ज्यादा माली लगे हैं। यहां 110 विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पौधे, 200 गुलाब प्रजातियां और कई सुंदर रंग-बिरंगे फूल हैं। साथ ही यहां के वातावरण को 300 से ज्यादा मोर, करीब तीन दर्जन हिरण, सैकड़ो बतखें तथा कई तरह के पक्षी बेहद खूबसूरत बना देते हैं।
राष्ट्रपति भवन में वैसे तो तीन बाग है। ये 15 एकड़ में फैले हुए हैं। पहला मुख्य बाग है और दूसरे को लंबा बाग कहते हैं। यह बाग छह हेक्टेयर में फैला है। इसी तरह गोल रचना वाले तीसरे बाग में बीचों-बीच गोल झरना बना हुआ है। इन बागों में घूमते हुए दुनिया के बहुत सारे रंग देखे जा सकते हैं। यहां कुछ पेड़ दशकों पुराने हैं। वैसे तो राष्ट्रपतियों के अपने-अपने शौक रहे हैं जिसके नाते ये बाग और संपन्न होते रहे। 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पहल पर आध्यात्मिक उद्यान, संगीतमय उद्यान, जैव विविधता उद्यान, हर्बल उद्यान और न्यूट्रिशियन उद्यान खड़ा करने के साथ कई नए प्रयोग हुए। उनकी बागवानी में भी बहुत रूचि थी। लेकिन उनके पहले राष्ट्रपति रहे के.आर. नाराय़णन की पत्नी श्रीमती ऊषा नारायणन ने भी काफी पुष्प प्रजातियों से इस बाग को संपन्न बनाया। उनको भी बागवानी का खास शौक था। गुलाबी, लाल और नीला यूरोपीय फूल टुलिप उनके ही नाते यहां स्थान पा सका। इसके पौधे नीदरलैंड के प्रधानमंत्री विम कोक ने उनको भेंट किए थे। यहां पर पहले ही बरसात में खिलने वाला फूल हेलकोनिया, 250 गुलाब और 80 तरह के अन्य फूल मौजूद रहे हैं। आर वेंकट रमण जब राष्ट्रपति बने तो उनके सुझाव पर मुगल गार्डन के दक्षिणी भाग में वुड लैंड की स्थापना की गयी और इसमें 700 नए पेड़ लगाए गए साथ ही शेर, हाथी, हिरण और जिराफ जैसे जंगली जानवर बनाए गए। टेपियरी उद्यानकला के ये सुंदर नमूने हैं। इस शैली में कई झाडियों और विभिन्न पौधे या बौने पेड़ों को जानवरों का आकार दिया जाता है। उनके सुझाव पर एक कैक्टस गार्डन की भी नींव रखी गयी थी।
यह बाग दरअसल भारत के वायसराय की पत्नी लेडी हार्डिंग की देन है। उनको कश्मीर के बगीचे बहुत पसंद थे। खास तौर पर श्रीनगर के विख्यात मुगल शैली के बाग। वे वैसा ही बगीचा यहां भी चाहती थीं। तब दिल्ली की रूपरेखा बना रहे लुटियन ने लेडी हार्डिंग के अनुरोध पर उनके आवास में ही सुंदर बाग लगाने की योजना बनायी। इस को मुगल और ब्रिटिश शैली में साकार किया गया। इसके सीमांकन और रंग चयन में उद्यान वैज्ञानिक एस.आर. मुस्टो की मदद ली गयी। लेकिन जहां ये बाग हैं वहां पहले पहाड़ी काफी हुआ करती थी। तबसे अब के बीच बागों में कई तरह के बदलाव आए हैं। मुख्य बाग में शानदार नहर के साथ कमल के आकार के छह फव्वारे और दो विशालकाय लान हैं। यह बाग मुख्य भवन के पिछवाड़े है जिसमें केंद्रीय भाग
वर्गाकार है और उसमें बलुए पत्थर की पट्टियां लगी हुई हैं। इसमें तमाम दुर्लभ पेड़ और झाडिय़ां हैं। इसके सेंट्रल लान मे हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को एट होम होता है। इसमें 4000 तक मेहमान आते हैं। मुगल गार्डन की देखरेख का काम 418 माली करते हैं। यहां 250 गुलाब प्रजातियों के टेरेस वाल से लगे क्षेत्र में रात रानी, मोंगरा, मोतिया, जूही, हारसिंगार और बहुत कुछ है। यहां बागों की खास देख रेख तो होती ही है, जुलाई- अगस्त माह में खास तैयारी की जाती है और कई विशेषज्ञों की सेवाएं भी इस काम में ली जाती हैं। यहां के बाकी हिस्से तो आम आदमी के लिए नहीं खुले हैं लेकिन मुगल गार्डन हर साल 14 फरवरी से 14 मार्च के बीच आम लोगों के लिए 10 से 4 बजे तक खोला जाता है। इस दौरान यह रख रखाव के लिए सोमवार को बंद रहता है।
लेखक अरविंद कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और चैनलों में काम कर चुके हैं. इन दिनों राज्य सभा टीवी में उच्च पद पर कार्यरत हैं.


