Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

दुख-सुख

सिरपुर वालों की कोशिशों से यहां दुर्लभ पक्षी दोबारा आने लगे हैं

इंदौर। सिरपुर की कहानी सिर्फ एक तालाब की नहीं, पूरे इंदौर की है। लोगों की कोशिशों से वहां दुर्लभ पक्षी दोबारा आने लगे हैं। मध्यप्रदेश के लोगों में अपनी धरती को लेकर प्यार है। यह देश के सभी लोगों के लिए मोटिवेशन का काम करेगा। सोच में बदलाव आने से ही एनवायर्नमेंट बचाया जा सकेगा। पर्यावरणविद् और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की डायरेक्टर सुनीता नारायण अपने इन्हीं विचारों के साथ सोमवार को शहर में थीं। वे यहां संस्था द नेचर वॉलंटियर्स की किताब ‘बर्ड्स ऑफ सिरपुर’ के विमोचन के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि सिरपुर के बारे में पहले जब उन्होंने सुना तब उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि वहां वाकई में दुर्लभ पक्षी लौटने लगे होंगे। जब सिरपुर तालाब के बारे में और जाना तो काफी गर्व महसूस हुआ। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंदौरवासी जब अपनी सोच में बदलाव लाएंगे, तो यह मॉल का शहर नहीं, बल्कि घरों और हरियाली वाला शहर बनेगा।

इंदौर। सिरपुर की कहानी सिर्फ एक तालाब की नहीं, पूरे इंदौर की है। लोगों की कोशिशों से वहां दुर्लभ पक्षी दोबारा आने लगे हैं। मध्यप्रदेश के लोगों में अपनी धरती को लेकर प्यार है। यह देश के सभी लोगों के लिए मोटिवेशन का काम करेगा। सोच में बदलाव आने से ही एनवायर्नमेंट बचाया जा सकेगा। पर्यावरणविद् और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की डायरेक्टर सुनीता नारायण अपने इन्हीं विचारों के साथ सोमवार को शहर में थीं। वे यहां संस्था द नेचर वॉलंटियर्स की किताब ‘बर्ड्स ऑफ सिरपुर’ के विमोचन के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि सिरपुर के बारे में पहले जब उन्होंने सुना तब उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि वहां वाकई में दुर्लभ पक्षी लौटने लगे होंगे। जब सिरपुर तालाब के बारे में और जाना तो काफी गर्व महसूस हुआ। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंदौरवासी जब अपनी सोच में बदलाव लाएंगे, तो यह मॉल का शहर नहीं, बल्कि घरों और हरियाली वाला शहर बनेगा।

 

सुनीता नारायण ने कहा कि अब जब भी शहर बनाएं, फ्लाईओवर नहीं, फुटपाथ की सोचें। यह नहीं सोचें कि शहर की सड़कें कैसे बनाई जाएं, बल्कि ये सोचें की ग्रीनरी कैसे लाई जाए। इंदौर जब ऐसा करेगा, तो बाकी शहर इससे सबक लेंगे। सुश्री सुनीता ने कहा कि खान नदी को बचाया जाना चाहिए। बर्डस ऑफ सिरपुर के विमोचन के मौके पर मुख्य अतिथि सांसद सुमित्रा महाजन थीं। अध्यक्षता महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने की।

द नेचर वॉलंटियर्स के उपाध्यक्ष और दैनिक भास्कर समूह के मराठी अखबार दिव्य मराठी के संपादक अभिलाष खांडेकर ने कहा कि सिरपुर तालाब को बचाने की मेहनत रंग ला रही है। स्वागत भाषण में उन्होंने बताया कि जो फ्लैमिंगो बर्ड 1980 में इंदौर में दिखने के बाद गायब हो गए थे, वे आज लौट आए हैं। इस मौके पर मध्यप्रदेश ईको टूरिज्म बोर्ड के सीईओ ए.के. भट्टाचार्य ने सिरपुर तालाब की लगातार निगरानी करने और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का सुझाव दिया। कार्यक्रम में किताब के छायाकार भालू मोंढे मौजूद थे। किताब में सिरपुर में आने वाले 130 पक्षियों के बारे में बताया गया है। आभार कौस्तुभ ऋषि ने माना।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...