जौनपुर : वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में लगभग २ साल पहले एक सेवानिवृत शिक्षक कुलपति बनता है. जिस दिन कुलपति का कार्यभार ग्रहण करता है उसके पहले अपना पूरा शरीर दान कर देता है. विश्वविद्यालय के लोग कुलपति बने प्रो सुन्दर लाल के बारे में पता लगाने लगते हैं कि कैसा शख्स है ये. जब पता चलता है एक ऐसा व्यक्ति कुलपति बना है जो दबाव में काम नहीं करता, जिद्दी है और सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि बहुत ईमानदार है, बस तब क्या था, शिक्षा माफियाओं में भूचाल आ गया और जो आज तक शांत नहीं हुआ है.
विश्वविद्यालय में लम्बे समय से नंबर बढाने के खेल से सब वाकिफ हैं. हर तरह के नंबर पाने के लिए छात्रों से मोटी रकम शिक्षा माफियाओं द्वारा वसूली जाती थी और वो मनचाहा नंबर भी पा जाते थे. परीक्षा प्रारंभ होने के एक दिन पहले तक महाविद्यालय वाले जो चाहते थे लक्ष्मी की कृपा से करा लेते थे. कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने इन सारी व्यवस्था में सुधार के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरवाने का निर्णय लिया जिससे मानो भूचाल मच गया. जरा सोचिये जब हाई स्कूल पास करने वाले टैबलेट और इंटर वाले लैपटॉप चलाएंगे तो ऐसे में अगर यह व्यवस्था हुई तो विरोध क्यों हुआ? जवाब शयद किसी के पास न हो लेकिन जानते सब हैं.
नई मूल्यांकन व्यवस्था के तहत कुलपति ने सभी पुस्तिकाओं की कोडिंग कराई. जिससे मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो. मूल्यांकन के बाद परीक्षकों को ओएमआर सीट दी गई जिस पर काले या नीले रंग के बाल पेन से भरना था. एक महाविद्यालय के शिक्षक की माने तो मूल्यांकन में लगे शिक्षकों का भी नजरिया इस व्यवस्था के प्रति सकारात्मक नहीं था और उन्हें ये काम बहुत उबाऊ लगा. बहुत सारे लोगों ने पेन की जगह स्केच का प्रयोग किया जिससे नंबर एंट्री कराने में भारी परेशानी हुई. पूरी सीट के नंबरों को टाइप करना पड़ा जिससे अधिक समय लगा. शिक्षकों के व्यवहार का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि ओएमआर सीट न भरना पड़े इसके लिए उसमें कोई न कोई गड़बड़ी कर दी जिसके कारण सामान्य सीट पर भरना पड़े. इस कृत्य के लिए कई को चेतावनी भी दी गई.
ओएमआर सीट पर पिन और स्टेपल लगा दिया गया जिसके कारण कुलपति द्वारा बनवाई गई हाई सिक्यूरिटी कोडिंग प्रक्रिया की हवा निकालनी शुरू हो गई. छात्र हित में सही और पारदर्शी मूल्यांकन की चुनौती भी सामने थी. जब इन सब गड़बड़ियों की जानकारी कुलपति को हुई तो उन्होंने तत्काल अतरिक्त कर्मचारियों और अधिकारियों को लगाया. विभिन्न स्तर पर हुई लापरवाही के बाद भी ९० प्रतिशत रिजल्ट विश्वविद्यालय द्वारा निकाल दिया गया. बहुत जल्दी ही मूल्यांकन में की गई गड़बड़ियों में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी नजर आएगी, ऐसा विश्वविद्यालय सूत्रों से पता चला है.
भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कुलपति द्वारा उठाये गए कदम की सराहना हो रही है लेकिन लोगों को उम्मीद है कि अगली बार सब ठीक हो तो कुछ ज्यादा बात बनेगी. पूर्वांचल विश्वविद्यालय पूरे देश में अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है जिसने अपने कार्यसमिति में भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए छात्र छात्राओं को स्टिंग ऑपरेशन करने की अनुमति दी है. छात्र स्टिंग करें, पैसा मांगने वाले की आवाज या वीडियो रिकॉर्ड कर लें, बस कार्रवाई के लिए इतना ही काफी है. इसके बाद तो समझिये बहुतों की नींद हराम हो गई. कुलपति के इन निर्णयों के खिलाफ कौन लोग हो सकते हैं, आप समझ सकते हैं .
समाज के गरीबों के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक अभिनव प्रयोग किया है. इसका नाम बापू बाजार है. यह बाजार गरीबों की सम्मान सहित सहायता करते हुए उन्हें २ से १० रुपए के प्रतीकात्मक मूल्य पर वस्तुएं उपलब्ध कराता है. अब तक ६० हजार गरीबों की सहायता हो चुकी है. गुमनामी के दौर में जी रहे लोक कलाकारों को भी विश्वविद्यालय याद कर रहा है. पूर्वांचल विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार के लिए जानने वालों को अब अपना नजरिया बदलना होगा और धीरे- धीरे ही सही हौले -हौले ही सही बदलाव हो रहा है.
जौनपुर से पत्रकार एससी सिंह की रिपोर्ट.
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