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कथा संग्रह ‘मिट्टी के लोग’ के लिए कथाकार एसआर हरनोट को जगदीश चन्द्र स्मृति पुरस्कार

चण्डीगढ़ :  दिनांक 6 अक्तूबर, 2012, प्रैस क्लब चण्डीगढ़ के सभागार में आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2012 के जगदीश चन्द्र स्मृति पुरस्कार की घोषण की गयी। इस वर्ष के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रख्यात कथाकार एस.आर. हरनोट को देने की घोषणा की गयी। यह पुरस्कार उनके कथा संग्रह ‘मिट्टी के लोग’ के लिए दिया गया है जो वर्ष 2010 में आधार प्रकाशन से प्रकाशित हुई है और चर्चा में बनी हुई है। पिछले दिनों इस संग्रह की एक कहानी ‘बेजुबान दोस्त‘ का अनुपम खेर के ‘राईटर्स प्रिपेयरस स्कूल मुम्बई‘ की ओर से ऐतिहासिक गेयटी थियेटर शिमला में सफल मंचन भी किया गया है।

चण्डीगढ़ :  दिनांक 6 अक्तूबर, 2012, प्रैस क्लब चण्डीगढ़ के सभागार में आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2012 के जगदीश चन्द्र स्मृति पुरस्कार की घोषण की गयी। इस वर्ष के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रख्यात कथाकार एस.आर. हरनोट को देने की घोषणा की गयी। यह पुरस्कार उनके कथा संग्रह ‘मिट्टी के लोग’ के लिए दिया गया है जो वर्ष 2010 में आधार प्रकाशन से प्रकाशित हुई है और चर्चा में बनी हुई है। पिछले दिनों इस संग्रह की एक कहानी ‘बेजुबान दोस्त‘ का अनुपम खेर के ‘राईटर्स प्रिपेयरस स्कूल मुम्बई‘ की ओर से ऐतिहासिक गेयटी थियेटर शिमला में सफल मंचन भी किया गया है।

 

यह पुरस्कार भारत के यशस्वी उपन्यासकार जगदीश चन्द्र की स्मृति में हर वर्ष किसी ऐसे साहित्यकार को दिया जायेगा, जो उनकी यथार्थवादी और प्रगतिगामी रचनाशीलता की परम्परा का विकास, अपने समय में करने के लिए प्रतिबद्ध हो। आधार प्रकाशन पंचकूला की ओर से इसी वर्ष जगदीश चन्द्र रचनावली का चार खण्डों में प्रकाशन हुआ है जो इस रचनाकार को स्थायी जनाधार प्रदान करने की दिशा में पहला कदम है। इसे उनकी स्मृति से जुड़े हर वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार के माध्यम् से और पुष्ट किया जायेगा तथा हर वर्ष 23 नवम्बर को उनके जन्मदिवस पर यह पुरस्कार विधिवत प्रदान किया जाता रहेगा। इस पुरस्कार के निर्णायक मण्डल में डा0 सेवा सिंह, डा0 विनोद शाही, डा0 सुभाष शर्मा और आधार प्रकाशन के संचालक और लेखक देश निर्मोही को शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पहला जगदीश चन्द्र स्मृति पुरस्कार पाने वाले एस.आर.हरनोट के अब तक छह कहानी संग्रह-पंजा, आकाशबेल, पीठ पर पहाड़, जीनकाठी, मिट्टी के लोग और आधार चयन कहानियां प्रकाशित हो चुके हैं। माफिया उनकी अंग्रेजी में 14 कहानियों का संग्रह है जिसका अनुवाद जानीमानी लेखिका और समाजसेवी व अनुवादक श्रीमती सरोज वशिष्ठ ने किया है। उनकी कहानियां अंग्रेजी सहित मराठी, मलयालम, उडिया, गुजराती, पंजाबी और भारत की कई अन्य भाषाओं में अनुवाद होकर प्रकाशित हो चुकी है। कई विश्वविद्यालय में उन पर शोध हुए हैं और हो रहे हैं। उनकी कहानियां केन्द्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और तिरूअनंतपुरम विश्वविद्यालय सहित कई अन्य कालेजों में पीएचडी, एम फिल तथा स्नात्तकोतर पाठ्यक्रम में शामिल है।

उनका एक उपन्यास हिडिम्ब एक अरसे से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका आकाशवाणी शिमला से भी श्रृख्लाबद्ध प्रसारण हो रहा है। इसके अतिरिक्त हरनोट की कई पुस्तकें हिमाचल के विविध विषयों पर भी प्रकाशित हो चुकी है। समाजसेवा के साथ उनका फोटोग्राफी में भी विशेष रूचि है। इस तरह यह लेखक पहाड़ी अंचल के जनजीवन का कुशल एवं मर्मज्ञ चितेरा है। अन्तराष्ट्रीय इंदुशर्मा कथा सम्मान, अखिल भारतीय पीसी जोशी जनप्रिय लेखक सम्मान, हिमाचल अकादेमी पुरस्कार सहित हरनोट को कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं। वे इन दिनों हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में उप महा प्रबन्धक के पद पर कार्यरत हैं।

पराग वैद्य,

संयोजक,

जगदीश चन्द्र समृति पुरस्कार समिति

प्रैस विज्ञप्ति

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