Chanchal Bhu : डॉ लोहिया अस्पताल में थे. दिन में जेपी की पत्नी और रात में जेपी अस्पताल में रहते थे. जनेश्वर मिश्रा गेट पर रहते थे. डॉ लोहिया को देखने तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी प्रति दिन जाती थीं. तमाम कोशिशों के बावजूद डॉ लोहिया को नहीं बचाया जा सका. विद्युत शवदाह गृह में डॉ लोहिया का पार्थिव शरीर जब रखा जाने लगा तो जेपी फफक के रो पड़े और एक ही वाक्य बोले ‘ मनोहर मुझसे दो साल छोटा था’ और वहीं जमीन पर बैठ गए.
जेपी एक बार और टूटे थे. बापू की ह्त्या के बाद जब शरीर चिता पर लिटा दिया गया और मुखाग्नि देते ही धू धू कर के जल उठा तो उस वक्त भी जेपी इसी तरह रोये थे बोले थे- अब क्या होगा? तब जेपी का सर डॉ लोहिया के कंधे पर था. अंतर कथा यह है कि गांधी अपने आख़िरी दिनों में समाजवादियों के सबसे ज्यादा नजदीक हो गये थे . बापू के जाने के बाद लोहिया और जेपी ने भारत की राजनीति में पुरुषार्थ को पाला पोसा. डॉ लोहिया ने अस्पताल में रहते हुए एक दिन प्रभावती जी से कहा था, मरने के पहले जेपी को एक बार जेल भेज देना. और जेपी जेल गए.
७७ में जब इंदिरा का शासन पलटा तो उस दिन भी जेपी रोये थे. इस बार वे अकेले नहीं थे. जेपी के कंधे पर इंदिरा का सर था और दोनों रो रहे थे. जेपी ने एक ही वाक्य कहा था- धैर्य रखो, सब ठीक हो जायगा…. इस जेपी को निमंत्रित करने मैं पटना स्थित कदमकुआं उनके आवास पर गया था. ७४ का वाकया है. जे पी ने कहा तुम्हारा कुलपति नहीं चाहता कि मैं विश्वविद्यालय परिसर में तुम लोगों से मिलूँ. हमने कहा कि आप गेट के बाहर लंका पर बोलिए. उनकी दूसरी शर्त थी वहां तुम लोगों के अलावा कोई भी किसी भी पार्टी का नेता नहीं बोलेगा. इस पर भी हम सहमत हो गए. मैं संचालन कर रहा था. मोहन प्रकाश और अंजना प्रकाश उस समय अध्यक्ष और उपाधाक्ष थे, उन्हें स्वागत करना था. स्वागत हो गया. अब मैंने जेपी को आमंत्रित किया ही था कि अचानक राज नारायण जी नमूदार हो गए और मेरे हाथ से माइक छीन लिया. ‘जेपी हमारे नेता हैं, वे बनारस आयें और मै उनका स्वागत न करूं यह कैसे होगा…..” और फिर शुरू हो गए. जेपी मुस्कुराते रहे. आज जे पी का जन्म दिन है . पुष्पांजलि अर्पित है .
Vikram Khamparia : JP Ji Ko Shat Shat Naman….
Sanjay Sharma : यह पढना कितना अच्छा लग रहा है..
Amitaabh Srivastava : इतने प्रेरणादायक संस्मरण के लिए ह्रदय से धन्यवाद.
Pramod Kumar Mishra : जय प्रकाश का बिगुल बजा है जाग उठी तरुणाई है, उठो जवानों क्रांति द्वार पर तुम्हे जगाने आई है I Hamare jashe log J. P. ko aap jasho ke karan hi jane
Abhimanyu Mishra : प्रणाम, मै अभी हाल ही में आप से जुड़ा हू हलाकि आपके बारे में करीब १ दसक से सुनता आ रहा हू . खासकर आपके भासन कला के बारे में तमाम संस्मरण सुना है .आज इतना महत्वपूर्ण संस्मरण के लिए सुक्रिया .
Jugnu Shardeya : मैंने पटना में रहते हुए उन जगहों पर जाना बंद कर दिया है जहां समस्त पाखंडी समुदाय श्रद्धांजलि के बहाने जेपी को भुना रहा है
Vishal Tiwari : भावनाओं का शब्दों के द्वारा सुंदर चित्रांकन ..
Rakesh Tewari : धन्यवाद चंचल जी ! पिटारा खोलते रहिए .
Alok Bajpai : Gandhi was always close to socialists.In thirties gandhi regularly met socialist leaders like Narendra dev.Jp,Masani,and others.It was socialists who despite best efforts could not grasp the importance of Gandhi in Indian Politics.Congress cleverly understood this and usurped his name.
Shaukat Ali Rizvi : shukriya bahut saari maalumaat ki
Hari Pratap Singh : जे. पी. जी के प्रति भावनाओं की एक सशक्त अभिब्यक्ति… भाई साहब| अपने अतीत की यादों से रूबरू कराने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद|
Ram Singh मजुमदार दादा का व जेपी की श्रद्धांजलियाँ पडकर आँखेँ नम हो गयी 74 की लंका की सभा की याद भी ताजा हो गयी । इसके लिए आप को प्रणाम करता हूँ ।
Ujjwal Bhattacharya आज जब वामपंथियों को कभी बीजेपी के साथ एक मंच पर देखता हूं, तकलीफ़ होती है. हालांकि मैं मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों को बीजेपी से बेहतर नहीं मानता हूं. लेकिन आरएसएस से मुकम्मल दूरी मेरी राजनीतिक समझ का बुनियादी हिस्सा है. एक मामुली वामपंथी कार्यकर्ता की हैसियत से मैं जेपी आंदोलन के विरोधी खेमे में था, इस पर मुझे कोई अफ़सोस नहीं है. अफ़सोस अगर है तो इस बात का कि हमने विवाद की संस्कृति का पालन नहीं किया था. एक महान, जुझारू, देशभक्त नेता को मेरी श्रद्धांजलि…
Narendera Kumar long live jp sir. i had the rare priviledge of seeking blessings at his kadam kua home in patna on 23rd march 1982. he was a wonderful human being, par excellence.
Alok Kumar Pandey Jan nayak ko koti koti naman
Shishir Singh आप किस्सों की पोटली है सर ।
चंचल के फेसबुक वॉल से साभार.


