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सीएम को पत्र – गोंडा मंत्री प्रकरण में कमिश्नर की भूमिका की भी जांच हो

सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह तथा गोंडा सीएमओ सम्बंधित घटना में मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर निवेदन किया है कि समाचारपत्र की खबरों के विपरीत पूर्व मंत्री कह रहे हैं कि वे निर्दोष हैं और यह गोंडा के जिलाधिकारी अभय, सीएमओ डॉ सिंह तथा अन्य की साजिश है क्योंकि वे इन अधिकारियों द्वारा नियमविरुद्ध नियुक्ति का विरोध कर रहे थे.

सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह तथा गोंडा सीएमओ सम्बंधित घटना में मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर निवेदन किया है कि समाचारपत्र की खबरों के विपरीत पूर्व मंत्री कह रहे हैं कि वे निर्दोष हैं और यह गोंडा के जिलाधिकारी अभय, सीएमओ डॉ सिंह तथा अन्य की साजिश है क्योंकि वे इन अधिकारियों द्वारा नियमविरुद्ध नियुक्ति का विरोध कर रहे थे.

 

अतः यह आवश्यक है कि इस मामले में सत्यता ज्ञात करने के लिए उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. यदि मंत्री दोषी सिद्ध होते हैं तो त्यागपत्र के अलावा विधिक कार्यवाही भी हो और यदि उनके आरोप सही हैं तो डीएम तथा सीएमओ पर कार्यवाही हो. इसके अलावा ठाकुर ने गोंडा के आयुक्त, डीआईजी, डीएम तथा एसपी के कर्तव्य के प्रति सजगता और उत्तरदायित्व के निर्वहन के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच कराये जाने की भी मांग की है.

सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मा० मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश शासन,
लखनऊ

विषय- पूर्व मंत्री श्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह से सम्बंधित घटना में आवश्यक कार्यवाही हेतु

महोदय,
कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर एक सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार हूँ तथा मानवाधिकार एवं पारदर्शी प्रशासन के क्षेत्र में कार्यरत हूँ. विगत दिनों गोंडा के विधायक और पूर्व राजस्व राज्य मंत्री श्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह द्वारा कथित रूप से गोंडा जनपद के सीएमओ डॉ एसपी सिंह को रात्रि करीब पौने बारह बजे ऑफिसर कॉलोनी, गोंडा उनके आवास पहुँच कर गाली-गलौज देने और जबरदस्ती गाडी में बैठा लेने की कथित घटना के बाद आप द्वारा मंत्रीजी का त्यागपत्र लिया गया है. लेकिन आप सहमत होंगे कि मात्र त्यागपत्र से इस पूरे प्रकरण में शासन का न्यायिक, प्रशासनिक और नैतिक उत्तरदायित्व समाप्त नहीं होता है.

इस घटना के सम्बन्ध में विभिन्न समाचारपत्रों में यह खबर छपी कि पूर्व मंत्रीजी ने जबरिया सीएमओ को उठाया, उनका दफ्तर खुलवाया और सूची बदलवाने का जबरन प्रयास किया. उसके बाद समाचारपत्रों में यह खबर आई कि सीएमओ को गोंडा प्रशासन (डीएम, एसपी तथा अन्य अधिकारियों द्वारा) डर के मारे गोंडा छोड़ कर उनकी सुरक्षा के दृष्टिगत लखनऊ ले जाया गया. अगले दिन यह खबर आई कि सीएमओ साहब लखनऊ में ही किसी अज्ञात स्थान पर छुपे रहे और शासन को उनका पता नहीं लग पाया. बाद में पूर्व मंत्रीजी ने त्यागपत्र देते समय यह कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और यह उनके विरोधियों और गोंडा के डीएम, सीएमओ तथा अन्य कुछ अधिकारियों की सुनियोजित चाल है क्योंकि वे इन लोगों द्वारा की जा रही विधिविरुद्ध भर्तियों का विरोध कर रहे थे.
मैं इस सम्बन्ध में विभिन्न प्रतिष्ठित समाचारपत्रों में छपी कुछ खबरों की छायाप्रति संलग्न करते हुए आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-

1. कृपया इस बिंदु पर जांच करवाने की कृपा करें कि जब गोंडा में मंडलायुक्त, पुलिस उपमहानिरीक्षक, जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं तो सीएमओ को अपने स्तर से अथवा इन अधिकारियों के निर्देशन में अपनी सुरक्षा के दृष्टिगत लखनऊ क्यों आना पड़ा? इससे प्रथमद्रष्टया तो यही प्रतीत होता है कि गोंडा के आयुक्त, डीआईजी, डीएम तथा एसपी अपने कर्तव्यों के उत्तरदायित्व में पूरी तरह असफल रहे. जहाँ गोंडा के डीएम द्वारा अवकाश पर जाने की बात सामने आई है वहीँ आयुक्त और डीआईजी ने वहीँ रहते हुए कोई कार्यवाही नहीं की. उन्होंने ना तो सीएमओ से कोई संपर्क किया और ना ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने अथवा अन्य आवश्यक कार्यवाही करने की जहमत उठायी और पूरी तरह आपके स्तर पर किये जाने वाले निर्णय की प्रतीक्षा करते रहे. मैं यह निवेदन करती हूँ कि इस पूरे प्रकरण में गोंडा में तैनात इन चारों वरिष्ठ प्रशासनिक/पुलिस अधिकारियों की कर्तव्य के प्रति सजगता और उत्तरदायित्व के निर्वहन के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच कराई जाए और तदनुसार इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही की जाए.

2.  एक तरफ तो समाचारपत्र यह कह रहे हैं कि पूर्व मंत्रीजी ने विधिविरुद्ध आचरण किया पर दूसरी तरफ श्री विनोद कुमार सिंह कह रहे हैं कि गोंडा के जिलाधिकारी श्री अभय तथा सीएमओ डॉ सिंह ने नियमों को ताक पर रख कर नियुक्ति की जिसका वे जनप्रतिनिधि के रूप में विरोध कर रहे थे, पर उनके राजनितिक विरोधियों ने उसे गलत शक्ल दे कर उन्हें बदनाम करने के लिए यह साजिश रची. स्पष्ट है कि दोनों में से एक ही बात सही होगी और दोनों बातें गंभीर हैं. यदि मंत्रीजी ने वैसा आचरण किया जैसा समाचारपत्रों में दर्शाया गया तो मात्र त्यागपत्र इसके लिए कत्तई पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही भी होनी चाहिए. यदि मंत्रीजी का आरोप सही है तो डीएम तथा सीएमओ पर नियमों के विरुद्ध नियुक्ति करने के लिए कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए. अतः मैं आपसे यह निवेदन करती हूँ कि इस मामले का मंत्रीजी के त्यागपत्र तक पटाक्षेप नहीं समझते हुए इस सम्बन्ध में समाचारपत्रों में प्रकाशित खबरों तथा पूर्व मंत्रीजी के आरोपों की जांच कराये जाने की कृपा करें तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही करने की कृपा करें. 

मैं समझती हूँ कि ऊपर दिये गए दोनों बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराये जाने और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही किये जाने की नितांत आवश्यकता है.

दिनांक-13/10/2012

पत्र संख्या- IRDS/Pandit/01                                     
भवदीय,
डॉ नूतन ठाकुर
लखनऊ

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