सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने आज इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में केन्द्रीय क़ानून मंत्री सलमान खुर्शीद तथा उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद द्वारा संचालित डॉ ज़ाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा कथित तौर पर की गयी अनियमितताओं तथा गड़बड़ियों के सम्बन्ध में एक रिट याचिका दायर की है. डॉ ठाकुर ने इस याचिका में सरकारी पक्षकारों के अलावा टीवी चैनल आज तक, जिसने ऑपरेशन धृतराष्ट्र प्रसारित किया था तथा डॉ ज़ाकिर हुसैन ट्रस्ट को भी पक्षकार बनाया है.
उन्होंने याचिका में निवेदन किया है कि इस ट्रस्ट द्वारा की गयी कथित गडबडियों, जालसाजी आदि के बारे में पूर्व में ही उत्तर प्रदेश सरकार के विकलांग निदेशालय द्वारा 12 जनवरी 2012 की अपनी जांच आख्या द्वारा उपकरणों का वितरण नहीं होने, जाली हस्ताक्षरों तथा जाली मुहर का प्रयोग होने आदि के बारे के कहा जा चुका है. इसी प्रकार से कैग द्वारा भी सामाजिक न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के सम्बन्ध में की गयी ऑडिट में डॉ ज़ाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा 71 लाख रुपये की अनियमितता करने के कारण उसकी वसूली करने की बात कही गयी है.
जेबी सिंह, वर्तमान रजिस्ट्रार, लखनऊ यूनिवर्सिटी तथा पूर्व सीडीओ, मैनपुरी ने भी उनके द्वारा कथित रूप से ट्रस्ट के पक्ष में दिये गए एफिडेविट की सत्यता से साफ़ इनकार किया है. ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार तथा ईओडब्ल्यू, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन जुलाई को इस प्रकरण की जांच सौंपी थी, को तत्काल इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अग्रिम विवेचना की जानी चाहिए.
ठाकुर ने हाई कोर्ट से निवेदन किया है कि गृह विभाग, उत्तर प्रदेश तथा ईओडब्ल्यू, ऊतर प्रदेश को इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा अग्रिम विवेचना करने के आदेश निर्गत करें. साथ ही उन्होंने यह विवेचना हाई कोर्ट के पर्यवेक्षण में किये जाने का भी निवेदन किया है क्योंकि इस मामले में प्रतिवादी काफी ताकतवर और प्रभावशाली लोग हैं. यह याचिका 17 अक्टूबर 2012 को सुना जाना संभावित है.


