ईटानगर: 16 अक्तूबर को जन वितरण प्रणाली की जांच करने गए और इस दौरान रहस्मयी परिस्थितियों में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले से लापता हुए आईपीएस अधिकारी एम.एस. चौहान का रविवार को दिल्ली में पता लगा लिया गया। पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) अरविंद दीप ने बताया, चौहान को आज सुबह नई दिल्ली में देखा गया। उन्होंने विस्तृत ब्योरा देने से इनकार कर दिया।
गोहाटी उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 में राज्य में हुए करोड़ों रुपए के पीडीएफ घोटाले की जांच की जिम्मेदारी विशेष जांच शाखा के पुलिस अधीक्षक चौहान को सौंपी थी। चौहान, निरीक्षक मोहन काये और कांस्टेबल विक्रम सिंह तवांग की ओर रवाना हुए थे, मगर चौहान टिप्पी से लापता हो गए।
चौहान ने टिप्पी बाजार जाते वक्त अपना मोबाइल अपने वाहन चालक को देकर कहा कि वे नजदीक की एक नदी के पास उनका इंतजार करें, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचे। पुलिस को चौहान की तवांग रवानगी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि उन्होंने अपनी गतिविधि की जानकारी पुलिस को नहीं दी थी। आठ अक्तूबर को चौहान का तबादला दिल्ली कर दिया गया और 10 अक्तूबर को उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन वह राज्य से बाहर नहीं गए।
चौहान 1998 बैच के केंद्रशासित कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने इस घोटाले के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री गेगांग अपांग, कांग्रेस के पांच विधायकों, दो मंत्रियों, कई आईएएस अधिकारियों और ठेकेदारों समेत कुल 56 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। एक हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले में वह 36 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ अभियोग लगाने के लिए अरुणाचल प्रदेश सरकार की इजाजत का इंतजार कर रहे थे।


