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काश यश चोपड़ा के गीतों की बजाय डेंगू पर भी नज़र डालता मीडिया

यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्मों का सुहाना सफर तो पहले ही थमने को तैयार था, लेकिन डेंगू ने उनकी जिंदगी के सिलसिले को भी थाम लिया। हर चैनल, हर पोर्टल, अखबार और रेडियो ने यश चोपड़ा की अचानक हुई मौत पर उन्हें रंगारंग और संगीतमयी श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरु कर दिया, लेकिन उनकी मौत के कारण बने डेंगू के बारे में इक्का-दुक्का खबरें ही दिखीं।

यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्मों का सुहाना सफर तो पहले ही थमने को तैयार था, लेकिन डेंगू ने उनकी जिंदगी के सिलसिले को भी थाम लिया। हर चैनल, हर पोर्टल, अखबार और रेडियो ने यश चोपड़ा की अचानक हुई मौत पर उन्हें रंगारंग और संगीतमयी श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरु कर दिया, लेकिन उनकी मौत के कारण बने डेंगू के बारे में इक्का-दुक्का खबरें ही दिखीं।

 

वैसे तो डेंगू भारत में वर्षों से हर साल सैकड़ों जानें लेता आया है, लेकिन करीब एक दशक से ये मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा है, लेकिन अभी तक इससे किसी बड़ी शख्शियत की मौत नहीं हुई थी। डेंगू एक ऐसी बीमारी है जो एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर के उभरे चकत्तों से खून रिसता हैं। खास बात ये है कि डेंगू का मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ पानी में पनपता है। यानी ये शायद पहली ऐसी जानलेवा बीमारी है जो गरीबों के नहीं, अमीरों के इलाकों में फैलती है।

 

डेंगू भारत ही नहीं, दुनिया के करीब 110 देशों में एक गंभीर समस्या है। पिछले कुछ दशकों से डेंगू मलेरिया के पश्चात मच्छरों द्वारा फैलने वाला दूसरा सबसे बड़ा रोग बन गया है जिससे साल भर मे 4 करोड़ लोग संक्रमित होते है वहीं डेंगू हैमरेज़ ज्वर के भी हजारों मामले सामने आते है। वैसे तो इसकी पहचान 1780 में ही कर ली गई थी, लेकिन बीसवीं सदी में पता चला कि ये वास्तव में मच्छरों की एक खास प्रजाति से फैलता है।

 

चाहे इसके इलाज के पर्याप्त सुविधाओं की कमी हो या फिर जानकारी का अभाव, देश के कई इलाकों में डेंगू बेकाबू होकर लोगों की जानें लील रहा है। उधर मीडिया को केजरीवाल, सलमान खुर्शीद और रॉबर्ट वाड्रा से फुर्सत नहीं है। बड़े शहरों और महानगरों की खबरें तो टीवी और अखबारों में आ भी जाती हैं, लेकिन छोटे शहरों और कस्बों या गांवों के बारे में कोई जान भी नहीं पाता।

 

सरकार ही नहीं, वे लोग भी इस बीमारी के फैलने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं जो अनजाने में अपने आस-पास जमा हुए साफ पानी को नज़रंदाज़ कर दे रहे हैं। अगर मीडिया अपनी दुकानदारी चलाने के साथ-साथ भी इस महामारी के खिलाफ़ एक जोरदार अभियान चलाता और लोगों में जागरुकता भर फैला देता तो शायद आज उन सैकड़ों लोगों की जानें बच जातीं जिनमें यश चोपड़ा भी शामिल होते।

 

लेखक धीरज भारद्वाज कई न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. न्यू मीडिया के सक्रिय जर्नलिस्ट हैं. कई न्यूज वेबसाइटों में संपादक का दायित्व निभाते हुए कई बड़ी खबरें इन्होंने ब्रेक की हैं. इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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