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महिषासुर शहादत दिवस को लेकर जेएनयू कैंपस में तनाव

नई दिल्‍ली : नई दिल्‍ली के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (JNU) में महिषासुर शहादत दिवस के आयोजन को लेकर तनाव का महौल बनने लगा है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्‍टूडेंट फोरम (AIBSF) द्वारा लगाये गये कुछ पोस्‍टर को फाड दिया गया है। पोस्‍टर में संगठन ने महिषासुर को भारत के आदिवासियों, दलितों और पिछडों का पूर्वज बताते हुए 29 अक्‍टूबर (शरद पूर्णिमा) को उनकी शहादत मनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था।

नई दिल्‍ली : नई दिल्‍ली के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (JNU) में महिषासुर शहादत दिवस के आयोजन को लेकर तनाव का महौल बनने लगा है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्‍टूडेंट फोरम (AIBSF) द्वारा लगाये गये कुछ पोस्‍टर को फाड दिया गया है। पोस्‍टर में संगठन ने महिषासुर को भारत के आदिवासियों, दलितों और पिछडों का पूर्वज बताते हुए 29 अक्‍टूबर (शरद पूर्णिमा) को उनकी शहादत मनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था।

 

ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट फोरम के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जितेंद यादव व जेएनयू अध्‍यक्ष विनय कुमार ने बताया कि तीन दिन पहले कैंपस में इससे संबंधित 30 बडे पोस्‍टर विभिन्‍न स्‍‍थानों पर लगाये गये थे। इन पोस्‍टरों में अकादमिक जगत की प्रतिष्ठित प‍त्रिका ‘फारवर्ड प्रेस’ में प्रकाशित कवर स्‍टोरी में प्रकाशित शोध को दर्शाया गया था, जिसके अनुसार ‘असुर’ एक जनजाति है, जो आज भी झारखंड में पायी जाती है। 

छात्र नेताओं के अनुसार, संगठन के सदस्‍यों ने उन स्‍थानों पर, जहां पोस्‍टर लगाये गये थे, का मुआयना करने पर पाया कि लाइब्रेरी के सामने व केसी मार्केट कंप्‍लेक्‍स में लगाये गये पोस्‍टर फाड दिये गये हैं। संगठन यह मुद्दा जेएनयूएसयू व विश्‍वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाएगा। उन्‍होंने आरोप लगाया कि पोस्‍टर दक्षिणपंथी- हिंदूवादी राजनी‍ति से जुडे असमाजिक तत्‍वों ने फाडे हैं। 

छात्र नेताओं ने बताया कि कैंपस में महिषासुर शहादत दिवस मनाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूकडेंट फोरम (AIBSF) की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) शाखा भी स्‍थानीय स्‍तर पर बीएचयू में शहादत दिवस का आयोजन करेगी जबकि लखनउ यूनिवर्सिटी व भीमराव अंबेदकर यूनिवर्सिटी, बिहार के विद्याथी बडी संख्‍या में शहादत दिवस में भाग लेने 29 अक्‍टूबर को जेएनयू आएंगे। उन्‍होंने कहा कि महिषासुर शहादत दिवस भारत के बहुजनों के सांस्‍कृति आजादी की लडाई है, अपनी जड़ों की ओर लौटना है तथा अपने पूर्वजों के प्रति सम्‍मान व्‍यक्त करना है।

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