ग़ैरसरकारी संस्था गैमट फाउंडेशन द्वारा आयोजित साहित्य परिमल सम्मान समारोह 2011-12 एवं कवि सम्मलेन का आयोजन आज इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में संपन्न हुआ। जिसमे हिंदी के प्रतिष्ठित कवि और आकाशवाणी के उपमहानिदेशक श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी को पहला “साहित्य परिमल” सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश हिन्दी अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष, वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजनीतिज्ञ श्री उदय प्रताप सिंह ने की। कार्यक्रम का सुचारू और मधुर संचालन दूरदर्शन की सुविख्यात उद्घोषिका सरला महेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री योगानंद शास्त्री ने वाग्देवी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री योगानंद शास्त्री ने कहा कि हिन्दी आज अनाथ हो गई है। ऐसे में यह पुरूस्कार हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति महान थी, महान है और महान रहेगी क्यूंकि न सिर्फ भारत अपितु विश्व के कई देशों में लोग भारतीय संस्कृति का अनुसरण करते हैं।
रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह अलग-अलग देशों जैसे जावा, सुमात्रा, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, वियतनाम आदि ने रामायण को भिन्न-भिन्न प्रकार से संरक्षित किया है और उससे प्रेरणा लेते हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात पर दुःख व्यक्त किया कि हम भारतीय लोग स्वयं अपनी जड़ों अर्थात् अपनी संस्कृति से कटते जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुसरण करने के बजाय अपनी भाषा, भूषा और भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। सम्मान्य कवि श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी ने निश्चित रूप से अपनी प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच भी समाज के भविष्य को और बेहतर बनाने की अपनी चिंता को अपनी कविताओं मे मुखरित किया है। संबोधन के अंत में उन्होंने गैमट फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री दुष्यन्त बृजवीर सिंह को एक सकारात्मक पहल के लिए पुनः बधाई देते हुए इस शुरुआत को अनवरत जारी रखने और इसमें और नए आयाम जोड़ने का निवेदन किया।
पहला “साहित्य परिमल” सम्मान प्राप्त करने के बाद कवि और प्रशासक श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने सभी सुधिजनों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह यह पुरुस्कार पाकर अभिभूत हैं। साथ एक मिसाल कायम करते हुए उन्होंने पुरुस्कार स्वरूप प्राप्त 51,000 रुपए की धनराशि को उसी छड़ संस्था के विकास हेतु दान कर दिया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आज की शाम एक यादगार शाम है। जिसमें एक इतिहास की बुनियाद रखी जा रही है। संबोधन सत्र से पहले गैमेट फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री दुष्यंत बृजवीर सिंह ने सभी अतिथियों का गुलदस्तों से स्वागत किया| अपने संबोधन मे श्री दुष्यंत ने कहा कि गैमेट फाउन्डेशन एक गैर सरकारी संस्था है जो समाज, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र मे हर संभव योगदान के लिए कटिबद्ध और अग्रसर है| उन्होंने कहा कि गैमेट ने अब तक दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों मे ज़रूरतमंद लोगों को निःशुल्क इलाज और शिक्षा उपलब्ध करने की दिशा में अपने प्रयासों की शुरुआत की है और साहित्य के क्षेत्र मे संस्था का यह पहला प्रयास है। साहित्य के क्षेत्र मे यह संस्था हिंदी के प्रतिभासंपन्न युवा लेखकों और कवियों के प्रोत्साहन के लिए कुछ नए पुरस्कारों को लाने की भी योजना बना रही है| उन्होंने यह भी कहा कि संस्था इस बात के लिए भी योजना बना रही है कि संसाधनों के आभाव मे जो कवि और लेखक अपनी प्रकाशन योग्य पुस्तकें भी छपवाने मे समर्थ नहीं हो पाते उनकी कृतियों को प्रकाश मे लाने हेतु गैमेट फाउन्डेशन उचित संसाधन उपलब्ध कराए।
शाम 6 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में एक कवि सम्मलेन का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्री उदय प्रताप सिंह, श्री किशन सरोज, श्री बाल स्वरूप ‘राही’, डॉ.धनंजय सिंह, डॉ. अश्वघोष, श्री अरूण भारती, श्री विजयपाल सिंह और श्रीमती ममता किरण आदि प्रतिष्ठित कवियों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया | कवि सम्मेलन का सफल एवं प्रवाहमय संचालन कवि एवं शिक्षाविद् डॉ0 धनंजय सिंह ने किया। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष प्रदान किए जाने वाले ’साहित्य परिमल’ सम्मान के अंतर्गत चयनित साहित्यकार को इक्यावन हज़ार रुपये (51000/-) की धनराशि, प्रशस्ति पत्र, एवं शाल भेंट किया जाता है।


