ग्रीस में कर चोरी करने वाले कुछ संदिग्ध लोगों की सूची छापने के आरोप में गिरफ़्तार एक ग्रीक पत्रिका के संपादक कॉस्टास वैक्सवेनिस को रिहा कर दिया गया है. कॉस्टास वैक्सेवेनिस ने अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘हॉट डॉक’ में ग्रीस के ऐसे दो हज़ार लोगों के नाम छाप दिए थे जिनके स्विस बैंक में खाते थे. इस सूची में सरकार के एक मंत्री के अलावा सार्वजनिक जीवन के कई गणमान्य व्यक्तियों के नाम भी शामिल थे.
वैक्सवेनिया के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति ने अपनी निजता के हनन के ख़िलाफ़ कोई शिकायत नहीं की थी. राजधानी एथेंस में एक दिन तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने वैक्सेवेनिया को बेक़सूर क़रार दिया. अदालत के इस फ़ैसले के बाद कॉस्टास ने कहा कि ये अभिव्यक्ति की आज़ादी की जीत है.
कॉस्टास का कहना था, ”अदालत ने जन भावनाओं की क़द्र की है और सही फ़ैसला किया है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये कि इस फ़ैसले से पत्रकारिता को आज़ादी दी गई है. पिछले काफ़ी समय से पत्रकारिता क़ानूनी बाध्यताओं की बंधक बन कर रह गई थी. ये फ़ैसला बहुत ही गंभीर है जिससे हमारे साथियों को अपना काम करने और सच बोलने की आज़ादी मिलेगी.”
वैक्सवेनिस ने कहा कि उन्होंने ये सूची इसलिए सार्वजनिक कर दी क्योंकि उन्हें लगता था कि एक पत्रकार होने के नाते सच को बाहर लाना उनकी ज़िम्मेदारी थी. वैक्सवेनिस ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा, ”पिछली तीन सरकारों ने झूठ बोला है और ग्रीस की जनता का मज़ाक़ उड़ाया है. उन्हें ये सूची संसद के सामने पेश करनी चाहिए थी या अदालत को देनी चाहिए थी. लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया. उन्हें इसके लिए जेल में भेजा जाना चाहिए.”
अदालत में अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि कॉस्टास वैक्सवेनिया ने संदिग्ध कर चोरों की सूची सार्वजनिक कर उनका अपमान किया है और ‘ख़ून के प्यासे’ एक समाज को उन्होंने वे नाम दे दिए थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार देश जिस समस्या से गुज़र रहा है, ‘किसी व्यक्ति को निशाना बनाना’ उसका समाधान नहीं है. लेकिन अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलील को ख़ारिज करते हुए वैक्सवेनिया को रिहा करने में कोई समय नष्ट नहीं किया. आर्थिक मंदी के शिकार ग्रीस को वित्तीय सहायता देने वाले अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता ग्रीस पर इस बात के लिए दबाव डाल रहें हैं कि ग्रीस अपने देश में कर चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करे.
कॉस्टास ने संदिग्ध कर चोरी करने वालों की जो सूची जारी की थी उसे सबसे पहले एचएसबीसी बैंक के एक अधिकारी ने लीक की थी और उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मौजूदा प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड को सौंप दी थी जब वो 2010 में फ़्रांस की वित्त मंत्री थीं. लगार्ड ने वो सूची ग्रीस अधिकारियों को दी थी लेकिन उन्होंने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी. ग्रीस के दो पूर्व वित्त मंत्रियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने ये सूची देखी थी. हालाकि इसी साल जून में वित्त मंत्री बने यान्नीस स्टॉरनारास ने संसद में कहा कि उन्होंने ऐसी कोई सूची नहीं देखी है.(साभार- बीबीसी)


