: आरटीआई से मिली गड़बड़ी की जानकारी : नवी मुंबई : महाराष्ट्र के कई मंत्रियों और नेताओ द्वारा अपनी सत्ता व ताकत का दुरुपयोग कर भूखंड लिए जाने का मामला सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता राजीव मोहन मिश्रा ने सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए जानकारी में इस का खुलासा हुआ है। इस में त्रिपुरा के राज्यपाल सहित महाराष्ट्र के एक केन्द्रीय मंत्री और राज्य मंत्री भी शामिल हैं। आरटीआई कार्यकर्ता राजीव मोहन मिश्रा ने बताया कि सिड्को राज्य सरकार की एक संस्था है, जिस के माध्यम से भूखंड का विकास करने का काम किया जाता है। इस के माध्यम से राज्य में सेवाभावी कार्य करने वाली संथाओं को नाममात्र दर पर भूखंड दिया जाता है ताकि वे शैक्षणिक, अस्पताल आदि समाजिक कार्य कर सके, लेकिन राज्य के कुछ मंत्री और नेताओं द्वारा अपने ताकत से संस्था के नाम पर भूखंड लेकर कामर्शियल उपयोग किया जा रहा है, जिस का खुलासा सूचना अधिकार में मिली जानकारी में हुआ है।
इस में त्रिपुरा के राज्यपाल डीवाय पाटिल सहित स्व. विलासराव देशमुख, उत्पादन शुल्क मंत्री गणेश नाईक, पतंगराव कदम, सांसद पद्दम सिंग पाटिल, रामराव आदिक, पूर्व सांसद रामसेठ ठाकुर, सिड्को संचालक नामदेव भगत, दिलीप वालसे पाटिल सहित कई नेताओं का समावेश है। इन लोगों ने सिड्को से संस्था के नाम से नाम मात्र की राशि पर भूखंड लेकर उस का इस्तेमाल कामर्शियल रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप मिश्रा ने लगाया है। नेरुल स्थित डॉ. डी. वाय पाटिल स्टेडियम जिस भूखंड पर बना है वह भूखंड युवाओं में खेल के प्रति रूचि निर्माण करने के लिए लिया गया था। मात्र उस भूखंड पर स्टेडियम का निर्माण कर कमर्शियल उपयोग किए जाने का आरोप मिश्रा ने लगाया है।
उनका आरोप है कि इसी तरह कई ऐसे शैक्षणिक संस्थान हैं जो शैक्षणिक कार्य के लिए जमीन लिए थे, पर अब शिक्षा के नाम पर शिक्षा का व्यवसाय कर रहे हैं। इस के लिए इस तरह इन संस्थाओं के माध्यम से कई नेताओं ने अपने ताकत का उपयोग कर भूखंड लिया है जिस के कारण सिड्को और राज्य सरकार को कम से कम 600 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। इस की शिकयत राज्य लोकायुक्त से करने का निर्णय आरटीआई कार्यकर्ता राजीव मोहन मिश्रा ने लिया है। उस के बाद इस के खिलाफ न्यायलय में जाने की जानकारी मिश्रा ने दिया।
मुंबई से रेनू मिश्रा की रिपोर्ट.


