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पत्रकारिता के नाम पर मिशनरी स्‍कूलों की चाटुकारिता

पत्रकारिता के नाम पर इस समय आगरा शहर में मिशनरी स्कूलों की चाटुकारिता चरम पर है। तमाम मिशनरी स्कूलों में इस समय दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में तथाकथित रूप से प्रतिष्ठित इन मिशनरी स्कूलों में अपने पाल्यों के दाखिले हेतु अभिभावक ऐड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। दाखिले हेतु जुगाड़ भी खूब लगाई जाती है जिनमें वरिष्ठ पदों पर आसीन शहर की मीडिया जगत के दिग्गज भी अपने अथवा अपने परिचितों के पाल्यों के दाखिले हेतु सिफारिश करते नजर आते हैं। अब ऐसे में इन स्कूलों के मैनेजमेंट को खुश रखना इनकी मजबूरी बन जाती है। पिछले दिनों शहर के एक कॉन्वेंट स्कूल “सेंट पेट्रिक्स” में दाखिले हेतु फॉर्म वितरण शुरू हुआ। 

पत्रकारिता के नाम पर इस समय आगरा शहर में मिशनरी स्कूलों की चाटुकारिता चरम पर है। तमाम मिशनरी स्कूलों में इस समय दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में तथाकथित रूप से प्रतिष्ठित इन मिशनरी स्कूलों में अपने पाल्यों के दाखिले हेतु अभिभावक ऐड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। दाखिले हेतु जुगाड़ भी खूब लगाई जाती है जिनमें वरिष्ठ पदों पर आसीन शहर की मीडिया जगत के दिग्गज भी अपने अथवा अपने परिचितों के पाल्यों के दाखिले हेतु सिफारिश करते नजर आते हैं। अब ऐसे में इन स्कूलों के मैनेजमेंट को खुश रखना इनकी मजबूरी बन जाती है। पिछले दिनों शहर के एक कॉन्वेंट स्कूल “सेंट पेट्रिक्स” में दाखिले हेतु फॉर्म वितरण शुरू हुआ। 

 

“विश्व के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले अखबार” का दावा करने वाले अखबार ने खबर छाप दी कि “फॉर्म खरीदने के लिए मारामारी मची, अभिभावक आपस में भिड़े” जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं था। न तो वहाँ फॉर्म खरीदने के लिए किसी प्रकार की कोई अफरातफरी मची थी और न ही अभिभावक आपस में एक-दूसरे से लड़ रहे थे। फॉर्म वितरण की प्रक्रिया बहुत ही आराम से व शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो रही थी। ये खबर मात्र उस कॉन्वेंट स्कूल के प्रबंधन को प्रसन्न करने हेतु डाली गयी थी। एक कदम और आगे बढ़ते हुये “पढ़ोगे तभी तो आगे बढ़ोगे” का राग अलापने वाले दैनिक “हिन्दुस्तान” ने तो हद कर दी। खबर छाप दी कि “फॉर्म लेने को उमड़ी भीड़- सौ सीटों के लिए १८०० फार्मों का वितरण हुआ”, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।

 

सेंट पेट्रिक्स स्कूल के कर्मचारियों के अनुसार कुल ८०० फार्मों का वितरण हुआ है। सम्बंधित खबर आज फिर दैनिक जागरण में भी छपी है, जिसमें उन्होंने भी फार्मों की संख्या ८०० ही बताई है। समझ नहीं आता कि आखिर ऐसी भी क्या चाटुकारिता कि आप अपने पाठकों तक गलत सूचनाएँ पहुँचाकर उन्हें भ्रमित करें! दी गयी तस्वीरों में देखिये “दैनिक जागरण” व “हिन्दुस्तान” में छपी सम्बंधित खबर! अब ये तो जागरण व हिन्दुस्तान प्रबंधन स्वयं ही जाँच लें कि आखिर इन दोनों में से किसकी खबर के आँकड़े सही है और किसके गलत!

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