आप जो तस्वीरें देख रहे हैं उसके बारे में आइये हम आपको बताते हैं कि क्या हैपूरा मामला। भले आदमी की एक मिनट में इज्जत उतार देने में माहिर उत्तर प्रदेश की पुलिस इन दिनों मुलजिमों की खातिरदारी में लगी है। लेकिन पुलिस की यह खातिरदारी इतनी भारी पड़ सकती है कि वह मुंह दिखाने के काबिल भी ना रहे। हम बात कर रहे हैं यू.पी. के औरैया पुलिस की। सदर कोतवाली की पुलिस ने १६ अगस्त को एक अमित पाठक नाम के अपराधी को गिरफ्तार किया। अमित को जेल भेजने से पहले पुलिस ने उसे जिला चिकित्सालय में डाक्टरी के लिए भेजा। मुलजिम अमित पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी सहित अस्पताल से भाग खडा हुआ। लोगों के सहयोग से पुलिस ने बड़ी मुश्किल से कई घंटों के बाद अमित को दुबारा पकड़ लिया।
पुलिस अमित को थाने ले आई, जहां अमित ने पुलिस से नशा का कुछ सामान माँगा। पुलिस ने मुलजिम अमित की ख्वाहिश को भी पूरा कर दिया। पुलिस ने स्मैक मगाया और माचिस के साथ अमित की सेवा करनी शुरू कर दी। पुलिस की मौजूदगी में ही अमित ने स्मैक का नशा पूरा किया। सवाल यह उठता है कि यदि पुलिस ने मुलजिम को स्मैक दिया तो उसे यह भी पता होगा कि स्मैक बिकती कहाँ है? और बिकती है तो किसकी इजाजत से? संवेदनशील स्थान पर मुलजिम को माचिस और स्मैक किस अफसर की इजाजत पर दी गयी। यदि माचिस की तीली जलाकर मुलजिम सरकारी कागजों पर फेंक देता तो क्या होता?

गौरतलब है कि तीन वर्ष पूर्व इसी थाने में पुलिस ने मुश्किल से पकड़ में आये एक मुलजिम को गिरफ्तार कर इतना खुस हुयी थी कि उसे थानाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर उसकी आरती उतरवाई थी। इसे देख वहाँ मौजूद लोगों ने कहा कि औरैया पुलिस की कार्यशैली का भगवान ही मालिक है। अगले दिन कानपुर रेंज के डीआईजी सुनील गुप्ता जिले के दौरे पर आये। औरैया कोतवाली पुलिस की सेवाभावना से खुश होकर डीआईजी साहब ने मुलजिम की स्मैक से खातिरदारी करने वाली पुलिस को 7500 रुपये का इनाम भी दे दिया, लेकिन जब मीडिया ने थाने की हकीकत दिखाई तो डीआईजी साहब दंग रह गए और इसे घोर लापरवाही और अपराध मानते हुए सख्त कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया। तीन माह बीतने को हैं लेकिन कार्रवाई क्या हुयी किसी को पता नहीं। सभी पुलिस वाले मौज में आज भी अपने ढर्रे पर अपने मनमुताबिक कार्य कर रहे हैं।
सुरेश मिश्रा की रिपोर्ट.


