बाला साहेब ठाकरे की हालत नाजुक है। किसी बीमार को देखने जाना अच्छी बात है, लेकिन जिस तरह से बॉलीवुड के नामचीन चेहरों में मातोश्री जाकर चेहरा दिखाने की होड़ लगी है, उसके कुछ मायने हैं। ठाकरे कोई संत या महात्मा नहीं हैं। उनकी ‘सल्तनत’ उत्तर भारतीयों और मुसलमानों के प्रति नफरत पर परवान चढ़ी है। अमिताभ बच्चन मातोश्री में 12 घंटे में दो बार अपने चेहरे की आमद दर्ज करा आए हैं। साथ में अपने बेटे को भी ले जाना नहीं भूले। अमिताभ ही नहीं, संजय दत्त, सलमान खान और शाहरुख सरीखे अभिनेता भी अपना चेहरा वहां दिखा आए हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि वे शिवसेना के उत्तराधिकारी उद्धभव ठाकरे को संदेश देना चाहते हैं कि देखो हम उनके पिता से कितना प्रेम करते हैं।
ये सितारे जानते हैं कि शिवसेना से ‘बनाकर’ रखने में फायदा है। यही वजह है कि उत्तर भारतीयों पर जब मनसे और शिवसेना का डंडा चलता है, तो ये लोग अपने बंगलों में दुबके पड़े रहते हैं। अपने उन भाइयों के लिए उनके दिल में एक बार भी हमदर्दी नहीं उभरती, जो खुद रोजी-रोटी कमाने उत्तर भारत से ही मुंबई गए थे। कह सकते हैं कि शाहरुख खान ने अपनी फिल्म ‘माई नेम इज खान’ के वक्त बाल ठाकरे से पंगा लिया था, लेकिन इसके पीछे उनका मकसद अपनी फिल्म को मुफ्त की पब्लिसिटी दिलाना भर था।
अभी कुछ दिन पहले एके हंगल का देहांत हुआ था, तो इन सितारों ने उनके अंतिम संस्कार तक में जाने की जहमत नहीं उठाई थी। उस वक्त शायद उनके पास वक्त की कमी थी, लेकिन बाला साहेब ठाकरे की मिजाजपुर्सी करने के लिए शूटिंग कैंसिल कराकर जा रहे हैं। अब इनके पास कहां से वक्त आ गया? जिस यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन को स्टारडम दिलाया, उन यश चोपड़ा ने देहांत से पहले कई बार अमिताभ बच्चन से मिलने की ख्वाहिश जाहिर की थी, लेकिन खुद बच्चन ने उनके देहांत के बाद कबूला था कि वक्त की कमी के चलते उनसे नहीं मिल सका था।
बहरहाल, मातोश्री में बार-बार चेहरा दिखाने की होड़ से एक बार फिर यह तो साबित हुआ कि ‘ताकत’ को हमेशा ही सलाम किया जाता है। वह ताकत यदि बाल ठाकरे सरीखी हो तो चेहरा दिखाना जरूरी हो जाता है। तय करिए कि रुपहले पर्दे पर खलनायकों को तबाह-ओ-बरबाद करने वाले हमारे ‘नायक’ खुद कितने बड़े ‘खलनायक’ हैं।
लेखक सलीम अख्तर सिद्दीकी पत्रकार हैं.


