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मौजूदा दौर में निर्णायक भूमिका में है दूरदर्शन

चंडीगढ़ : विश्व टेलीविजन दिवस पर दूरदर्शन चंडीगढ़ द्वारा एक विशेष संवाद चर्चा में विशेषज्ञों ने टेलीविजन की नई भूमिका को उजागर किया। सीधे प्रसारित हुए इस विशेष कार्यक्रम में दूरदर्शन चंडीगढ़ के कार्यक्रम प्रमुख व लेखक डॉ. केके रत्तू पब्लिक ब्रॉडकॉस्टर के तौर पर दूरदर्शन की भूमिका को रेखांकित करते हुए दूरदर्शन के विविध लोक प्रसारित व जनोपयोगी कार्यक्रमों के बारे में बताया और दूरदर्शन की लोक पहुंच तथा मानवीय सरोकारों का संवाहक बताया। इस परिचर्चा में हिंदी के प्रसिद्ध चिंतक माधव कौशिक ने कहा, टेलीविजन ने भारतीय संस्कृति को नए आयाम दिए हैं व टेलीविजन भविष्य की नई दुनिया की झलक दिखाने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम में दूसरे विशेषज्ञ व पंजाब यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता-संचार विभाग के प्रो. जयंत पेटकर ने टेलीविजन पर पेड न्यूज़ व दूरदर्शन की भू्मिका को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में निजी चैनलों के  मुकाबले वर्तमान समय में भी दूरदर्शन की भूमिका बड़ी ही प्रासंगिक होने के साथ-साथ समाज सरोकारों को जोडऩे वाली है। 

चंडीगढ़ : विश्व टेलीविजन दिवस पर दूरदर्शन चंडीगढ़ द्वारा एक विशेष संवाद चर्चा में विशेषज्ञों ने टेलीविजन की नई भूमिका को उजागर किया। सीधे प्रसारित हुए इस विशेष कार्यक्रम में दूरदर्शन चंडीगढ़ के कार्यक्रम प्रमुख व लेखक डॉ. केके रत्तू पब्लिक ब्रॉडकॉस्टर के तौर पर दूरदर्शन की भूमिका को रेखांकित करते हुए दूरदर्शन के विविध लोक प्रसारित व जनोपयोगी कार्यक्रमों के बारे में बताया और दूरदर्शन की लोक पहुंच तथा मानवीय सरोकारों का संवाहक बताया। इस परिचर्चा में हिंदी के प्रसिद्ध चिंतक माधव कौशिक ने कहा, टेलीविजन ने भारतीय संस्कृति को नए आयाम दिए हैं व टेलीविजन भविष्य की नई दुनिया की झलक दिखाने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम में दूसरे विशेषज्ञ व पंजाब यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता-संचार विभाग के प्रो. जयंत पेटकर ने टेलीविजन पर पेड न्यूज़ व दूरदर्शन की भू्मिका को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया। उन्होंने कहा कि आज के युग में निजी चैनलों के  मुकाबले वर्तमान समय में भी दूरदर्शन की भूमिका बड़ी ही प्रासंगिक होने के साथ-साथ समाज सरोकारों को जोडऩे वाली है। 

 

इस खास मौके पर विशेषज्ञ का मत था कि दूरदर्शन पिछले छह दशकों से लगातार दर्शकों के साथ-साथ समाज को भी अपने नए-नवेले और सृजनात्मक कार्यक्रम पेश कर नई दिशा दे रहा है। इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि दूरदर्शन भारतीयता की साझी पहचान जन-जन तक पहुंचाने में निर्णायक किरदार निभा रहा है। रत्तू के मतानुसार आने वाले समय में चाहे जितने चैनल हो जाएं पर दूरदर्शन की साख पर आंच नहीं आएगी। आज भी बहुसंख्यक लोगों का मत है कि दूरदर्शन पर आने वाले किसी भी कार्यक्रम को परिवार के लोग साथ बैठकर देख सकते हैं। दूरदर्शन सबसे पहले और सबसे आगे जैसे जुमलों वाले चैनलों से बिल्कुल अलग अपनी राह पर है क्योंकि वह कुछ निजी उददेश्यों और सामाजिक सरोकारों को लेकर चला था। आज उन्हीं पर काम कर रहा है। दूरदर्शन दर्शक संख्या बढ़ाने के लिए कुछ भी करने पर आमादा नहीं हो सकता। ऐसा करने पर उसमें और अन्य चैनलो में क्या फर्क रह जाएगा। देश में आज भी सबसे ज्यादा देखे जाने वाले दूरदर्शन की प्रतिष्ठा इसी तरह बढ़ती रहेगी।

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